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ईरान: आईआरजीसी ने पहली सैन्य उपग्रह 'नूर' को पृथ्वी की कक्षा में भेज कर दुनिया को चौंकाया
Tue, 28 Apr 2020 09:10 PM IST
श्रीधर मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Tue, 28 Apr 2020 09:10 PM IST
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IRGC
- फोटो : AP
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने पिछले हफ्ते अपनी पहली सैन्य उपग्रह नूर (लाइट) को पृथ्वी की कक्षा में भेज कर दुनिया को चौंका दिया।
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यह उपग्रह कासद या मैसेंजर नाम से पहले के एक अज्ञात प्रक्षेपण यान पर बोर्ड (सवार) था, और राजधानी तेहरान के पूर्व में सेमनान प्रांत में एक सैनिक अड्डे से तैनात किया गया था।
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यह लॉन्च, आईआरजीसी की स्थापना की 41वीं वर्षगांठ पर किया गया, जिसने ईरान के एयरोस्पेस कार्यक्रम को विकसित करने में पिछली विफलताओं के एक लंबे दौर को खत्म कर दिया। हालांकि, तेहरान ने अभी अपनी इस पहल के बारे में कोई भी अधिक जानकारी नहीं दी है, लेकिन आईआरजीसी के प्रमुख मेजर-जनरल होसैन सलामी ने इसे एक बहुउद्देश्यीय (मल्टी-परपज) उपग्रह के रूप में वर्णित किया, जो रिवोल्यूशनरी गार्ड की रणनीतिक खुफिया का विस्तार करता है।
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ईरान की तरफ से उपग्रह प्रक्षेपण के बाद तुरंत प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 का हवाला देते हुए कहा कि तेहरान को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
इस लॉन्च ने तेल अवीव में भी अलार्म बजा दिया है। विदेश मंत्रालय ने तेहरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों की मांग करते हुए एक बयान में कहा, "इजरायल ने संयुक्त राज्य अमेरिका की तरफ से मान्यता प्राप्त एक आतंकवादी संगठन, रिवोल्यूशनरी गार्ड की तरफ से एक सैन्य उपग्रह के प्रक्षेपण की कड़ी निंदा की है।"
वहीं, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी इस लॉन्च पर अपनी चिंता व्यक्त की। हालांकि, रूस ने यह घोषणा की है कि इस तैनाती से संयुक्त राष्ट्र के किसी भी प्रस्ताव का उल्लंघन नहीं होगा।