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यूएन: 'समुद्री व्यापार को भू-राजनीतिक तनाव के लिए निशाना न बनाएं', भारतीय राजदूत की होर्मुज संकट पर दो टूक

Sat, 19 Sep 2026 09:11 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, संयुक्त राष्ट्र
आईएएनएस, संयुक्त राष्ट्र Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Sat, 19 Sep 2026 09:11 AM IST
सार

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच भारत ने समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून और स्वतंत्र समुद्री आवाजाही का समर्थन किया। इसके साथ ही भारत ने सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया। आइए जानते हैं कि भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने और क्या कहा है? 

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India message: Do not target maritime trade geopolitical ends P. Harish speaks at the UN on the Hormuz crisis.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पी. हरीश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

होर्मुज जलडमरूमध्य के टकराव में भारत के जहाजों और नागरिकों को भी नुकसान पहुंचा है। भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की बात दोहराई है। इसके साथ ही कहा है कि समुद्री व्यापारिक गतिविधियों को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
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पी. हरीश ने क्या कहा? 
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को सुरक्षा परिषद से कहा कि नेविगेशन के अधिकारों पर जबरदस्ती, धमकियों, गैर-कानूनी प्रतिबंधों या मनमाने हस्तक्षेप का असर नहीं पड़ना चाहिए। भारत एक प्रमुख समुद्री देश है और हम एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और नियमों पर आधारित समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करते हैं।
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हरीश ने बहरीन की बुलाई गई काउंसिल की एक अनौपचारिक बैठक में समुद्री सुरक्षा माहौल पर चर्चा की। यह बैठक 'आरिया-फॉर्मूला' के तहत आयोजित की गई थी, जिसका नाम वेनेजुएला के राजनयिक डिएगो आरिया के नाम पर रखा गया है। उन्होंने ही 1992 में इस संस्था की अध्यक्षता करते हुए ऐसी बैठकों की शुरुआत की थी। 
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होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से क्या हुआ? 
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत को आर्थिक नुकसान भी हुआ है, क्योंकि इससे तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट आई और साथ ही दुनिया भर में पेट्रोलियम की कीमतें तेजी से बढ़ीं। हरीश ने कहा कि खाड़ी और पश्चिम एशिया में आई इस रुकावट का दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर असर पड़ता है, खासकर ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में। हालांकि उन्होंने उन घटनाओं या हमलों में शामिल पक्षों का नाम नहीं लिया, जिनमें ईरान और अमेरिका के साथ-साथ खाड़ी के अन्य देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए टकराव के दौरान भारत को नुकसान उठाना पड़ा था।

नाविकों की मौत का विरोध जताया
भारत ने ईरान और अमेरिका के सामने अपने नाविकों की मौत का विरोध जताया है। इसके साथ ही तेहरान से भारत में रजिस्टर्ड जहाज पर हुए हमले के बारे में भी शिकायत की है। अप्रैल में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गनबोट्स ने भारतीय झंडे वाले दो टैंकरों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई थीं।

जुलाई में संयुक्त अरब अमीरात में रजिस्टर्ड दो जहाजों पर ईरानी हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया। भारत ने नई दिल्ली में ईरानी राजनयिकों के सामने इन दोनों घटनाओं का विरोध जताया। जून में, भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के चार्ज डी'अफेयर्स को बुलाकर तीन भारतीय नाविकों की मौत का विरोध जताया, जब अमेरिका ने पलाऊ में रजिस्टर्ड उनके जहाज पर हमला किया था।

अबतक कितने सुरक्षित जहाज गुजरे हैं? 
हरीश ने कहा कि भारत अपनी नौसेना को तैनात करके इस इलाके के अशांत समुद्री इलाकों में समुद्री सुरक्षा में योगदान दे रहा है। हरीश के मुताबिक, सोमवार तक भारतीय सुरक्षा अभियानों ने 449 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों को अदन की खाड़ी और लाल सागर से गुजरने दिया, जिनमें लगभग 20.3 मिलियन टन कार्गो या 8.4 बिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत का तेल था।

ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का किया जिक्र
लाल सागर में रुकावटें हूथी मिलिशिया की वजह से आ रही हैं, जो यमन का एक विद्रोही समूह है और ईरान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए मार्च में पश्चिमी अरब सागर में 11 जहाजों के साथ 'ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा' शुरू किया था।

फंसे भारतीय नाविक के बारे में क्या कहा? 
संघर्ष में शामिल दोनों पक्षों की नाकेबंदी के कारण सैकड़ों भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर फंसे हुए हैं। उनके पक्ष में बात करते हुए हरीश ने कहा, 'समुद्री यात्रियों को हमारी सामूहिक कोशिशों के केंद्र में रहना चाहिए। उनकी सुरक्षा, समय पर सुरक्षित निकालना, चिकित्सा सहायता, क्रू बदलना और स्वदेश वापसी के लिए प्रभावी आकस्मिक योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।'


हरीश ने टेक्नोलॉजी में हो रहे बदलावों से पैदा होने वाले नए खतरों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली उभरते खतरों से निपटने के बढ़ते महत्व को समझती है, जिसमें बिना चालक वाले सिस्टम से हमले, साइबर जोखिम और नेविगेशन व संचार में दखल शामिल हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'इन चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, क्षमता निर्माण और टेक्नोलॉजी का जिम्मेदार इस्तेमाल बहुत जरूरी होगा।'



 
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