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Hindi News ›   World ›   India nepal map issue: Salt sold in Nepal for Rs 100 kg, mustard oil Rs 250 liter due to border closure with India

भारत के साथ सीमा बंद होने से नेपाल में नमक बिक रहा 100 रुपये किलो, सरसों तेल 250 रुपये लीटर हुआ

Sun, 28 Jun 2020 01:29 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: अनवर अंसारी Updated Sun, 28 Jun 2020 01:29 PM IST
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India nepal map issue: Salt sold in Nepal for Rs 100 kg, mustard oil Rs 250 liter due to border closure with India
भारत नेपाल सीमा (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

भारत-नेपाल के बीच सीमाएं बंद होने का प्रभाव दोनों देशों के व्यापार पर पड़ रहा है। नेपाल सरकार ने अपने नागरिकों के भारत में प्रवेश पर रोक लगा दी है। वहीं, भारतीय क्षेत्र से भी लोगों की आवाजाही बंद है। 

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इसका असर ये हुआ है कि नेपाल में खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं। नमक का भाव 100 रुपये किलो और सरसों तेल की कीमत 250 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। सामान्य दिनों में इस हिमालयी देश और भारत के बीच करीब 4.21 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है। इसके अलावा, घोषित व्यापार से 10 गुना ज्यादा अघोषित व्यापार होता है। 
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वहीं, सीमाएं बंद होने का प्रभाव भारतीय क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। नेपाल सीमा से सटे इलाकों में व्यापार ठंडा पड़ गया है। बिहार के मधुबनी जिले के सीमावर्ती इलाके जयनगर में कपड़ा व्यापारियों ने बताया कि सीमा बंद होने का प्रभाव यहां के बाजारों पर खासा देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में केवल जयनगर मंडी को ही 25-30 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। 
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यह भी पढ़ें: चीन की नई चाल : नेपाल के बाद अब बांग्लादेश को लुभाने के लिए अपनाया ये तरीका

सीमाएं बंद होने से मधेशियों में नाराजगी
दोनों देशों के बीच सीमाओं के बंद होने और नेपाल की रोकटोक से मधेशियों के बीच खासी नाराजगी है। बताया जा रहा है कि ऐसे लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है, जो भारत में रहते हैं लेकिन उनके खेत नेपाल में हैं। सीमाओं के बंद होने से वे दोनों तरफ फंस गए हैं। वहीं, इससे उनकी खेती भी प्रभावित हुई है। बता दें कि, नेपाल में करीब 75 फीसदी उपजाऊ जमीन मधेशियों के पास ही है। 


नेपाल की संसद में हिंदी पर रोक की तैयारी
वहीं, नेपाल और चीन की दोस्ती गहराती जा रही है और इसका असर नेपाल की सियासत पर दिख रहा है। दरअसल, नेपाल की संसद में हिंदी पर रोक की तैयारी की जा रही है, जिसको लेकर सांसदों ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से पूछा है कि क्या ऐसा चीन के निर्देश पर किया जा रहा है? 

हालांकि, प्रधानमंत्री ओली सियासी बगावत से लगातार देश की जनता का ध्यान भटकाने में लगे हुए हैं। इसके लिए उन्होंने भारत के विरोध को हथियार बनाया है। दरअसल, वह नेपाल में एक नए राष्ट्रवाद का उदय करना चाह रहे हैं, ताकि उनकी पार्टी में उनके काम करने के तरीकों पर उठ रहे सवालों को खत्म किया जा सके। साथ ही विरोधियों को भी इसमें उलझाया जा सके।   

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