{"_id":"68369d69ea7f1f2e0705e31e","slug":"france-national-assembly-adopts-bill-legalising-end-of-life-options-strict-conditions-opposed-2025-05-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"France: फ्रांस में लाइलाज रोगियों को मौत चुनने का मिलेगा अधिकार, जानिए क्या होगी शर्तें; विरोध भी कम नहीं","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
France: फ्रांस में लाइलाज रोगियों को मौत चुनने का मिलेगा अधिकार, जानिए क्या होगी शर्तें; विरोध भी कम नहीं
Wed, 28 May 2025 11:29 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 28 May 2025 11:29 AM IST
सार
फ्रांस में बीते 20 वर्षों से मौत का विकल्प चुनने का अधिकार देने की मांग की जा रही है। बीते महीने राष्ट्रपति मैक्रों ने सुझाव दिया था कि अगर यह विधेयक संसद में फंसा रहता है और इसे मंजूरी नहीं मिल पाती है तो वे फ्रांस के मतदाताओं से पूछकर एक जनमत के जरिए भी इस विधेयक को मंजूर कर सकते हैं।
विज्ञापन
इमैनुएल मैक्रों
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फ्रांस के निचले सदन नेशनल असेंबली ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक विधेयक को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के तहत फ्रांस में लाइलाज बीमारियों से ग्रस्त व्यस्क लोगों को मौत चुनने का अधिकार मिलेगा। यूरोप में लंबे समय से मौत चुनने के अधिकार को कानूनी करने की मांग उठ रही हैं। फ्रांस में भी लंबे समय से ऐसी मांग की जा रही है और महीनों से इस पर संसद में चर्चा में चल रही है। लंबी चर्चा के बाद मंगलवार को नेशनल असेंबली ने इसकी मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक को उच्च सदन सीनेट में पेश किया जाएगा।
जानिए क्या होंगी शर्तें
प्रस्तावित विधेयक में जहां गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को मौत का विकल्प चुनने की मंजूरी दी गई है, वहीं इसके साथ कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं। शर्तों के तहत लाइलाज बीमारी होने पर मरीज को खुद ही जहर लेना होगा, लेकिन अगर वह खुद इस स्थिति में नहीं है कि खुद अपनी जान ले सके तो उस स्थिति में डॉक्टर या नर्स की मदद से व्यक्ति को जहर दिया जा सकेगा। विधेयक के तहत मौत का विकल्प चुनने के लिए मरीज का कम से कम 18 साल का होना जरूरी है। साथ ही उसका फ्रांस का नागरिक होना भी जरूरी है।
मौत का विकल्प चुनने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम यह सत्यापित करेगी कि व्यक्ति लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है और उसका कोई इलाज नहीं है। साथ ही मरीज असहनीय पीड़ा से गुजर रहा है। इस सत्यापन के बाद ही मौत चुनने का विकल्प मिलेगा। मानसिक रोगियों को मौत चुनने के विकल्प से बाहर रखा गया है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Canada: ट्रंप की विलय की धमकियों पर किंग चार्ल्स का जवाब- चुनौतियां बढ़ीं, लेकिन कनाडा एक मजबूत और आजाद देश
विधेयक के तहत बीमार व्यक्ति को अगर जान देने की अनुमति मिल जाती है तो वह अपने घर, नर्सिंग होम या स्वास्थ्य केंद्र में जानलेवा दवाई या जहर ले सकेगा।
फ्रांस में बीते 20 वर्षों से मौत का विकल्प चुनने का अधिकार देने की मांग की जा रही है। बीते महीने राष्ट्रपति मैक्रों ने सुझाव दिया था कि अगर यह विधेयक संसद में फंसा रहता है और इसे मंजूरी नहीं मिल पाती है तो वे फ्रांस के मतदाताओं से पूछकर एक जनमत के जरिए भी इस विधेयक को मंजूर कर सकते हैं।
