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US: 'यूक्रेन युद्ध के लिए भारत नहीं, अमेरिकी अधिकारी जिम्मेदार', यहूदी संगठन ने की ट्रंप प्रशासन की आलोचना
Sat, 30 Aug 2025 11:42 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 30 Aug 2025 11:42 AM IST
सार
US: अमेरिकी यहूदी समिति ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत के खिलाफ बयानों को लेकर अमेरिकी अधिकारियों की आलोचना की है। संगठन ने कहा कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध का जिम्मेदार नहीं है और वह अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
अमेरिका के एक यहूदी संगठन ने उन अधिकारियों की आलोचना की है, जिन्होंने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की निंदा की है। संगठन ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है और अमेरिका-भारत संबंधों को फिर से सुधारने की जरूरत है। ट्रंप प्रशासन के कुछ सदस्यों ने हाल ही में भारत आरोप लगाया है कि रूस से उर्जा खरीदकर भारत राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध मशीन को फंडिंग कर रहा है।
अमेरिकी यहूदी समिति ने शुक्रवार को कहा कि व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की ओर से भारत पर लगाए गए आरोप 'गलत और अपमानजनक' हैं। नवारो ने इसे 'मोदी का युद्ध' कहा और यह भी कहा कि शांति की राह 'नई दिल्ली से होकर' गुजरती है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका की संसदीय समिति का चीन पर सख्त रुख, AI चिप निर्यात पर नई रणनीति लागू करने की सिफारिश की
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यहूदी संगठन ने कहा, हम समझते हैं कि भारत उर्जा जरूरतों के कारण रूस से तेल खरीदता है, लेकिन भारत पुतिन के युद्ध अपराधों का दोषी नहीं है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी है। संगठन ने कहा, अब इन अहम संबंधों को फिर से मजबूत करने का समय है।
नवारो ने पिछले कुछ दिनों में भारत को निशाना बनाया है। उनकी ओर से ये बयान तब सामने आए, जब वॉशिंगटन और दिल्ली के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा। ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया है। साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया है। भारत ने इन टैरिफ को अनुचित और गैर-जरूरी बताया है और कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
इसी बीच, अमेरिका की एक अदालत ने ट्रंप के अधिकांश वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया है। इसके बाद, अमेरिकी प्रतिनिधि की विदेश मामलों की समिति ने कहा कि ट्रंप के 'राष्ट्रीय आपातकाल' के तहत लगाए गए टैरिफ को समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें: 'मैंने बहुत लोगों का मुंह तोड़ा', पत्रकार पर भड़के ऑस्ट्रेलियाई राजनेता ने दी धमकी, खड़ा हुआ विवाद
समिति ने कहा कि ट्रंप ने भारत को निशाना बनाया है जबकि चीन जैसे बड़े खरीदारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। सप्ताह की शुरुआत में इस समिति ने ट्रंप की उस नीति की आलोचना की थी, जो भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर है और कहा था कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंच रहा है।
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अमेरिकी यहूदी समिति ने शुक्रवार को कहा कि व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो की ओर से भारत पर लगाए गए आरोप 'गलत और अपमानजनक' हैं। नवारो ने इसे 'मोदी का युद्ध' कहा और यह भी कहा कि शांति की राह 'नई दिल्ली से होकर' गुजरती है।
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यहूदी संगठन ने कहा, हम समझते हैं कि भारत उर्जा जरूरतों के कारण रूस से तेल खरीदता है, लेकिन भारत पुतिन के युद्ध अपराधों का दोषी नहीं है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और अमेरिका का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी है। संगठन ने कहा, अब इन अहम संबंधों को फिर से मजबूत करने का समय है।
नवारो ने पिछले कुछ दिनों में भारत को निशाना बनाया है। उनकी ओर से ये बयान तब सामने आए, जब वॉशिंगटन और दिल्ली के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ा। ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया है। साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया है। भारत ने इन टैरिफ को अनुचित और गैर-जरूरी बताया है और कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
इसी बीच, अमेरिका की एक अदालत ने ट्रंप के अधिकांश वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया है। इसके बाद, अमेरिकी प्रतिनिधि की विदेश मामलों की समिति ने कहा कि ट्रंप के 'राष्ट्रीय आपातकाल' के तहत लगाए गए टैरिफ को समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए।
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समिति ने कहा कि ट्रंप ने भारत को निशाना बनाया है जबकि चीन जैसे बड़े खरीदारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। सप्ताह की शुरुआत में इस समिति ने ट्रंप की उस नीति की आलोचना की थी, जो भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर है और कहा था कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंच रहा है।
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