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Golan Heights: फलस्तीन के बाद इस देश के कब्जाए क्षेत्र पर बसावट बढ़ाने की तैयारी में इस्राइल, जानें मायने
Mon, 16 Dec 2024 07:57 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरुशलम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यरुशलम
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 16 Dec 2024 07:57 PM IST
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सीरिया की गोलन पहाड़ियों पर इस्राइल का कब्जा।
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अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम एशिया के आधुनिक इतिहास में युद्ध का दौर कोई नई बात नहीं है। हालांकि, इन जंगों के बीच जो एक देश अपनी ताकत के जरिए दूसरे देशों के क्षेत्र पर कब्जा करने में सफल रहा है, वह है इस्राइल। चौंकाने वाली बात यह है कि पड़ोस में सभी इस्लामिक देशों से इस्राइल ने न सिर्फ जंग जीती हैं, बल्कि उनके क्षेत्रों पर भी कब्जा किया है। फिर चाहे वह फलस्तीन के गाजा से सटा क्षेत्र हो, मिस्र हो, लेबनान या सीरिया का इलाका। बीते कुछ दशकों में इस्राइल ने इन क्षेत्रों में अपने नागरिकों को बसाना भी शुरू किया है। हालांकि, इस्राइल ने अब जिस क्षेत्र में अपने लोगों को बसाने की योजना तैयार की है, वहां उसके लोगों पर खतरा सबसे ज्यादा होने वाला है। यह क्षेत्र है सीरिया की गोलन पहाड़ियां।इस्राइल की सीरिया के कब्जाए क्षेत्रों में लोगों की बसाने की योजना के बारे में जानने से पहले जानना जरूरी है कि आखिर गोलन की पहाड़ियां हैं कहां? कूटनीतिक तौर पर यह क्षेत्र कितना अहम है? ये क्षेत्र कब और कैसे इस्राइल के कब्जे में आया? और यहां नागरिकों को बसाने की इस्राइल की योजना क्या है? आइये जानते हैं...
गोलन पहाड़ियों का क्षेत्र कहां हैं, कितना अहम?
गोलन की पहाड़ियां जिन्हें गोलन हाइट्स के नाम से भी जाना जाता है, 1800 वर्ग किलोमीटर इलाके में हैं। यह क्षेत्र कई दशकों से जंग का मैदान बना है। गोलन की पहाड़ियां सीरिया के दक्षिण-पश्चिम में स्थित हैं। इनकी सीरिया की राजधानी दमिश्क से दूरी करीब 60 किलोमीटर है, जो कि इसे सीरिया पर नियंत्रण के लिहाज से काफी अहम बनाती है।
गोलन की पहाड़ियों की दक्षिण सीमा में यारमूक नदी है, जबकि पश्चिम में गैलीली का समुद्र (तिबेरियास झील) है। गोलन पहाड़ियों का इलाका काफी उपजाऊ क्षेत्र मानना जाता है। यहां के जल संसाधन भी काफी अहमियत रखते हैं। इन्हीं के जरिए जॉर्डन नदी और हस्बानी नदी, जो कि लेबनान से गोलन की तरफ आती हैं और फिर यहां से आगे बढ़ती हैं, को पानी मिलता है।
गोलन की पहाड़ियां जिन्हें गोलन हाइट्स के नाम से भी जाना जाता है, 1800 वर्ग किलोमीटर इलाके में हैं। यह क्षेत्र कई दशकों से जंग का मैदान बना है। गोलन की पहाड़ियां सीरिया के दक्षिण-पश्चिम में स्थित हैं। इनकी सीरिया की राजधानी दमिश्क से दूरी करीब 60 किलोमीटर है, जो कि इसे सीरिया पर नियंत्रण के लिहाज से काफी अहम बनाती है।
गोलन की पहाड़ियों की दक्षिण सीमा में यारमूक नदी है, जबकि पश्चिम में गैलीली का समुद्र (तिबेरियास झील) है। गोलन पहाड़ियों का इलाका काफी उपजाऊ क्षेत्र मानना जाता है। यहां के जल संसाधन भी काफी अहमियत रखते हैं। इन्हीं के जरिए जॉर्डन नदी और हस्बानी नदी, जो कि लेबनान से गोलन की तरफ आती हैं और फिर यहां से आगे बढ़ती हैं, को पानी मिलता है।
गोलन पहाड़ियों पर किसका अधिकार, किसका कब्जा?
