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IMEC: 'सभ्यताओं के बीच एक सेतु है भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा'; दुबई में बोले पूर्व राष्ट्रपति कोविंद

Sat, 26 Apr 2025 10:08 PM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 26 Apr 2025 10:08 PM IST
सार

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आईएमईसी वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को साकार करता है। इस मार्ग से भारत से यूरोप को माल भेजने में 40 प्रतिशत कम समय और लागत में 30 प्रतिशत की कमी आएगी।  

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Former president Ram nath Kovind calls IMEC bridge between civilisations
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।

विस्तार

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) को न केवल एक व्यापार मार्ग, बल्कि सभ्यताओं के बीच एक पुल बताया है। वे दुबई में आयोजिक एससीएम मध्य पूर्व सम्मेलन और पुरस्कार 2025 को संबोधित कर रहे थे। इसमें कोविंद ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया एक-दूसरे से जुड़ती जा रही है, इस तरह की साझेदारियां न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं, बल्कि हमें उद्देश्य और प्रगति में भी एकजुट करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत, जिसे कभी एक विकासशील देश के रूप में देखा जाता था, अब वैश्विक विकास इंजन के रूप में खड़ा है। हम प्रौद्योगिकी, कूटनीति और नवाचार में अग्रणी है। 

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उन्होंने कहा कि आईएमईसी वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को साकार करता है। इस मार्ग से भारत से यूरोप को माल भेजने में 40 प्रतिशत कम समय और लागत में 30 प्रतिशत की कमी आएगी। उन्होंने कहा, यह न केवल व्यापारिक दक्षता में क्रांति लाएगा बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाएगा।

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इस मौके पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अर्थव्यवस्था मंत्रालय के अवर सचिव अब्दुल्ला अहमद अल सालेह ने भी अपना संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि उनका देश व्यापार में दक्षता और स्थिरता लाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ब्लॉकचेन और स्वचालन तकनीकों का भरपूर उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा, हमारा रिकॉर्ड तोड़ 815 अरब डॉलर का गैर-तेल व्यापार इस बात का प्रमाण है कि हम तकनीक के माध्यम से कैसे एक समावेशी विकास मॉडल बना रहे हैं। सालेह ने कहा कि आईएमईसी परियोजना यूएई और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे क्षेत्र की समृद्धि में योगदान देगा।
 

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आईएमईसी स्वेज नहर का पूरक है न कि प्रतिस्पर्धी : मीनाक्षी लेखी
वहीं, पूर्व विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा, आईएमईसी को स्वेज नहर के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसके पूरक के तौर पर देखा जाना चाहिए। जिस प्रकार एक इमारत में मुख्य द्वार के साथ-साथ आपातकालीन निकास की व्यवस्था होती है, उसी प्रकार आईएमईसी वैश्विक व्यापार के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षित विकल्प प्रदान करता है। लेखी ने बताया कि यह बहु-परिवहन नेटवर्क सड़क, रेल और समुद्री मार्गों को एक साथ जोड़कर न केवल तेज और सस्ती बल्कि अधिक सुरक्षित आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करेगा।
 

400 से अधिक उद्योग नेताओं, नीति निर्माताओं ने लिया भाग
दो दिवसीय इस सम्मेलन में भारत, यूएई और यूरोप के 400 से अधिक उद्योग नेताओं, नीति निर्माताओं और निवेशकों ने भाग लिया। इस दौरान वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की चुनौतियों और अवसरों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि आईएमईसी जैसी परियोजनाएं न केवल व्यापारिक दक्षता बढ़ाएंगी बल्कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मददगार साबित होंगी।

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