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लद्दाख में एलएसी पर बातचीत के बीच चीनी मीडिया की गीदड़ भभकी, 'जंग हुई तो उनकी आर्मी ज्यादा समय टिक नहीं पाएगी'

Fri, 11 Sep 2020 12:03 PM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: देव कश्यप Updated Fri, 11 Sep 2020 12:03 PM IST
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India China Border Standoff Chinese Global Times says warned that New Delhi has no chance of winning war with Beijing
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

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लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन की बातचीत के बीच चीनी मीडिया की तरफ से भारत को धमकियां दी जा रही हैं। सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि अगर भारतीय सेना पैंगोंग त्सो झील (लद्दाख) के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटती तो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) पूरे ठंड के मौसम में वहीं जमी रहेगी।

सरकारी मीडिया ने यह भी कहा कि भारत का सैन्य तंत्र कमजोर है। उसके कई सैनिक कड़ाके की ठंड या कोरोना से मर जाएंगे। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध हुआ तो भारतीय सेना जल्द ही हथियार डाल देगी। अगर भारत शांति चाहता है तो दोनों देशों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की सात नवंबर 1959 की स्थिति ही माननी होगी। अगर भारत जंग चाहता है तो हम उसकी ये इच्छा पूरी करेंगे। देखते हैं कि कौन सा देश दूसरे को मात दे सकता है।

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ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि ‘चीन ने हमेशा से भारत की गरिमा का ख्याल रखा है। अब भारत की राष्ट्रवादी ताकतें इस सम्मान का फायदा उठाना चाहती हैं। वे भूल गए हैं कि वो क्या हैं? आज के माहौल में हर चीज सामने रखने की जरूरत है।’


‘हमारी तिब्बत मिलिट्री कमांड भारत से तनाव को देखते हुए पीएलए के सहयोग के लिए ड्रोन की मदद ले रही है। इससे साबित होता है कि पीएलए किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।’


बता दें कि इससे पहले गुरुवार को भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव को कम करने के लिए रूस की राजधानी मॉस्को में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मुलाकात हुई थी। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए पांच बिंदुओं पर सहमति बनी है। 
 
  • दोनों विदेश मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि मौजूदा स्थिति किसी के हित में नहीं है, इसीलिए वे इस बात पर राजी हुए कि सीमा पर तैनात दोनों देशों की सेनाओं को संवाद जारी रखना चाहिए, उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तनाव को कम करना चाहिए।
  • संयुक्त बयान के अनुसार, जयशंकर और वांग ने सहमति जताई कि दोनों पक्षों को भारत-चीन संबंधों को विकसित करने के लिए दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति से मार्गदर्शन लेना चाहिए, जिसमें मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना शामिल है।
  • दोनों मंत्री इस बात पर सहमत हुए कि सीमा के प्रबंधन से जुड़े सभी मौजूदा समझौतों और नियमों का पालन करना चाहिए, शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए और किसी भी ऐसी कार्रवाई से बचना है, जो तनाव बढ़ा सकती है।
  • जयशंकर और वांग वार्ता में इस बात पर सहमत हुए कि जैसे ही सीमा पर स्थिति बेहतर होगी, दोनों पक्षों को सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाने के लिए नए विश्वास को स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए।
  • संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा मामले पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) तंत्र के माध्यम से संवाद और संचार जारी रखने के लिए सहमति व्यक्त की है। उन्होंने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि बैठकों में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र जारी रहना चाहिए।
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