विरोध भी कम नहीं
हालांकि विधेयक का विरोध भी हो रहा है। फ्रांस के धार्मिक नेताओं के संगठन द कॉन्फ्रेंस ऑफ रिलीजियस लीडर्स इन फ्रांस ने इस विधेयक का विरोध किया है। इस संगठन में कैथोलिक, ऑर्थोडॉक्स, प्रोटेस्टेंट, यहूदी, मुस्लिम और बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हैं। संगठन का दावा है कि इस विधेयक के बाद बुजुर्गों, बीमार और अक्षम लोगों पर भी दबाव बढ़ेगा। उल्लेखनीय है कि फ्रांस की तरह ही ब्रिटेन में भी ऐसे ही विधेयक पर चर्चा चल रही है। अभी स्विट्जरलैंड, कई अमेरिकी राज्यों, नीदरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, कोलंबिया, बेल्जियम, लक्जमबर्ग में भी कुछ शर्तों के साथ मौत चुनने का विकल्प मौजूद है।
विज्ञापन
जानिए क्या होंगी शर्तें
प्रस्तावित विधेयक में जहां गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को मौत का विकल्प चुनने की मंजूरी दी गई है, वहीं इसके साथ कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं। शर्तों के तहत लाइलाज बीमारी होने पर मरीज को खुद ही जहर लेना होगा, लेकिन अगर वह खुद इस स्थिति में नहीं है कि खुद अपनी जान ले सके तो उस स्थिति में डॉक्टर या नर्स की मदद से व्यक्ति को जहर दिया जा सकेगा। विधेयक के तहत मौत का विकल्प चुनने के लिए मरीज का कम से कम 18 साल का होना जरूरी है। साथ ही उसका फ्रांस का नागरिक होना भी जरूरी है।
विज्ञापन
मौत का विकल्प चुनने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम यह सत्यापित करेगी कि व्यक्ति लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है और उसका कोई इलाज नहीं है। साथ ही मरीज असहनीय पीड़ा से गुजर रहा है। इस सत्यापन के बाद ही मौत चुनने का विकल्प मिलेगा। मानसिक रोगियों को मौत चुनने के विकल्प से बाहर रखा गया है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- Canada: ट्रंप की विलय की धमकियों पर किंग चार्ल्स का जवाब- चुनौतियां बढ़ीं, लेकिन कनाडा एक मजबूत और आजाद देश
विधेयक के तहत बीमार व्यक्ति को अगर जान देने की अनुमति मिल जाती है तो वह अपने घर, नर्सिंग होम या स्वास्थ्य केंद्र में जानलेवा दवाई या जहर ले सकेगा।
फ्रांस में बीते 20 वर्षों से मौत का विकल्प चुनने का अधिकार देने की मांग की जा रही है। बीते महीने राष्ट्रपति मैक्रों ने सुझाव दिया था कि अगर यह विधेयक संसद में फंसा रहता है और इसे मंजूरी नहीं मिल पाती है तो वे फ्रांस के मतदाताओं से पूछकर एक जनमत के जरिए भी इस विधेयक को मंजूर कर सकते हैं।
विरोध भी कम नहीं
हालांकि विधेयक का विरोध भी हो रहा है। फ्रांस के धार्मिक नेताओं के संगठन द कॉन्फ्रेंस ऑफ रिलीजियस लीडर्स इन फ्रांस ने इस विधेयक का विरोध किया है। इस संगठन में कैथोलिक, ऑर्थोडॉक्स, प्रोटेस्टेंट, यहूदी, मुस्लिम और बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हैं। संगठन का दावा है कि इस विधेयक के बाद बुजुर्गों, बीमार और अक्षम लोगों पर भी दबाव बढ़ेगा। उल्लेखनीय है कि फ्रांस की तरह ही ब्रिटेन में भी ऐसे ही विधेयक पर चर्चा चल रही है। अभी स्विट्जरलैंड, कई अमेरिकी राज्यों, नीदरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, कोलंबिया, बेल्जियम, लक्जमबर्ग में भी कुछ शर्तों के साथ मौत चुनने का विकल्प मौजूद है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन