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क्या डरा इस्राइल?: रिपोर्ट का दावा- ईरान कर सकता है अचानक हमला, युद्धविराम पर बातचीत के बीच खौफ में नेतन्याहू
Fri, 22 May 2026 10:30 AM IST
अमन तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 22 May 2026 10:30 AM IST
सार
इस्रायली मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की बातचीत विफल होने की स्थिति में ईरान अचानक मिसाइल व ड्रोन हमले कर सकता है।
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इस्राइल को ईरान के अचानक हमले का डर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस्रायल को अंदेशा है कि ईरान उस पर और खाड़ी देशों पर अचानक मिसाइल और ड्रोन से हमला कर सकता है। यह डर ऐसे समय में जताया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। 'जेरूसलम पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया अधिकारियों ने इस संभावित खतरे की जानकारी दी है।
इस खतरे को देखते हुए इस्रायल के रक्षा मंत्री इस्रायल काट्ज और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सुरक्षा हालात की समीक्षा की है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ईरान कूटनीतिक कोशिशों के पूरी तरह नाकाम होने से पहले ही हमला करने की कोशिश कर सकता है। अधिकारियों ने इस संभावित हमले की तुलना 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के शुरुआती चरणों से की है।
वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कुछ मतभेदों की खबरें भी आई हैं। इसके बावजूद, दोनों देशों की सेनाएं किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। इस्रायली वायुसेना और आईडीएफ (IDF) के अधिकारी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वे ईरान की संदिग्ध सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खुफिया जानकारी साझा कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल ईयाल जमीर लगातार अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि हमले की स्थिति में मिलकर जवाब दिया जा सके।
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पिछले एक महीने में अमेरिका से इस्रायल आने वाले सैन्य सामान की सप्लाई में काफी तेजी आई है। दोनों देशों ने मिलकर मिसाइलों को रोकने वाले सिस्टम, तकनीक और सॉफ्टवेयर को और भी बेहतर बनाया है। 'वल्ला' की एक रिपोर्ट के अनुसार, खतरों की पहचान करने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समीक्षा की गई है।
ये भी पढ़ें: चीन पर शिकंजा कसने की तैयारी: अमेरिका में नया बिल पेश, ड्रैगन के सैन्य नेटवर्क पर लगाना चाहता है प्रतिबंध
राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। ट्रंप ने साफ किया कि वे ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को अपने कब्जे में लेकर उसे नष्ट कर देंगे। माना जाता है कि ईरान के पास करीब 900 पाउंड अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम है, जो हथियार बनाने के लिए काफी है। इस्रायल शुरू से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है। इस्रायल का मानना है कि सांस्कृतिक और धार्मिक मतभेदों की वजह से ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसके अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है।
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इस खतरे को देखते हुए इस्रायल के रक्षा मंत्री इस्रायल काट्ज और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सुरक्षा हालात की समीक्षा की है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि ईरान कूटनीतिक कोशिशों के पूरी तरह नाकाम होने से पहले ही हमला करने की कोशिश कर सकता है। अधिकारियों ने इस संभावित हमले की तुलना 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के शुरुआती चरणों से की है।
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वहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कुछ मतभेदों की खबरें भी आई हैं। इसके बावजूद, दोनों देशों की सेनाएं किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। इस्रायली वायुसेना और आईडीएफ (IDF) के अधिकारी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वे ईरान की संदिग्ध सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खुफिया जानकारी साझा कर रहे हैं। लेफ्टिनेंट जनरल ईयाल जमीर लगातार अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि हमले की स्थिति में मिलकर जवाब दिया जा सके।
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पिछले एक महीने में अमेरिका से इस्रायल आने वाले सैन्य सामान की सप्लाई में काफी तेजी आई है। दोनों देशों ने मिलकर मिसाइलों को रोकने वाले सिस्टम, तकनीक और सॉफ्टवेयर को और भी बेहतर बनाया है। 'वल्ला' की एक रिपोर्ट के अनुसार, खतरों की पहचान करने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक व्यापक समीक्षा की गई है।
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राष्ट्रपति ट्रंप ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करने के अपने फैसले पर अड़े हुए हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे। ट्रंप ने साफ किया कि वे ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को अपने कब्जे में लेकर उसे नष्ट कर देंगे। माना जाता है कि ईरान के पास करीब 900 पाउंड अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम है, जो हथियार बनाने के लिए काफी है। इस्रायल शुरू से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विरोध करता रहा है। इस्रायल का मानना है कि सांस्कृतिक और धार्मिक मतभेदों की वजह से ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसके अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है।