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India-Iran Ties: ईरानी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज पार कर रहे जहाज, भारत की समंदर वाली दोस्ती आई काम
Sat, 21 Mar 2026 04:36 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 21 Mar 2026 04:36 PM IST
सार
ईरान से भारत के लिए एक राहत की खबर आई है। अब ईरानी नौसेना खुद ही भारतीय जहाजों को रास्ता दिखा रही है। पिछले कुछ दिनों से देश में गैस को लेकर परेशानी बढ़ रही थी, लेकिन अब सबकुछ ठीक होने की उम्मीद है।
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होर्मुज के रास्ते गुजरात पहुंचा नंदा देवी
- फोटो : एएनआई वीडियो ग्रैब
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विस्तार
India-Iran Ties: ईरान-इस्राइल जंग के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से वैश्विक व्यापार के लिए सबसे सरल समुद्री रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य 'डेथ ट्रैप' बनता जा रहा है। हालांकि, अब भारतीय जहाजों को वहां एक 'खास सुरक्षा कवच' मिल रहा है। खबर है कि ईरानी नौसेना खुद रेडियो और तकनीकी गाइडेंस के जरिए भारतीय टैंकरों को इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाल रही है।
भारतीय जहाजों को मिल रहे विशेष निर्देश
जानकारी के मुताबिक, भारतीय क्रूड और गैस टैंकरों वाले जहाजों को ईरानी नौसेना की ओर से विशेष निर्देश मिल रहे हैं। समुद्री सीमाओं पर बढ़ते रडार इंटरफेरेंस और रास्ता भटकाने की तकनीक के बीच ईरानी नौसेना भारतीय क्रू को विशिष्ट रूट बता रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जहाजों को 'डिजिटल डार्कनेस' यानी अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम बंद करके ईरान के तटीय इलाकों के करीब से गुजरने की सलाह दी जा रही है। यह रास्ता लाारक और क़ेशम द्वीपों के बीच से होकर गुजरता है।
कूटनीति की बड़ी जीत
12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच हुई बातचीत के बाद से ही भारतीय जहाजों के लिए समुद्री रास्ता खुल गया था। अब ईरानी नौसेना खुद ही भारतीय जहाजों की मदद में जुट गई है।
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बता दें कि अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान का टकराव चरम पर है। इस बीच ईरान ने इस रास्ते को लगभग ब्लॉक कर दिया है, वहीं भारत के लिए रास्ता खुला रखना पीएम मोदी की 'बैलेंसिंग एक्ट' पॉलिसी की सफलता मानी जा रही है।
यह भी पढ़ें: PM Modi: नन्हे मेहमान के साथ 'प्रधानसेवक', सोशल मीडिया पर वायरल है बच्चे के साथ पीएम मोदी की यह तस्वीर
भारतीय नौसेना का सुरक्षा कवच
ईरानी जलसीमा से बाहर निकलते ही इन जहाजों की जिम्मेदारी भारतीय नौसेना का 'ऑपरेशन संकल्प' संभाल लेता है। 'शिवलिंग' और 'नंदा देवी' जैसे बड़े एलपीजी टैंकरों वाले जहाज को ईरानी नौसेना ने रेडियो गाइडेंस के जरिए उत्तर अरब सागर तक पहुंचाया। इसके बाद भारतीय नौसेना ने इन्हें गुजरात के बंदरगाह तक पहुंचाया था।
अभी बाकी हैं चुनौतियां
हालांकि, यह राहत अभी चुनिंदा जहाजों के लिए ही है। फिलहाल करीब 22 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी समुद्री ताकत का इस्तेमाल भारत के साथ सौदेबाजी के लिए भी कर सकता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में भारत के लिए अपने ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित घर लाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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भारतीय जहाजों को मिल रहे विशेष निर्देश
जानकारी के मुताबिक, भारतीय क्रूड और गैस टैंकरों वाले जहाजों को ईरानी नौसेना की ओर से विशेष निर्देश मिल रहे हैं। समुद्री सीमाओं पर बढ़ते रडार इंटरफेरेंस और रास्ता भटकाने की तकनीक के बीच ईरानी नौसेना भारतीय क्रू को विशिष्ट रूट बता रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जहाजों को 'डिजिटल डार्कनेस' यानी अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम बंद करके ईरान के तटीय इलाकों के करीब से गुजरने की सलाह दी जा रही है। यह रास्ता लाारक और क़ेशम द्वीपों के बीच से होकर गुजरता है।
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कूटनीति की बड़ी जीत
12 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच हुई बातचीत के बाद से ही भारतीय जहाजों के लिए समुद्री रास्ता खुल गया था। अब ईरानी नौसेना खुद ही भारतीय जहाजों की मदद में जुट गई है।
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बता दें कि अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान का टकराव चरम पर है। इस बीच ईरान ने इस रास्ते को लगभग ब्लॉक कर दिया है, वहीं भारत के लिए रास्ता खुला रखना पीएम मोदी की 'बैलेंसिंग एक्ट' पॉलिसी की सफलता मानी जा रही है।
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भारतीय नौसेना का सुरक्षा कवच
ईरानी जलसीमा से बाहर निकलते ही इन जहाजों की जिम्मेदारी भारतीय नौसेना का 'ऑपरेशन संकल्प' संभाल लेता है। 'शिवलिंग' और 'नंदा देवी' जैसे बड़े एलपीजी टैंकरों वाले जहाज को ईरानी नौसेना ने रेडियो गाइडेंस के जरिए उत्तर अरब सागर तक पहुंचाया। इसके बाद भारतीय नौसेना ने इन्हें गुजरात के बंदरगाह तक पहुंचाया था।
अभी बाकी हैं चुनौतियां
हालांकि, यह राहत अभी चुनिंदा जहाजों के लिए ही है। फिलहाल करीब 22 भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी समुद्री ताकत का इस्तेमाल भारत के साथ सौदेबाजी के लिए भी कर सकता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में भारत के लिए अपने ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित घर लाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।