{"_id":"653e9708749d1999b50924f8","slug":"france-abortion-rights-emmanuel-macron-make-it-irreversible-french-constitution-2023-10-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Abortion Rights: 'गर्भपात का अधिकार संविधान में शामिल कर अपरिवर्तनीय बनाएंगे', फ्रांस के राष्ट्रपति का संकल्प","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Abortion Rights: 'गर्भपात का अधिकार संविधान में शामिल कर अपरिवर्तनीय बनाएंगे', फ्रांस के राष्ट्रपति का संकल्प
Sun, 29 Oct 2023 11:01 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 29 Oct 2023 11:01 PM IST
सार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने गर्भपात के अधिकारों को फ्रांसीसी संविधान में शामिल करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने इसे "अपरिवर्तनीय" बनाने का संकल्प लिया है।
विज्ञापन
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने महिलाओं के लिए गर्भपात के अधिकारों को 2024 तक संविधान में शामिल कर अधिकारों को "अपरिवर्तनीय" बनाने का संकल्प लिया है। मैक्रॉन ने कहा कि संवैधानिक कानून का मसौदा इसी सप्ताह राज्य परिषद को भेजा जाएगा और साल के अंत तक इस मसौदे को मंत्रिपरिषद के सामने पेश किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि 2024 तक महिलाओं की गर्भपात कराने की आजादी 'अपरिवर्तनीय' होगी।
महिलाओं को गर्भपात कराने की आजादी
मैक्रॉन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर एक पोस्ट में आह्वान किया, "आइए हम अपने संविधान में महिलाओं को गर्भपात का सहारा लेने की स्वतंत्रता को शामिल करें।" उन्होंने कहा, "सांसदों और संघों के काम के आधार पर, संवैधानिक कानून का मसौदा इस सप्ताह राज्य परिषद को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि 2024 से महिलाओं को गर्भपात कराने की आजादी मिलेगी। संविधान से मिले इस अधिकार को कभी बदला नहीं जा सकेगा।
48 साल पहले से कानूनी है गर्भपात, अब संविधान में बदलाव क्यों?
गौरतलब है कि 1975 में फ्रांस में एक राष्ट्रीय कानून के माध्यम से गर्भपात को कानूनी बना दिया गया था। आज इसकी वैधता पर कोई गंभीर खतरा नहीं है, लेकिन पिछले साल गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को पलटने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फ्रांस में संवैधानिक प्रावधानों पर मंथन शुरू हुआ है।
विज्ञापन
गर्भपात स्वैच्छिक होगा, फ्रांस के संविधान से मिलेगा अधिकार
न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) ने इस साल की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि गर्भपात को एक अपरिहार्य अधिकार के रूप में संरक्षित करने और मान्यता देने की दिशा में फ्रांस की सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इस साल की शुरुआत में, मैक्रॉन ने घोषणा की थी कि "गर्भावस्था के स्वैच्छिक समापन" को चुनने की स्वतंत्रता को संविधान में शामिल करने के लिए आने वाले महीनों में एक विधेयक तैयार किया जाएगा।
अदालतें महिलाओं के अधिकारों पर कर रहीं बात
मैक्रॉन के हवाले से एनवाईटी की रिपोर्ट में कहा गया, "दुनिया के अन्य देशों की अदालतें महिलाओं के अधिकारों के सवाल पर लौट आई हैं। प्रतिक्रियावादी विचारक उन वकीलों और कार्यकर्ताओं से बदला लेना चाहते हैं। इनके कारण एक बार उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा था।"
असेंबली और सीनेट से मंजूरी जरूरी
गौरतलब है कि फ्रांस में संवैधानिक संशोधन एक लंबी प्रक्रिया है जिसके लिए नेशनल असेंबली और सीनेट से मंजूरी लेनी पड़ती है। एक समान प्रस्तावों पर जनमत संग्रह या समझौते की जरूरत होती है। गर्भपात के प्रस्ताव पर फ्रांस की संसद- वर्सेल्स में दोनों सदनों की बैठक में मतदान कराना होगा।
