Imran Khan: इमरान की पार्टी ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई फिर से करने की मांग
याचिका में दलील दी गई कि पूर्व क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान को लेकर निष्पक्ष सुनवाई नहीं की गई। फैसले को न सिर्फ जल्दबाजी में पारित किया गया, बल्कि इसे इमरान की गैर-मौजूदगी में भी सुनाया गया।
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पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई फिर से करने की मांग की। 70 वर्षीय इमरान खान को अतिरिक्त एवं सत्र न्यायाधीश (एडीएसजे) हुमायूं दिलावर ने शनिवार को तीन साल जेल की सजा सुनाई, जिन्होंने उन्हें सरकारी उपहारों की बिक्री से प्राप्त आय की घोषणा नहीं करने का दोषी पाया था। अब इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
याचिका संविधान के अनुच्छेद 184(2) के तहत दायर की गई है। इसमें मांग की गई कि तोशाखाना मामले की दोबारा सुनवाई की जाए। इसमें दलील दी गई कि पूर्व क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान को लेकर निष्पक्ष सुनवाई नहीं की गई। फैसले को न सिर्फ जल्दबाजी में पारित किया गया, बल्कि इसे इमरान की गैर-मौजूदगी में भी सुनाया गया। यह इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) के निर्देशों की पूरी तरह से अवहेलना थी।
तीन साल की सजा सुनाई गई
दरअसल, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना केस में जिला-सत्र न्यायालय ने दोषी ठहराया है। उन्हें इस मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई है। इस्लामाबाद पुलिस ने सजा होने के साथ ही इमरान को गिरफ्तार कर लिया था।
पहले जानिए क्या है तोशाखाना मामला?
- दरअसल, पाकिस्तान के कानून के अनुसार किसी विदेशी राज्य के गणमान्य व्यक्तियों से प्राप्त कोई भी उपहार स्टेट डिपॉजिटरी यानी तोशाखाना में रखना होता है। अगर राज्य का मुखिया उपहार को अपने पास रखना चाहता है तो उसके लिए उसे इसके मूल्य के बराबर राशि का भुगतान करना होगा। यह एक नीलामी की प्रक्रिया के जरिए तय किया जाता है। ये उपहार या तो तोशाखाना में जमा रहते हैं या नीलाम किए जा सकते हैं और इसके माध्यम से अर्जित धन को राष्ट्रीय खजाने में जमा किया जाता है।
- कहानी इमरान के प्रधानमंत्री रहते हुए शुरू हुई थी। 2018 में सत्ता में आए इमरान खान को आधिकारिक यात्राओं के दौरान करीब 14 करोड़ रुपये के 58 उपहार मिले थे। इन महंगे उपहारों को तोशाखाना में जमा किया गया था। बाद में इमरान खान ने इन्हें तोशखाने से सस्ते दाम पर खरीद लिया और फिर महंगे दाम पर बाजार में बेच दिया। इस पूरी प्रक्रिया के लिए उन्होंने सरकारी कानून में बदलाव भी किए।
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान ने 2.15 करोड़ रुपये में इन गिफ्ट्स को तोशखाने से खरीदा था और इन्हें बेचकर 5.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमा लिया। इन गिफ्टस में एक ग्राफ घड़ी, कफलिंक का एक जोड़ा, एक महंगा पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां भी थीं।
कैसे हुआ खुलासा?
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगस्त में इमरान खान को सत्ता से हटाए जाने के कुछ महीनों बाद, सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ सांसदों ने नेशनल असेंबली के अध्यक्ष राजा परवेज अशरफ ने सामने एक आरोप पत्र दायर किया था। इमरान खान पर आरोप लगाए गए थे कि जो गिफ्ट उन्हें मिले, उसका विवरण तोशाखाना को नहीं सौंपा गया था। उन्हें बेचकर पैसे कमाए गए हैं। पाकिस्तान के स्पीकर ने इस मामले में जांच करवाई। आठ सितंबर को इमरान खान को नोटिस मिला था। उन्होंने इस नोटिस का जवाब दिया था और कहा था कि प्रधानमंत्री रहते हुए मिले चार उपहारों को उन्होंने बेच दिया था। इन उपहारों में ग्रेफ, रोलेक्स घड़ी, कफ़लिंक की एक जोड़ी, एक महंगी कलम, कई धातुओं की चीजें और एक अंगूठी शामिल थी।
फिर सदस्यता भी चली गई
आरोप साबित होने पर पिछले साल इमरान खान की संसद सदस्यता भी चली गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान ने जानबूझकर चुनाव अधिनियम, 2017 के प्रावधानों का उल्लंघन किया था और गलत बयान दिया था। साल 2020-21 के लिए उन्होंने अपनी संपत्तियों के बारे में भी गलत जानकारी दी थी।