India Russia Ties: 'भारत रूस के शीर्ष विदेशी व्यापार भागीदारों में एक', रूसी PM मिशुस्तीन का रिश्तों पर जोर
India Russia Ties: रूस के प्रधानमंत्री मिशुस्टिन ने बताया कि है कि भारत रूस के शीर्ष विदेशी व्यापारिक साझेदारों में से एक है। उन्होंने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि 2024-25 में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर करीब 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
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यूक्रेन से चल रही जंग के बीच रूस ने भारत के साथ अपने रिश्तों पर जोर दिया है। रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने मंगलवार को कहा कि भारत रूस के शीर्ष विदेशी व्यापार भागीदारों में से एक है। प्रधानमंत्री मिशुस्तिन ने अपने बयान में कहा कि भारत रूस के शीर्ष विदेशी व्यापार साझेदारों में शामिल है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक रुख को मित्र देशों की ओर मोड़ा है, जिसमें भारत की भूमिका तेजी से मजबूत हुई है।
चार वर्षों में पांच से छह गुना बढ़ा व्यापार
रूसी पीएम मिशुस्टिन ने बताया कि रूस के व्यापारिक कारोबार में मित्र देशों की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से 86 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिसमें चीन, बेलारूस, भारत और कजाकिस्तान के साथ व्यापार में खासतौर पर इजाफा हुआ है। उनके मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर करीब 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वर्ष 2021 में लगभग 13 अरब डॉलर था। यानी चार वर्षों में यह व्यापार लगभग पांच से छह गुना बढ़ा है।
द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का टारगेट
बता दें कि हाल ही में रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत दौरे पर आए। जहां दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया। ऊर्जा के साथ फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। इस बीच विदेशी आर्थिक गतिविधियों के विकास पर आयोजित एक रणनीतिक सत्र में टेलीविजन संबोधन के दौरान मिशुस्तिन ने कहा, '2025 तक मित्र देशों को आपूर्ति का लक्ष्य पहले ही पार कर लिया गया है। 86 प्रतिशत का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड संभव हुआ है। चीन, बेलारूस, भारत और कजाखस्तान ने उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है।'
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विश्व अर्थव्यवस्था में जी-7 देशों की हिस्सेदारी घट रही
उन्होंने इस बात को दोहराया कि रूस ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा मित्र देशों की ओर मोड़ा है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में लचीलापन कम है और आपूर्ति मार्गों को बदलने में समय और लागत दोनों लगते हैं। इसके बावजूद पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस ने खुद को तेजी से ढालने की क्षमता दिखाई है। पीएम मिशुस्तिन ने वैश्विक आर्थिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। रूसिया-24 चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ और ईस्ट, खासकर ब्रिक्स देशों का योगदान बढ़ रहा है, जबकि जी-7 देशों की हिस्सेदारी घट रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि रूस द्विपक्षीय व्यापार में रूबल और साझेदार देशों की राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रहा है। जनवरी से अक्तूबर के बीच सभी देशों के साथ व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पहले तय 70 प्रतिशत के लक्ष्य से कहीं अधिक है। कुल लेनदेन में आधे से ज्यादा हिस्सेदारी रूबल की रही है।
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