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India-Sri Lanka: भारत ने ऊर्जा परियोजनाओं का पहला भुगतान श्रीलंका को सौंपा, चीनी उपक्रम की जगह ली
Fri, 30 Aug 2024 06:10 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Fri, 30 Aug 2024 06:10 AM IST
सार
भारत ने ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पहला भुगतान श्रीलंका को सौंप दिया है। ये परियोजनाएं डेल्फ्ट, नैनातिवु और अनलाईतिवु द्वीपों में 1.1 करोड़ डॉलर की भारतीय अनुदान से क्रियान्वित की जा रही हैं।
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भारत-श्रीलंका।
- फोटो : amarujala
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विस्तार
श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने उत्तरी जाफना के पास तीन श्रीलंकाई द्वीपों पर हाइब्रिड बिजली परियोजनाओं के लिए पहला भुगतान बृहस्पतिवार को सौंपा। ये परियोजनाएं डेल्फ्ट, नैनातिवु और अनलाईतिवु द्वीपों में 1.1 करोड़ डॉलर की भारतीय अनुदान सहायता के तहत क्रियान्वित की जा रही हैं। इनके तहत तीनों द्वीपों में हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली स्थापित की जाएंगी।
उच्चायुक्त संतोष झा ने इन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पहला भुगतान विद्युत और ऊर्जा मंत्रालय की सचिव डॉ. सुलक्षणा जयवर्धने और श्रीलंका सतत ऊर्जा प्राधिकरण के अध्यक्ष को सौंपा। परियोजना का उद्देश्य उन तीन द्वीपों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है जो राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़े नहीं हैं। ये द्वीप तमिलनाडु के समीप हैं।
चीनी उपक्रम की जगह ली
परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर 2022 में हस्ताक्षर किए गए। इसने उस चीनी उपक्रम की जगह ली है जिसे भारत की आपत्तियों के बाद शुरू में अनुबंध दिया गया था। 2021 में, भारत द्वारा इसके स्थान को लेकर चिंता जताने की खबरों के बीच, चीन ने ‘तीसरे पक्ष’ से ‘सुरक्षा चिंता’ का हवाला देते हुए हाइब्रिड ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की परियोजना को निलंबित कर दिया था।
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उच्चायुक्त संतोष झा ने इन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पहला भुगतान विद्युत और ऊर्जा मंत्रालय की सचिव डॉ. सुलक्षणा जयवर्धने और श्रीलंका सतत ऊर्जा प्राधिकरण के अध्यक्ष को सौंपा। परियोजना का उद्देश्य उन तीन द्वीपों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है जो राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़े नहीं हैं। ये द्वीप तमिलनाडु के समीप हैं।
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चीनी उपक्रम की जगह ली
परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन पर 2022 में हस्ताक्षर किए गए। इसने उस चीनी उपक्रम की जगह ली है जिसे भारत की आपत्तियों के बाद शुरू में अनुबंध दिया गया था। 2021 में, भारत द्वारा इसके स्थान को लेकर चिंता जताने की खबरों के बीच, चीन ने ‘तीसरे पक्ष’ से ‘सुरक्षा चिंता’ का हवाला देते हुए हाइब्रिड ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की परियोजना को निलंबित कर दिया था।
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