सयुंक्त राष्ट्र के मुताबिक, गोलन की पहाड़ियां सीरिया का हिस्सा हैं। हालांकि, 1967 में जब इस्राइल पर इस्लामिक देशों के संगठन ने हमला कर दिया था, तब इस्राइली सेना ने उन्हें हराते हुए उनके क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। सीरिया के गोलन पहाड़ियों के बड़े क्षेत्र पर भी इस्राइल ने कब्जा कर लिया था। मौजूदा समय में इस्राइल ने गोलन पहाड़ियों का 1200 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कब्जा रखा है। यानी कुल क्षेत्र का दो-तिहाई हिस्सा।
चौंकाने वाली बात यह है कि 1967 में कब्जे के ठीक बाद इस्राइल ने गोलन पहाड़ियों पर अपने नागरिकों को बसाना शुरू कर दिया था। इसके लिए इस्राइल ने बड़ी संख्या में आवासों का निर्माण भी किया था। सीरिया और इस्राइल में आगे संघर्ष को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने अपनी सेना को इस्राइली कब्जे वाले क्षेत्र और सीरिया के हिस्से वाले क्षेत्र में तैनात कर दिया था।
सीरिया में बशर अल-असद का शासन खत्म होने और विद्रोहियों का कब्जा होने के बाद इस्राइल ने उस क्षेत्र में भी बफर जोन को घेरना शुरू कर दिया, जहां संयुक्त राष्ट्र की सेना तैनात है।
सयुंक्त राष्ट्र के मुताबिक, गोलन की पहाड़ियां सीरिया का हिस्सा हैं। हालांकि, 1967 में जब इस्राइल पर इस्लामिक देशों के संगठन ने हमला कर दिया था, तब इस्राइली सेना ने उन्हें हराते हुए उनके क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था। सीरिया के गोलन पहाड़ियों के बड़े क्षेत्र पर भी इस्राइल ने कब्जा कर लिया था। मौजूदा समय में इस्राइल ने गोलन पहाड़ियों का 1200 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र कब्जा रखा है। यानी कुल क्षेत्र का दो-तिहाई हिस्सा।
चौंकाने वाली बात यह है कि 1967 में कब्जे के ठीक बाद इस्राइल ने गोलन पहाड़ियों पर अपने नागरिकों को बसाना शुरू कर दिया था। इसके लिए इस्राइल ने बड़ी संख्या में आवासों का निर्माण भी किया था। सीरिया और इस्राइल में आगे संघर्ष को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने अपनी सेना को इस्राइली कब्जे वाले क्षेत्र और सीरिया के हिस्से वाले क्षेत्र में तैनात कर दिया था।
सीरिया में बशर अल-असद का शासन खत्म होने और विद्रोहियों का कब्जा होने के बाद इस्राइल ने उस क्षेत्र में भी बफर जोन को घेरना शुरू कर दिया, जहां संयुक्त राष्ट्र की सेना तैनात है।
गोलन पहाड़ियों में बसी हैं इस्राइल की 30 कॉलोनियां
इस्राइल ने गोलन की पहाड़ियों में 30 से ज्यादा कॉलोनियां बसा ली हैं, जिनमें 25 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। इतना ही नहीं सीरिया पर विद्रोहियों के कब्जे के बाद से ही इस्राइल इस क्षेत्र में बसावट बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है। इसी रविवार को इस्राइल के कैबिनेट ने 1.1 करोड़ डॉलर के फंड पर मुहर लगाई है। इसके जरिए इस्राइल अवैध कॉलोनियों को बढ़ाने और ज्यादा नागरिकों को वहां ले जाने की योजना मुकम्मल करना चाहता है।
यहूदियों से पहले गोलन पहाड़ियो पर कौन रह रहा था?
