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Hindi News ›   World ›   Former US President George W Bush and Barak Obama hiccup Trump took risk of killing Qasim Suleimani

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बुश और ओबामा हिचके... ट्रंप ने लिया सुलेमानी के खात्मे का जोखिम

Sun, 05 Jan 2020 02:44 AM IST
योगेश साहू न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस Published by: योगेश साहू Updated Sun, 05 Jan 2020 02:44 AM IST
सार

  • बुश-ओबामा के उलट ट्रंप ने लिया सुलेमानी के खात्मे का जोखिम
  • ठेकेदार पर हमले के बाद बनी सुलेमानी के खात्मे की योजना
  • सैन्य कार्रवाई के समय को लेकर उठ रहे सवाल

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Former US President George W Bush and Barak Obama hiccup Trump took risk of killing Qasim Suleimani
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। - फोटो : PTI

विस्तार

पिछले हफ्ते बृहस्पतिवार शाम पांच बजे तक फ्लोरिडा में चुनावी सलाहकारों के साथ चर्चा में मशगूल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अचानक सब छोड़कर एक बैठक में गए और थोड़ी देर बाद लौट आए। ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के खात्मे के बाद पता चला है कि ट्रंप ने उन चंद मिनटों में सबसे बड़ा जोखिमभरा और निर्णायक फैसला लिया।
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इसके तहत उन्होंने सुलेमानी के खात्मे की योजना को मंजूरी दी। यह कार्रवाई ऐसे वक्त में हुई है जब ट्रंप पर महाभियोग प्रस्ताव के बाद उन पर सीनेट में ट्रायल चलने वाला है। विरोधी और राजनीतिक विश्लेषक इस ऑपरेशन की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर रहे हैं लेकिन ट्रंप के सलाहकारों ने इस बात को खारिज किया है।
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ट्रंप के नजदीकियों का कहना है कि अमेरिकी ठेकेदार पर रॉकेट हमले के बाद ट्रंप नाराज थे। इस बीच, बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर ईरानी समर्थकों की तोड़फोड़, सीरिया, इराक और लेबनान में दूतावासों और सैन्यकर्मियों पर खतरे के मद्देनजर ट्रंप प्रशासन ने सुलेमानी को निशाना बनाने की तैयारी शुरू दी।
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इस बीच पता चला कि सुलेमानी सीरिया की राजधानी दमास्कस में हमले की योजना बना रहा था। इस ऑपरेशन की जानकारी ट्रंप के अलावा विदेश मंत्री माइक पोम्पियो, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रायन, रक्षामंत्री मार्क टी एस्पर, सीआईए निदेशक गिना हस्पेल, व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ माइक मुलवॉनी और राष्ट्रपति विधायी लायजन एरिक यूलैंड को ही थी।

बुश और ओबामा पर निशाना 
सुलेमानी इराक में 2003 से अमेरिकियों को मार रहा था। पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बराक ओबामा भी सुलेमानी से वाकिफ थे लेकिन उसका खात्मा नहीं किया। बुश प्रशासन ने सुलेमानी को न मारने का निर्णय लिया था। वहीं, ओबामा ने खुले तौर पर कभी ऐसा प्रयास नहीं किया। दरअसल, दोनों का मानना था कि ताकतवर सुलेमानी को मारने से ईरान के साथ लड़ाई बढ़ जाएगी। इसके बावजूद ट्रंप ने जोखिम लिया। ट्रंप ने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों की ओर इशारा कर ट्वीट किया कि सुलेमानी को सालों पहले मार दिया जाना चाहिए था।

आखिर इसी समय क्यों हुई कार्रवाई

सुलेमानी लादेन या बगदादी की तरह छिपा नहीं था। कई देशों का दौरा करता था। ऐसे में उसे मारने के लिए ड्रोन हमले की जरूरत क्यों पड़ी? एक पूर्व अमेरिकी सैन्य कमांडर के मुताबिक सुलेमानी को लगता था कि उसे कोई छूने वाला नहीं।

वह अमेरिका को चिढ़ाते हुए इराक में बैटल ग्राउंड से सेल्फी पोस्ट करता था। वहीं, अमेरिका अपने तेल टैंकरों पर हमले के बाद ईरान को सख्त धमकियां देता रहा था लेकिन सेना के इस्तेमाल की बात नकार दी थी। ट्रंप ने पहले यह दिखाया कि वह युद्ध नहीं चाहते। हालांकि बदले हालत में ड्रोन हमले को मंजूरी दी।

अंतिम समय में बनी बड़े हमले की रणनीति

इस ऑपरेशन की रणनीति किरकुक (इराक) में अमेरिकी ठेकेदार पर रॉकेट हमले के बाद बनना शुरू हुई। सैन्य विशेष ऑपरेशन कमांड ने सुलेमानी को निशाना बनाने की योजना बनाई। सैन्य और खुफिया अधिकारियों ने गुप्त सूचनाओं, इलेक्ट्रॉनिक इंटसेप्ट्स, टोही विमानों और अन्य सर्विलांस टूल्स के जरिए हमले का स्वरूप तय किया।

सुलेमानी के बगदाद हवाई अड्डे पर पहुंचने पर हमले का समय तय हुआ। हालांकि अगर उस दौरान उसके साथ इराकी अधिकारी होते तो हमला रोक दिया जाता। बृहस्पतिवार तक अमेरिकी सैन्य अधिकारी कम तीव्रता के हमले की तैयारी में थे, लेकिन ट्रंप ने बड़े हमले को मंजूरी दी। ट्रंप के सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट सीओ ब्रायन ने बताया कि राष्ट्रपति ने हमले पर स्पष्ट और तीव्र निर्णय लिया।

कांग्रेस एक्ट-2002 के तहत हुआ हमला

हमले को अमेरिकी कांग्रेस के एक्ट-2002 के तहत अंजाम दिया गया। इसके तहत अमेरिकी सेना को इराक में घुसने की इजाजत मिली थी। हमला इसलिए विशेष था क्योंकि सुलेमानी एक देश के शीर्ष अधिकारी थे। 1970 के बाद अमेरिका ने ऐसे लोगों की हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि देश के लिए खतरा साबित होने वाले लोगों और आतंकवाद जैसे मामलों में ढिलाई दी गई थी, जिसका इस्तेमाल सुलेमानी ही हत्या में हुआ।

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