खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें: दुनिया के सामने है अब अनाज की कमरतोड़ महंगाई का खतरा
यूरोस्टैट के आंकड़ों के मुताबिक यूरो ज़ोन में खाद्य पदार्थों, अल्कोहल और तंबाकू के दाम में भी इजाफे का रुख है। इसका असर यूरो ज़ोन की वार्षिक मुद्रास्फीति दर पर पड़ा है, जो अब बढ़ कर 3.4 फीसदी हो गई है। यूरो जोन में मुद्रास्फीति की इतनी ऊंची दर 2008 के बाद कभी नहीं देखी गई...
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दुनिया भर में खाद्य पदार्थों की कीमतों में इस साल भारी उछाल आया है। वैश्विक अनाज मूल्य सूचकांक अब तक 27 फीसदी बढ़ चुका है। ये जानकारी विश्लेषण (एनालिटिकल) एजेंसी इंफोलाइन इन्फॉर्मेशन ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में दी है। जानकारों का कहना है कि कोरोना महामारी आने के बाद से ही दुनिया में अनाज की महंगाई का दौर है। अब इसके साथ ही दुनिया को ऊर्जा संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। इससे आने वाले समय में महंगाई और दूसरी आर्थिक समस्याएं और गहरा सकती हैं।
इंफोलाइन एजेंसी के सीईओ इवान फेड्याकोव ने एक रूसी न्यू वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘1970 के दशक के बाद अनाज की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी इसी साल हुई है। उस समय भी ऐसी महंगाई देखने को मिली थी। लेकिन तब उसकी वजह दुनिया भर में हो रहे वित्तीय बदलाव थे। उसके बाद लगभग 40 साल तक अनाज की वैसी महंगाई देखने को नहीं मिली, जैसा हम अभी देख रहे हैं।’
फेड्याकोव ने ध्यान दिलाया कि अलग-अलग कई वस्तुओं की कीमत का संबंध जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा- ‘इस समय कीमतें सिर्फ फल, सब्जियों और दूध की ही नहीं बढ़ रही हैं, बल्कि पशुओं के चारे और उर्वरकों के दाम भी बढ़ रहे हैं। इससे महंगाई का एक दुश्चक्र शुरू हो गया है। कीमतों का बढ़ना अभी जारी रहेगा। लेकिन दूसरा मुद्दा लोगों की क्रय शक्ति का है। लोगों की क्रय शक्ति असीमित नहीं है।’ जाहिर है, फेड्याकोव ने यह कहना चाहा है कि महंगाई से लोगों की मुश्किलें ऐसी सीमा तक बढ़ सकती हैं, जब उनके लिए बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाएगा।
मुद्रास्फीति दर बढ़ने का आलम यह है कि अब इससे धनी देशों में भी परेशानी महसूस की जा रही है। यूरोपियन यूनियन की सांख्यिकी एजेंसी यूरोस्टैट ने पिछले हफ्ते बताया था कि यूरो ज़ोन में सितंबर में महंगाई दर 13 साल से सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। वहां मुद्रास्फीति दर बढ़ने के पीछे प्रमुख कारण प्राकृतिक गैस के दामों में आया उछाल है। यूरोस्टैट ने बताया कि 2008 में आई आर्थिक मंदी के समय महंगाई में ऐसी बढ़ोतरी देखने को मिली थी। उसके बाद 13 साल तक आम तौर पर महंगाई काबू में रही।
यूरोस्टैट के आंकड़ों के मुताबिक यूरो ज़ोन में खाद्य पदार्थों, अल्कोहल और तंबाकू के दाम में भी इजाफे का रुख है। इसका असर यूरो ज़ोन की वार्षिक मुद्रास्फीति दर पर पड़ा है, जो अब बढ़ कर 3.4 फीसदी हो गई है। यूरो जोन में मुद्रास्फीति की इतनी ऊंची दर 2008 के बाद कभी नहीं देखी गई। अमेरिका में भी हाल के महीनों में महंगाई दर में तेज वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये वैश्विक ट्रेंड है, जिस पर फिलहाल काबू पाए जाने की उम्मीद नजर नहीं आती।
यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ईसीबी) ने अनुमान लगाया है कि यूरो जोन में वार्षिक मुद्रास्फीति दर इस बार चार फीसदी तक पहुंच जाएगी। उसकी एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अगले साल भी इसमें कोई कमी आने की संभावना नहीं है।