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Sri Lanka Crisis: श्रीलंका में सेना से लेकर पशुओं तक पर पड़ रही है आर्थिक संकट की गहरी मार! जानें पूरा मामला

Sun, 18 Dec 2022 03:23 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 18 Dec 2022 03:23 PM IST
सार

रक्षा मंत्रालय ने सेना से गैर-हाजिर रहने वाले कर्मियों के लिए आम माफी का एलान किया है। इसके तहत इस वर्ष 15 नवंबर से 31 दिसंबर तक किसी वजह से गैर हाजिर रहे सैनिकों को सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।  

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From the army to the animals economic crisis in Sri Lanka is taking a deep toll
Sri Lanka Economic Crisis - फोटो : Istock

विस्तार

श्रीलंका सरकार ने खर्च में कटौती के अभियान के तहत सेना में 16 हजार से ज्यादा पद खत्म करने का फैसला किया है। श्रीलंका सरकार पर खर्च घटाने की शर्त अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने लगाई है। इसके लिए हर तरफ नजर दौड़ाने के बाद आखिरकार रानिल विक्रमसिंघे सरकार ने देश की पुख्ता सुरक्षा की चिंता छोड़ते हुए सेना पर गाज गिराई है। विक्रमसिंघे ने पिछले महीने प्रस्ताव रखा था कि सैनिकों को स्वैच्छिक रिटायरमेंट दिलाने की कोशिश की जाए, ताकि रक्षा खर्च घटाया जा सके। अब इस योजना पर अमल शुरू कर दिया गया है। 

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सैनिकों को स्वैच्छिक रिटायरमेंट दिलाने दिलाने के लिए सेना ने अपने नियम में बदलाव किया है। श्रीलंकाई सेना में नौकरी काल में सेवा मुक्त होना गैर-कानूनी है। इसीलिए अब ऐसी अनुपस्थिति को कानूनी मान्यता देने के लिए आम माफी घोषित की गई है। इसके तहत नौकरी से अलग होना चाहने वाले कर्मियों को गैर-हाजिर मान कर उन्हें माफी देते हुए सेवा मुक्त कर दिया जाएगा।  
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रक्षा मंत्रालय ने सेना से गैर-हाजिर रहने वाले कर्मियों के लिए आम माफी का एलान किया है। इसके तहत इस वर्ष 15 नवंबर से 31 दिसंबर तक किसी वजह से गैर हाजिर रहे सैनिकों को सेवा मुक्त कर दिया जाएगा। जो सैन्य कर्मी अभी विदेशों में हैं, उन्हें भी यह सुविधा दी गई है। इसके तहत अपनी ड्यूटी को ज्वाइन किए बिना वे आम माफी योजना का लाभ उठाते हुए नौकरी छोड़ सकेंगे। 
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सेना के प्रवक्ता रवि हेरात ने बताया कि माफी योजना के तहत अब तक 16,141 सैनिको ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए अर्जी दी है। उन्होंने बताया- 21 अफसरों और 15,838 अन्य रैंक के कर्मियों ने मेडिकल और सुरक्षा मंजूरी के साथ अपने इस्तीफे भेज दिए हैं। 179 अन्य कर्मियों के लिए सिक्युरिटी और मेडिकल क्लीयरेंस जारी किए जा रहे हैं।
 
इस बीच खबर है कि पिछले हफ्ते आए तूफान के दौरान चली ठंडी हवाओ की वजह से बीमार हुए पशुओं का इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा है। इस कारण बड़ी संख्या में पशु मर गए हैं। ठीक इलाज ना मिलने की समस्या देश में दवाओं और ईंधन की कमी के कारण पेश आ रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ठीक से इलाज ना मिलने के कारण 14 दिसंबर तक 1,272 पशु मर चुके थे। अभी चार सौ से ज्यादा पशुओं का इलाज चल रहा है। 

पशु उत्पादन और स्वास्थ्य विभाग के उत्तरी प्रांत के निदेशक एस वसीहरन ने वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम को बताया कि दवाएं बहुत महंगी हैं और उनका भंडार भी बहुत कम है। कुछ पशु मालिक ही हैं, जो दवाओं को खरीद कर हमारे पास ला रहे हैं। अगर हमारे पास पर्याप्त दवाएं होतीं, तो हम कई पशुओं को बचा लेते। लेकिन दवाओं की कमी के कारण हम 250 पशुओं की जान ही बचा पाए।


तूफान के कारण पूरे श्रीलंका में ठंडी हवाएं चलीं और तापमान 18 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। समुद्र तटीय इस देश के लिए यह असामान्य तापमान है। 14 दिसंबर को जाकर सामान्य मौसम बहाल हुआ, जब दिन का तापमान 28 और रात का 25 डिग्री तक पहुंचा।

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