गर्भपात के मामले में 93 साल की महिला हलीमी की अहम भूमिका
बता दें कि राष्ट्रपति मैक्रॉन ने इसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन 93 वर्षीय महिला हलीमी को सम्मानित किया था। उन्होंने इस दिन संविधान में महिलाओं के लिए गर्भपात के अधिकारों को सुनिश्चित करने की वकालत की थी। एनवाईटी की रिपोर्ट के अनुसार, हलीमी की मौत 2020 में 93 वर्ष की आयु में हुई थी। ट्यूनीशियाई मूल की फ्रांसीसी वकील और समाजवादी महिला हलीमी को फ्रांस में गर्भपात को वैध बनाने की लड़ाई के लिए याद किया जाता है। अथक संघर्ष के बाद हलीमी को मिली वैश्विक पहचान को अमेरिका में रो बनाम वेड (केस में पार्टियों के नाम) फैसले से भी जोड़ा जाता है।
विज्ञापन
महिलाओं को गर्भपात कराने की आजादी
मैक्रॉन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- एक्स पर एक पोस्ट में आह्वान किया, "आइए हम अपने संविधान में महिलाओं को गर्भपात का सहारा लेने की स्वतंत्रता को शामिल करें।" उन्होंने कहा, "सांसदों और संघों के काम के आधार पर, संवैधानिक कानून का मसौदा इस सप्ताह राज्य परिषद को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि 2024 से महिलाओं को गर्भपात कराने की आजादी मिलेगी। संविधान से मिले इस अधिकार को कभी बदला नहीं जा सकेगा।
विज्ञापन
48 साल पहले से कानूनी है गर्भपात, अब संविधान में बदलाव क्यों?
गौरतलब है कि 1975 में फ्रांस में एक राष्ट्रीय कानून के माध्यम से गर्भपात को कानूनी बना दिया गया था। आज इसकी वैधता पर कोई गंभीर खतरा नहीं है, लेकिन पिछले साल गर्भपात के संवैधानिक अधिकार को पलटने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फ्रांस में संवैधानिक प्रावधानों पर मंथन शुरू हुआ है।
विज्ञापन
गर्भपात स्वैच्छिक होगा, फ्रांस के संविधान से मिलेगा अधिकार
न्यूयॉर्क टाइम्स (एनवाईटी) ने इस साल की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि गर्भपात को एक अपरिहार्य अधिकार के रूप में संरक्षित करने और मान्यता देने की दिशा में फ्रांस की सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इस साल की शुरुआत में, मैक्रॉन ने घोषणा की थी कि "गर्भावस्था के स्वैच्छिक समापन" को चुनने की स्वतंत्रता को संविधान में शामिल करने के लिए आने वाले महीनों में एक विधेयक तैयार किया जाएगा।
अदालतें महिलाओं के अधिकारों पर कर रहीं बात
मैक्रॉन के हवाले से एनवाईटी की रिपोर्ट में कहा गया, "दुनिया के अन्य देशों की अदालतें महिलाओं के अधिकारों के सवाल पर लौट आई हैं। प्रतिक्रियावादी विचारक उन वकीलों और कार्यकर्ताओं से बदला लेना चाहते हैं। इनके कारण एक बार उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा था।"
असेंबली और सीनेट से मंजूरी जरूरी
गौरतलब है कि फ्रांस में संवैधानिक संशोधन एक लंबी प्रक्रिया है जिसके लिए नेशनल असेंबली और सीनेट से मंजूरी लेनी पड़ती है। एक समान प्रस्तावों पर जनमत संग्रह या समझौते की जरूरत होती है। गर्भपात के प्रस्ताव पर फ्रांस की संसद- वर्सेल्स में दोनों सदनों की बैठक में मतदान कराना होगा।
गर्भपात के मामले में 93 साल की महिला हलीमी की अहम भूमिका
बता दें कि राष्ट्रपति मैक्रॉन ने इसी वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन 93 वर्षीय महिला हलीमी को सम्मानित किया था। उन्होंने इस दिन संविधान में महिलाओं के लिए गर्भपात के अधिकारों को सुनिश्चित करने की वकालत की थी। एनवाईटी की रिपोर्ट के अनुसार, हलीमी की मौत 2020 में 93 वर्ष की आयु में हुई थी। ट्यूनीशियाई मूल की फ्रांसीसी वकील और समाजवादी महिला हलीमी को फ्रांस में गर्भपात को वैध बनाने की लड़ाई के लिए याद किया जाता है। अथक संघर्ष के बाद हलीमी को मिली वैश्विक पहचान को अमेरिका में रो बनाम वेड (केस में पार्टियों के नाम) फैसले से भी जोड़ा जाता है।