सीरिया की गोलन पहाड़ियां ऐतिहासिक काल से द्रूज समुदाय के लोगों का क्षेत्र बना है। द्रूज एक जातीय धार्मिक समुदाय है, जो कि सीरिया, जॉर्डन और लेबनान में पाए जाते हैं। जब 1967 में इस्राइल ने गोलन की पहाड़ियों पर हमला बोला तब उसने द्रूज समुदाय के लोगों को यहां से बेदखल कर दिया। हालांकि, बड़ी संख्या में द्रूज समुदाय के लोग आज भी यहां रहते हैं और कई मौकों पर इस्राइल के लिए जानकारी देने वालों में अहम सूत्र साबित हुए हैं।
इस्राइल ने गोलन की पहाड़ियों में 30 से ज्यादा कॉलोनियां बसा ली हैं, जिनमें 25 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। इतना ही नहीं सीरिया पर विद्रोहियों के कब्जे के बाद से ही इस्राइल इस क्षेत्र में बसावट बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है। इसी रविवार को इस्राइल के कैबिनेट ने 1.1 करोड़ डॉलर के फंड पर मुहर लगाई है। इसके जरिए इस्राइल अवैध कॉलोनियों को बढ़ाने और ज्यादा नागरिकों को वहां ले जाने की योजना मुकम्मल करना चाहता है।
यहूदियों से पहले गोलन पहाड़ियो पर कौन रह रहा था?
सीरिया की गोलन पहाड़ियां ऐतिहासिक काल से द्रूज समुदाय के लोगों का क्षेत्र बना है। द्रूज एक जातीय धार्मिक समुदाय है, जो कि सीरिया, जॉर्डन और लेबनान में पाए जाते हैं। जब 1967 में इस्राइल ने गोलन की पहाड़ियों पर हमला बोला तब उसने द्रूज समुदाय के लोगों को यहां से बेदखल कर दिया। हालांकि, बड़ी संख्या में द्रूज समुदाय के लोग आज भी यहां रहते हैं और कई मौकों पर इस्राइल के लिए जानकारी देने वालों में अहम सूत्र साबित हुए हैं।
क्या सीरिया ने की है गोलन की पहाड़ियों को लेने की कोशिश?
1973 में सीरिया ने अक्तूबर युद्ध के दौरान गोलन पहाड़ियों को लेने की कोशिश की, हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो पाया। 1974 में इस विवाद में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) भी शामिल हो गया। यूएन ने युद्धबंदी लागू करने की शर्तों पर गोलन पहाड़ी के कब्जे वाले क्षेत्र और सीरिया के क्षेत्र के बीच में शांति सेना की तैनाती कर दी। इसी साल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने एक खास सुरक्षाबल यूएनडीओएफ को बफर जोन में सीजफायर लागू रखने के लिए तैनात कर दिया था। इस साल अप्रैल तक गोलन की पहाड़ियों में 1274 यूएन सैन्य कर्मी तैनात थे।
1973 में सीरिया ने अक्तूबर युद्ध के दौरान गोलन पहाड़ियों को लेने की कोशिश की, हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो पाया। 1974 में इस विवाद में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) भी शामिल हो गया। यूएन ने युद्धबंदी लागू करने की शर्तों पर गोलन पहाड़ी के कब्जे वाले क्षेत्र और सीरिया के क्षेत्र के बीच में शांति सेना की तैनाती कर दी। इसी साल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने एक खास सुरक्षाबल यूएनडीओएफ को बफर जोन में सीजफायर लागू रखने के लिए तैनात कर दिया था। इस साल अप्रैल तक गोलन की पहाड़ियों में 1274 यूएन सैन्य कर्मी तैनात थे।