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Vanita Gupta: भारतीय मूल की वनिता गुप्ता ने दिया एसोसिएट अटॉर्नी जनरल पद से इस्तीफा, जानें इनके बारे में

Fri, 15 Dec 2023 12:02 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 15 Dec 2023 12:02 PM IST
सार

गारलैंड ने कहा कि गुप्ता ने हिंसक अपराध और बंदूक हिंसा से निपटने और अपराध के पीड़ितों का समर्थन करने के लिए विभाग के प्रयासों में एक अभिन्न भूमिका निभाई। इसके अलावा भी उन्होंने कई अहम फैसले लिए।

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Indian-American Vanita Gupta To Step Down As US Associate Attorney General
वनिता गुप्ता - फोटो : twitter.com/vanitaguptaCR

विस्तार

अमेरिका की एसोसिएट अटॉर्नी जनरल भारतीय-अमेरिकी वनिता गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अगले साल वह फरवरी में पद से हट जाएंगी। वह  न्याय मंत्रालय में तीसरी रैंकिंग का सर्वोच्च पद पाने वाली पहली अश्वेत महिला हैं। साल 2021 में उन्होंने ये इतिहास रचा था।

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कई अहम फैसले लिए
न्याय विभाग (डीओजे) के अनुसार, साल 2021 में वनिता को एसोसिएट अटॉर्नी जनरल चुना गया था। अब अगले साल वह पद से हट जाएंगी। गारलैंड ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि गुप्ता ने हिंसक अपराध और बंदूक हिंसा से निपटने और अपराध के पीड़ितों का समर्थन करने के लिए विभाग के प्रयासों में एक अभिन्न भूमिका निभाई। इसके अलावा भी उन्होंने कई अहम फैसले लिए। 
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अटॉर्नी जनरल मेरिक बी. गारलैंड ने कहा कि वनिता गुप्ता ने संघीय कानून द्वारा संरक्षित प्रजनन स्वतंत्रता की रक्षा के लिए प्रजनन अधिकार कार्यबल का नेतृत्व किया।
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इनमें भी दे चुकी हैं सेवा
अगर गुप्ता की सेवा पर ध्यान दें तो वो कई विभागों में काम कर चुकी हैं। उन्होंने विभाग के सिविल लिटिगेटिंग डिवीजनों, अनुदान देने वाले घटकों, न्याय तक पहुंच के लिए कार्यालय, सूचना नीति कार्यालय, सामुदायिक संबंध सेवा, संयुक्त राज्य अमेरिका ट्रस्टी कार्यक्रम और विदेशी दावा निपटान आयोग में भी अपने सेवा दी है। 

यहां से की पढ़ाई
वनिता गुप्ता ने येल विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। उसके बाद न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ से कानून की डिग्री प्राप्त की, जहां उन्होंने बाद में कई वर्षों तक एक नागरिक अधिकार मुकदमा क्लिनिक पढ़ाया। 49 साल की गुप्ता ने शादी नहीं की है। 

शुल्क प्रथाओं के खिलाफ लड़ाई...
अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध और सबसे सम्मानित नागरिक अधिकार वकीलों में से एक गुप्ता विभाग के प्रजनन अधिकार और ओपियोइड महामारी सिविल लिटिगेशन टास्क फोर्स की अध्यक्षता कर रही हैं। साथ ही वह गैरकानूनी जुर्माना और शुल्क प्रथाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं। 

इन विभागों में दी सेवा
वनिता गुप्ता नागरिक और मानवाधिकारों पर नेतृत्व सम्मेलन के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम कर चुकी हैं। यह अमेरिका में गैर-पक्षपातपूर्ण नागरिक अधिकार संगठनों का सबसे पुराना और सबसे बड़ा गठबंधन है। इसके अलावा, वह अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) में उप कानूनी निदेशक और सेंटर फॉर जस्टिस के निदेशक के रूप में भी अपनी सेवा दे चुकी हैं। 

अलीगढ़ से नाता
अपने तालों और तालीम के लिए दुनियाभर में मशहूर उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ शहर अब वनीता गुप्ता से जुड़े होने की वजह से एक बार फिर सुर्खियों में है। वनीता के पिता राजीव लोचन तकरीबन चार दशक पहले अलीगढ़ से अमेरिका चले गए थे। वनीता का जन्म 15 नवंबर 1974 को फिलाडेल्फिया, पेंसिलवेनिया में हुआ और वहीं उनकी परवरिश भी हुई। उन्होंने येल विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री ली और न्यूयार्क विश्वविद्यालय से ज्यूरिस डॉक्टर के तौर पर पढ़ाई की।

28 साल की उम्र में की थी करियर की शुरुआत
वनीता ने 28 साल की उम्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यूयार्क स्थित एक नागरिक अधिकार संगठन और लॉ फर्म एलडीएफ के साथ वकालत के अपने करियर की शुरुआत की और टेक्सास में अश्वेत अमेरिकी नागरिकों से जुड़े नशीली दवाओं के एक मामले की पैरवी करते हुए अपने मुवक्किलों को दोषमुक्त करवाने में कामयाब रहीं। उन्होंने 2007 में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन का स्टाफ अटार्नी बनने के बाद शरण मांगने वालों को हिरासत में रखे जाने को लेकर देश के आप्रवासन और सीमा शुल्क प्रवर्तन के खिलाफ एक मामला दर्ज किया और इसमें जीत हासिल कर नागरिक अधिकारों के एक मुखर समर्थक के रूप में अपना कद ऊंचा कर लिया।

ओबामा ने जताया था भरोसा
इसी का नतीजा था कि 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वनीता को मानव अधिकार के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की जिम्मेदारी दी और उन्हें न्याय विभाग में मानव अधिकार खंड का प्रमुख बनाया। वह 2017 तक इस पद पर रहीं। नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में अमेरिका में बेहतर माहौल की हिमायत करने वाली वनीता की रहनुमाई में कई शहरों की पुलिस के कामकाज की समीक्षा और सुधारों का दौर शुरू हुआ। इस दौरान उन्होंने घृणा अपराधों और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में सजा, विकलांगों को बेहतर अधिकार दिलाने देने के साथ ही शिक्षा, रोजगार, आवास और मतदान में भेदभाव समाप्त करवाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया।

पार्टी लाइन से ऊपर उठ की गई वनीता के लिए वोटिंग
अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद जो बाइडन ने जनवरी 2021 में वनीता को देश का सहायक अटार्नी जनरल नियुक्त किया। हालांकि, उनकी नियुक्ति को सीनेट की मंजूरी मिलनी बाकी थी। पिछले दिनों सीनेट ने उनकी नियुक्ति पर अपनी मुहर लगा दी। यहां यह जान लेना दिलचस्प होगा कि सीनेट में डेमोक्रेट व रिपब्लिकन सदस्यों की संख्या 50-50 होने के बावजूद उन्हें 51 वोट मिले क्योंकि एक महिला रिपब्लकन सीनेटर ने पार्टी लाइन से हटकर वनीता को वोट दिया। हालांकि, बराबर मत पड़ने की सूरत में उपराष्ट्रपति कमला हैरिस अपना वोट डालने के लिए सीनेट में मौजूद थीं, लेकिन उसकी नौबत ही नहीं आई। वनीता पहली नागरिक अधिकार वकील हैं और पहली अश्वेत हैं, जो न्याय मंत्रालय के शीर्ष तीन पदों में से एक पर काबिज हुई।
 

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