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क्या ईरान के हमले से टूट गई कतर की कमर?: देश का 17 प्रतिशत LNG उत्पादन ठप, मरम्मत में लगेंगे तीन से पांच साल
Thu, 19 Mar 2026 09:16 PM IST
Himanshu Singh Chandel
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दोहा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दोहा
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Thu, 19 Mar 2026 09:16 PM IST
सार
कतर के एलएनजी प्लांट पर हमले से 17 प्रतिशत उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है, जिसे ठीक होने में तीन से पांच साल लग सकते हैं। इससे वैश्विक गैस आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका है। कतर को कई देशों के साथ गैस सप्लाई समझौतों में बदलाव करना पड़ सकता है।
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सांकेतिक
- फोटो : X @IAFsite
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब वैश्विक ऊर्जा संकट की शक्ल लेता जा रहा है। कतर के जिस गैस प्लांट पर हमला हुआ है, वह देश के कुल एलएनजी उत्पादन का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा तैयार करता था। इस हमले से भारी नुकसान हुआ है और इसे पूरी तरह ठीक करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं। इससे पूरी दुनिया में गैस आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे में ये कतर के लिए काफी बड़ा नुकसान है। इतना ही नहीं, इस हमले से उन देशों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं, जो कतर से ये गैस ले रहे थे।
कतरएनर्जी के प्रमुख साद अल-काबी ने बताया कि हमले में एलएनजी उत्पादन से जुड़ा बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हुआ है। यह प्लांट बनाने में करीब 26 अरब डॉलर की लागत आई थी। उन्होंने कहा कि इस नुकसान के कारण कतर को अपने कई दीर्घकालिक गैस आपूर्ति समझौतों में फोर्स मेज्योर लागू करना पड़ सकता है। इसका असर इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा, जो कतर से गैस लेते हैं। यही बड़ा कारण है कि इस हमले के बाद से कई देशों ने युद्ध रोकने की अपील की। इस हमले के बाद कहीं न कहीं अमेरिका भी थोड़ा बैकफुट पर गया है। क्योंकि इस हमले को उसने इस्राइल का हमला बताया और कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं थी।
क्या है हमले का बड़ा असर?
इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है। एलएनजी सप्लाई में कमी आने से कई देशों में गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक उत्पादन प्रभावित रहने से ऊर्जा संकट गहरा सकता है और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज होगी। वहीं, कई देशो में महंगाई बढ़ने के भी आसार हैं।
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ये भी पढ़ें- होर्मुज में अमेरिकी कार्रवाई: ईरानी नौसैनिक ठिकानों को बनाया निशाना, यूएस का दावा- जहाजों के लिए थे बड़ा खतरा
कतर ने क्या कहा?
कतर के प्रधानमंत्री ने इस हमले को बड़ा झटका बताया है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रीय रिश्तों पर सवाल खड़े हो गए हैं और भरोसा टूट गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कतर शांति चाहता है और ईरान के लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है।
क्या खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा?
विश्व व्यापार संगठन ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध से वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में खाद और ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। अगर यह बाधित होती है तो खेती की लागत बढ़ेगी और खाद्य उत्पादन पर असर पड़ेगा।
क्या बढ़ेगा वैश्विक संकट?
ऊर्जा और खाद्य दोनों क्षेत्रों पर दबाव बढ़ने से दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो महंगाई बढ़ेगी और सप्लाई चेन पर दबाव और गहरा होगा। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह संकट कब और कैसे खत्म होगा।
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कतरएनर्जी के प्रमुख साद अल-काबी ने बताया कि हमले में एलएनजी उत्पादन से जुड़ा बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हुआ है। यह प्लांट बनाने में करीब 26 अरब डॉलर की लागत आई थी। उन्होंने कहा कि इस नुकसान के कारण कतर को अपने कई दीर्घकालिक गैस आपूर्ति समझौतों में फोर्स मेज्योर लागू करना पड़ सकता है। इसका असर इटली, बेल्जियम, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा, जो कतर से गैस लेते हैं। यही बड़ा कारण है कि इस हमले के बाद से कई देशों ने युद्ध रोकने की अपील की। इस हमले के बाद कहीं न कहीं अमेरिका भी थोड़ा बैकफुट पर गया है। क्योंकि इस हमले को उसने इस्राइल का हमला बताया और कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं थी।
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क्या है हमले का बड़ा असर?
इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है। एलएनजी सप्लाई में कमी आने से कई देशों में गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक उत्पादन प्रभावित रहने से ऊर्जा संकट गहरा सकता है और वैकल्पिक स्रोतों की तलाश तेज होगी। वहीं, कई देशो में महंगाई बढ़ने के भी आसार हैं।
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कतर ने क्या कहा?
कतर के प्रधानमंत्री ने इस हमले को बड़ा झटका बताया है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रीय रिश्तों पर सवाल खड़े हो गए हैं और भरोसा टूट गया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कतर शांति चाहता है और ईरान के लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है।
क्या खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा?
विश्व व्यापार संगठन ने चेतावनी दी है कि इस युद्ध से वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में खाद और ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। अगर यह बाधित होती है तो खेती की लागत बढ़ेगी और खाद्य उत्पादन पर असर पड़ेगा।
क्या बढ़ेगा वैश्विक संकट?
ऊर्जा और खाद्य दोनों क्षेत्रों पर दबाव बढ़ने से दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो महंगाई बढ़ेगी और सप्लाई चेन पर दबाव और गहरा होगा। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह संकट कब और कैसे खत्म होगा।
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