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Hindi News ›   World ›   Iran 4000 km missile range Khorramshahr 4 power Europe under threat Diego Garcia military base importance

एक वार ने कैसे बदला युद्ध का गणित?: यूरोप भी बन सकता है निशाना, जानें ईरान की खोर्रमशहर-4 मिसाइल कितनी ताकतवर

Sat, 21 Mar 2026 11:52 AM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sat, 21 Mar 2026 11:52 AM IST
सार

Khorramshahr-4 Missile Power: ईरान की 4000 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता ने वैश्विक सुरक्षा को नई चुनौती दी है। ऐसे में इससे यूरोप तक खतरा बढ़ गया है। नाटो देशों की रणनीति भी बदल रही है। डिएगो गार्सिया जैसे दूरस्थ सैन्य ठिकाने भी अब सुरक्षित नहीं रहे। आइए जानते ये मिसाइल कितनी ताकतवर है। कैसे इसने युद्ध की रणनीति बदल दी। आखिर क्यों अब ट्रंप युद्ध को खत्म करने की बात करने लगे हैं। आइए, विस्तार से समझते हैं।

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Iran 4000 km missile range Khorramshahr 4 power Europe under threat Diego Garcia military base importance
कितनी ताकतवर मिसाइल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर सामने आई नई जानकारी ने वैश्विक सुरक्षा समीकरण को हिला दिया है। 4000 किलोमीटर तक मार करने वाली क्षमता ने यह साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा। इस एक घटनाक्रम ने दुनिया के बड़े हिस्से, खासकर यूरोप को भी संभावित खतरे के दायरे में ला दिया है।

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इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान की मिसाइलें वास्तव में 4000 किलोमीटर तक पहुंच सकती हैं, तो पेरिस और लंदन जैसे बड़े यूरोपीय शहर भी इसकी जद में आ सकते हैं। इससे नाटो देशों की सोच बदल रही है, क्योंकि अब तक इस संघर्ष को क्षेत्रीय माना जा रहा था, लेकिन अब यह वैश्विक सुरक्षा का मुद्दा बनता दिख रहा है।
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कैसे बदला युद्ध का गणित? आसान भाषा में समझें

  • संघर्ष अब सीमित नहीं रहा... पहले यह टकराव सिर्फ पश्चिम एशिया तक माना जा रहा था, लेकिन 4000 KM की रेंज ने इसे वैश्विक बना दिया।
  • यूरोप भी दायरे में आया... इतनी दूरी तक मार करने की क्षमता का मतलब है कि पेरिस और लंदन जैसे शहर भी संभावित निशाने में आ सकते हैं।
  • दूर के बेस भी सुरक्षित नहीं... डिएगो गार्सिया जैसे दूरस्थ और सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य ठिकाने भी अब खतरे में हैं।
  • डिफेंस सिस्टम पर दबाव... उन्नत मिसाइलों को रोकना मुश्किल हो रहा है, जिससे अमेरिका और नाटो के मिसाइल डिफेंस सिस्टम की परीक्षा हो रही है।
  • रणनीति बदलने को मजबूर देश... नाटो और पश्चिमी देशों को अब अपनी सुरक्षा और सैन्य रणनीति फिर से तय करनी पड़ रही है।
  • युद्ध का दायरा बढ़ा... अब सिर्फ जमीन या सीमित इलाकों तक लड़ाई नहीं, बल्कि लंबी दूरी से हमले का दौर शुरू हो गया है।
  • ऊर्जा और अर्थव्यवस्था पर असर... ऐसे हमलों से तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
  • मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ा... दुश्मन की इतनी लंबी पहुंच से देशों में डर और अनिश्चितता बढ़ती है, जो खुद एक बड़ी रणनीतिक ताकत होती है।

ये भी पढ़ें- क्या ईरान के हमले से टूट गई कतर की कमर?: देश का 17 प्रतिशत LNG उत्पादन ठप, मरम्मत में लगेंगे तीन से पांच साल
 

खोर्रमशहर-4 कितनी खतरनाक?

  • यह ईरान की बेहद शक्तिशाली बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है।
  • लिक्विड फ्यूल (तरल ईंधन) से संचालित होती है।
  • एक टन से ज्यादा वजन का वारहेड ले जाने में सक्षम है।
  • क्लस्टर म्यूनिशन (एक साथ कई विस्फोट) का विकल्प मौजूद है।
  • लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता रखती है।
  • हवा में दिशा बदलने (मैन्युवरेबल) की तकनीक से लैस मानी जाती है।
  • इसी वजह से इसे इंटरसेप्ट करना और रोकना काफी मुश्किल हो जाता है।


क्यों अहम है डिएगो गार्सिया बेस?
डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का एक अहम सैन्य ठिकाना है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यह बेस लंबे समय से अफगानिस्तान, इराक और पश्चिम एशिया में सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल होता रहा है। यहां से भारी बमवर्षक विमान और सैन्य उपकरण तेजी से तैनात किए जा सकते हैं।



दूर होते हुए भी कैसे बना निशाना?
इस बेस की सबसे बड़ी ताकत इसकी दूरी थी, क्योंकि यह सामान्य युद्ध क्षेत्रों से काफी दूर है। लेकिन ईरान द्वारा इसे निशाना बनाने की कोशिश ने यह साबित कर दिया कि अब कोई भी ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इससे साफ संकेत मिला है कि ईरान दूर-दराज के रणनीतिक ठिकानों को भी निशाना बना सकता है।

मिसाइल डिफेंस सिस्टम की परीक्षा
इस हमले के दौरान अमेरिकी नौसेना ने एसएम-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्शन की कोशिश की। यह सिस्टम सीधे टकराकर मिसाइल को नष्ट करता है। हालांकि इस घटना ने दिखाया कि आधुनिक और उन्नत मिसाइलों को रोकना अभी भी आसान नहीं है और सुरक्षा तंत्र के सामने बड़ी चुनौती है।

ईरान की बढ़ती आक्रामक रणनीति
ईरान ने हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कुवैत के मीना अल-अहमदी रिफाइनरी पर ड्रोन हमले की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही ईरान ने उन देशों को चेतावनी दी है जो अमेरिका को समर्थन दे रहे हैं। इसके साथ ही कतर के गैस प्लांट पर हुए हमले के बाद से भी कहीं न कहीं अमेरिका बैकफुट पर आया है।

अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैयारी
अमेरिका ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अतिरिक्त युद्धपोत और हजारों मरीन तैनात किए गए हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य अभियान कम करने की बात कही है, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियां लंबे टकराव की ओर इशारा कर रही हैं। हालांकि, ट्रंप ने युद्ध को थामने की भी बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि हमारा लक्ष्य पूरा हो चुका है। अब ह युद्ध रोकने पर विचार कर सकते हैं।

वैश्विक खतरे में बदलता संघर्ष
यह घटनाक्रम दिखाता है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय नहीं रहा। मिसाइल क्षमता, ऊर्जा संकट और सैन्य टकराव ने इसे वैश्विक खतरे में बदल दिया है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि दुनिया कूटनीति की ओर बढ़ेगी या बड़े युद्ध की तरफ।

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