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'दोनों को पहचान लीजिए': ईरान ने स्कूल पर हमले के लिए US के अधिकारियों को ठहराया जिम्मेदार, जारी की तस्वीरें
Sun, 29 Mar 2026 02:50 PM IST
राकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 29 Mar 2026 02:50 PM IST
सार
मिनाब स्कूल हमले के लिए ईरान ने अमेरिकी नौसेना के दो अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। ईरान ने इन अधिकारियों की तस्वीर जारी करते हुए कहा कि इन दोनों अपराधियों को पहचान लीजिए, इनके आदेश पर ही 168 बेकसूर बच्चों की जान गई थी। ईरान ने इसके लिए सीधे-सीधे अमेरिकी नौसेना के अधिकारियों पर निशाना साधा है।
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कमांडर ली आर टेट और कार्यकारी अधिकारी जेफरी ई यॉर्क
- फोटो : @Iran_in_India
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विस्तार
मिनाब के 'शजरे तैयबा' गर्ल्स स्कूल पर हमले के लिए ईरान ने दो अमेरिकी अधिकारियों को आतंकी घोषित किया है। भारत में ईरानी दूतावास ने एक्स पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना के दो अधिकारी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "इन दो अपराधियों को याद रखें। कमांडर ली आर टेट और कार्यकारी अधिकारी जेफरी ई यॉर्क। इन्होंने तीन बार टोमाहॉक मिसाइलें दागने का आदेश दिया था, जिससे मिनाब के एक स्कूल में 168 बेकसूर बच्चों की जान चली गई थी।
वैसे तो इतिहास की किताबों में विवादों के न जाने कितने काले पन्ने दर्ज हैं, लेकिन पिछले दिनों ईरान के मीनाब शहर ने जो मंजर देखा, उसने इंसानियत को हमेशा-हमेशा के लिए शर्मसार कर दिया है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरानी शहर मीनाब के 'शजरे तैयबा' गर्ल्स स्कूल पर एक नहीं, दो नहीं, बल्कि लगातार तीन टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं। इस भीषण हमले में 168 मासूम स्कूली बच्चियों के चीथड़े उड़ गए। पूरा स्कूल परिसर देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गया।
क्या होता है 'ट्रिपल टैप' स्ट्राइक?
इस हमले की सबसे भयावह बात यह है कि इसमें 'ट्रिपल टैप' का इस्तेमाल किया गया। आंकड़ों से साफ हुआ है कि पहली मिसाइल गिरने के बाद जब चीख-पुकार मची और स्थानीय लोग व बचाव दल मलबे से बच्चों को निकालने के लिए दौड़े, ठीक उसी वक्त दूसरी और फिर तीसरी मिसाइल दागी गई। इस रणनीति का मकसद केवल तबाही मचाना नहीं, बल्कि मदद के लिए पहुंचने वाले लोगों को भी खत्म करना होता है।
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यह भी पढ़ें: Kerala Elections: थरूर ने भाजपा पर साधा निशाना, कहा- शून्य सीट वाली पार्टी को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं
USS Spruance के कमांडरों पर कसता शिकंजा
ईरान ने इस घटना के बाद सीधे तौर पर अमेरिकी नौसेना के दो अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि बतौर कमांडिंग ऑफिसर लेह आर टेट ने टॉमहॉक मिसाइलों को लॉन्च करने का आदेश दिया था। वहीं, कार्यकारी अधिकारी जेफरी ई यॉर्क ने इस पूरे घातक ऑपरेशन की योजना बनाई थी। ईरान ने अब दोनों अधिकारियों की तस्वीर साझा करते हुए इन्हें 'युद्ध अपराधी' करार दिया है।
अमेरिका की सफाई
हमले के बाद अमेरिकी सेना ने कहा कि लक्ष्य निर्धारण में चूक हुई है। दलील दी गई कि पुरानी खुफिया जानकारी के आधार पर सेना को लगा कि यह स्कूल परिसर दरअसल ईरान की सेना का बेस है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले को सिरे से खारिज कर दिया।
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वैसे तो इतिहास की किताबों में विवादों के न जाने कितने काले पन्ने दर्ज हैं, लेकिन पिछले दिनों ईरान के मीनाब शहर ने जो मंजर देखा, उसने इंसानियत को हमेशा-हमेशा के लिए शर्मसार कर दिया है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरानी शहर मीनाब के 'शजरे तैयबा' गर्ल्स स्कूल पर एक नहीं, दो नहीं, बल्कि लगातार तीन टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं। इस भीषण हमले में 168 मासूम स्कूली बच्चियों के चीथड़े उड़ गए। पूरा स्कूल परिसर देखते ही देखते मलबे में तब्दील हो गया।
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क्या होता है 'ट्रिपल टैप' स्ट्राइक?
इस हमले की सबसे भयावह बात यह है कि इसमें 'ट्रिपल टैप' का इस्तेमाल किया गया। आंकड़ों से साफ हुआ है कि पहली मिसाइल गिरने के बाद जब चीख-पुकार मची और स्थानीय लोग व बचाव दल मलबे से बच्चों को निकालने के लिए दौड़े, ठीक उसी वक्त दूसरी और फिर तीसरी मिसाइल दागी गई। इस रणनीति का मकसद केवल तबाही मचाना नहीं, बल्कि मदद के लिए पहुंचने वाले लोगों को भी खत्म करना होता है।
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USS Spruance के कमांडरों पर कसता शिकंजा
ईरान ने इस घटना के बाद सीधे तौर पर अमेरिकी नौसेना के दो अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि बतौर कमांडिंग ऑफिसर लेह आर टेट ने टॉमहॉक मिसाइलों को लॉन्च करने का आदेश दिया था। वहीं, कार्यकारी अधिकारी जेफरी ई यॉर्क ने इस पूरे घातक ऑपरेशन की योजना बनाई थी। ईरान ने अब दोनों अधिकारियों की तस्वीर साझा करते हुए इन्हें 'युद्ध अपराधी' करार दिया है।
अमेरिका की सफाई
हमले के बाद अमेरिकी सेना ने कहा कि लक्ष्य निर्धारण में चूक हुई है। दलील दी गई कि पुरानी खुफिया जानकारी के आधार पर सेना को लगा कि यह स्कूल परिसर दरअसल ईरान की सेना का बेस है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले को सिरे से खारिज कर दिया।
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