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Hormuz Crisis: अमेरिकी प्रतिबंधों पर ईरान का पलटवार, बोला- होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण नहीं पा सकेगा US
Sat, 30 May 2026 07:06 AM IST
Pavan
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: Pavan
Updated Sat, 30 May 2026 07:06 AM IST
सार
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, नई ईरानी संस्था ने खुली चुनौती दी है। अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद ईरान की नई समुद्री संस्था PGSA ने कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अपना काम बिना रुकावट जारी रखेगी। अमेरिका ने संस्था पर जहाजों से अवैध शुल्क वसूलने का आरोप लगाया है, जबकि ईरान ने प्रतिबंधों को बेअसर बताते हुए अमेरिकी दबाव को खारिज किया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान की नई समुद्री प्रबंधन संस्था फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (पीजीएसए) ने उस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। संस्था ने कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रखेगी और गैर-शत्रुतापूर्ण जहाजों को आवाजाही की अनुमति देती रहेगी। पीजीएसए ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि अमेरिका युद्ध और कूटनीति के जरिए जिस तरह होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण हासिल करने में विफल रहा, उसी तरह वह प्रतिबंध लगाकर भी अपने मकसद में सफल नहीं होगा। संस्था ने अमेरिकी प्रतिबंधों को अनुचित बताते हुए कहा कि इससे उसके कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
दरअसल, अमेरिका ने हाल ही में पीजीएसए पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान इस संस्था का इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से कथित तौर पर अवैध शुल्क वसूलने और उससे मिलने वाली आय को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) तक पहुंचाने के लिए कर रहा है।
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, पीजीएसए को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था। अमेरिका का दावा है कि यह संस्था आईआरजीसी और उसकी नौसेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। इसी वजह से इसे अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की यह पहल दिखाती है कि अमेरिकी आर्थिक दबाव के कारण तेहरान को धन जुटाने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के तेल निर्यात और उसके वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बनाए रखेगा।
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वहीं, पीजीएसए ने स्पष्ट किया है कि वह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में जहाजों के आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए काम करती रहेगी। संस्था ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने निगरानी क्षेत्र की सीमाएं भी तय की हैं और कहा है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को उसके साथ समन्वय कर आवश्यक अनुमति लेनी होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच इस मुद्दे पर बढ़ता टकराव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार के लिए अहम माना जा रहा है।
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दरअसल, अमेरिका ने हाल ही में पीजीएसए पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि ईरान इस संस्था का इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों से कथित तौर पर अवैध शुल्क वसूलने और उससे मिलने वाली आय को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) तक पहुंचाने के लिए कर रहा है।
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अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, पीजीएसए को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था। अमेरिका का दावा है कि यह संस्था आईआरजीसी और उसकी नौसेना के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। इसी वजह से इसे अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की यह पहल दिखाती है कि अमेरिकी आर्थिक दबाव के कारण तेहरान को धन जुटाने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के तेल निर्यात और उसके वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बनाए रखेगा।
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वहीं, पीजीएसए ने स्पष्ट किया है कि वह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में जहाजों के आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए काम करती रहेगी। संस्था ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने निगरानी क्षेत्र की सीमाएं भी तय की हैं और कहा है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों को उसके साथ समन्वय कर आवश्यक अनुमति लेनी होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच इस मुद्दे पर बढ़ता टकराव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार के लिए अहम माना जा रहा है।