{"_id":"69837b5cca1c9326440f447e","slug":"jaishankar-underlines-challenges-of-excessive-concentration-of-critical-minerals-2026-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaishankar: महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत का दो टूक संदेश, विदेश मंत्री बोले- सप्लाई चेन का जोखिम कम करना जरूरी","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Jaishankar: महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत का दो टूक संदेश, विदेश मंत्री बोले- सप्लाई चेन का जोखिम कम करना जरूरी
Wed, 04 Feb 2026 10:31 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 04 Feb 2026 10:31 PM IST
सार
अमेरिका में महत्वपूर्ण खनिजों की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि जरूरी खनिज का कुछ क्षेत्रों में सिमटना वैश्विक जोखिम है। उन्होंने सप्लाई चेन डी-रिस्किंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया। भारत ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन और दुर्लभ खनिज कॉरिडोर जैसे कदम गिनाए। इसी दौरान उन्होंने कई देशों के विदेश मंत्रियों से भी रणनीतिक बातचीत हुई।
विज्ञापन
बैठक में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अमेरिका दौरे पर पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जरूरी खनिजों की सप्लाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इन खनिजों का उत्पादन और नियंत्रण कुछ ही देशों या क्षेत्रों में सिमट जाना दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। वॉशिंगटन डीसी में आयोजित मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत ने साफ कहा कि सप्लाई चेन को सुरक्षित और संतुलित बनाना अब वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए।
विदेश मंत्री ने जरूरी खनिजों मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जरूरत से ज्यादा एक जगह या कुछ देशों पर निर्भरता जोखिम बढ़ाती है। उन्होंने सप्लाई चेन को डी-रिस्क करने यानी जोखिम घटाने के लिए संगठित अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया। बैठक का आयोजन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की पहल पर हुआ। जयशंकर ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।
भारत ने रखी अपनी रणनीति
जयशंकर ने अपने संबोधन में बताया कि भारत जरूरी खनिज के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मजबूती की दिशा में कई कदम उठा रहा है। उन्होंने नेशनल जरूरी खनिज मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर और जिम्मेदार व्यापार व्यवस्था जैसे कार्यक्रमों का जिक्र किया। उनका कहना था कि भारत सप्लाई चेन को मजबूत, विविध और भरोसेमंद बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है। इससे उद्योग, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर को स्थिर आपूर्ति मिल सकेगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- लोकसभा में क्यों टला पीएम मोदी का संबोधन?: ट्रेजरी बेंच के पास बैनर लेकर पहुंचीं महिला सांसद, भाजपा का दावा
फोर्ज पहल को भारत का समर्थन
विदेश मंत्री ने जरूरी खनिज से जुड़ी फोर्ज पहल को भी भारत का समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की बहुपक्षीय पहल से देशों के बीच तालमेल बढ़ेगा और सप्लाई चेन में पारदर्शिता आएगी। भारत ने साफ किया कि वह सहयोग आधारित मॉडल का पक्षधर है, जिसमें संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी और नियम आधारित ढांचे में हो।
कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात
बैठक से पहले जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद, पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की और सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से बातचीत की। इसके अलावा नीदरलैंड, इटली, मलेशिया, बहरीन, मंगोलिया, रोमानिया, इस्राइल और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की गई। इन बैठकों में खनिज सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और सप्लाई नेटवर्क पर फोकस रहा।
वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ता फोकस
जरूरी खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और हाईटेक उद्योगों में होता है। ऐसे में इनकी सप्लाई बाधित होना सीधे अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। जयशंकर ने कहा कि भविष्य की इंडस्ट्री और हरित ऊर्जा बदलाव जरूरी खनिज पर टिका है। इसलिए जरूरी है कि दुनिया मिलकर सप्लाई चेन को सुरक्षित, विविध और टिकाऊ बनाए। भारत ने इस दिशा में सक्रिय भागीदारी का संकेत दिया है।
अन्य वीडियो-
विज्ञापन
विदेश मंत्री ने जरूरी खनिजों मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जरूरत से ज्यादा एक जगह या कुछ देशों पर निर्भरता जोखिम बढ़ाती है। उन्होंने सप्लाई चेन को डी-रिस्क करने यानी जोखिम घटाने के लिए संगठित अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया। बैठक का आयोजन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की पहल पर हुआ। जयशंकर ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।
विज्ञापन
भारत ने रखी अपनी रणनीति
जयशंकर ने अपने संबोधन में बताया कि भारत जरूरी खनिज के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मजबूती की दिशा में कई कदम उठा रहा है। उन्होंने नेशनल जरूरी खनिज मिशन, रेयर अर्थ कॉरिडोर और जिम्मेदार व्यापार व्यवस्था जैसे कार्यक्रमों का जिक्र किया। उनका कहना था कि भारत सप्लाई चेन को मजबूत, विविध और भरोसेमंद बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है। इससे उद्योग, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी सेक्टर को स्थिर आपूर्ति मिल सकेगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- लोकसभा में क्यों टला पीएम मोदी का संबोधन?: ट्रेजरी बेंच के पास बैनर लेकर पहुंचीं महिला सांसद, भाजपा का दावा
फोर्ज पहल को भारत का समर्थन
विदेश मंत्री ने जरूरी खनिज से जुड़ी फोर्ज पहल को भी भारत का समर्थन देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की बहुपक्षीय पहल से देशों के बीच तालमेल बढ़ेगा और सप्लाई चेन में पारदर्शिता आएगी। भारत ने साफ किया कि वह सहयोग आधारित मॉडल का पक्षधर है, जिसमें संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी और नियम आधारित ढांचे में हो।
कई देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात
बैठक से पहले जयशंकर ने कई देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद, पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की और सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से बातचीत की। इसके अलावा नीदरलैंड, इटली, मलेशिया, बहरीन, मंगोलिया, रोमानिया, इस्राइल और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधियों से भी चर्चा की गई। इन बैठकों में खनिज सहयोग, रणनीतिक साझेदारी और सप्लाई नेटवर्क पर फोकस रहा।
वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ता फोकस
जरूरी खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और हाईटेक उद्योगों में होता है। ऐसे में इनकी सप्लाई बाधित होना सीधे अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। जयशंकर ने कहा कि भविष्य की इंडस्ट्री और हरित ऊर्जा बदलाव जरूरी खनिज पर टिका है। इसलिए जरूरी है कि दुनिया मिलकर सप्लाई चेन को सुरक्षित, विविध और टिकाऊ बनाए। भारत ने इस दिशा में सक्रिय भागीदारी का संकेत दिया है।
अन्य वीडियो-