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यूरोपियन यूनियन से बिगड़े रिश्तों के बीच चीन क्यों आए चार यूरोपीय देशों के विदेश मंत्री?

Sat, 29 May 2021 04:47 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 29 May 2021 04:47 PM IST
सार

पर्यवेक्षकों का कहना है कि जब ईयू के साथ रिश्ते खराब हो गए, तब चीन ने ईयू के सदस्य देशों के साथ अलग-अलग रिश्ते बनाने की शुरुआत की। उसके लिए किए गए संपर्कों के दौरान द्विपक्षीय सहयोग और सौदों पर जोर दिया गया...

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foreign ministers of four European countries come to China amid deteriorating relations with the European Union
;चीन - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सदस्य चार देशों के विदेश मंत्रियों की एक साथ हो रही बीजिंग यात्रा को चीन अपने लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है। इस यात्रा का कार्यक्रम ईयू और चीन के बीच व्यापक निवेश समझौते पर विराम लग जाने के बाद बना। समझौता पिछले 31 दिसंबर को हुआ था, लेकिन उसके बाद चीन और यूरोपीय देशों के संबंध बिगड़ते चले गए। उसके बाद इसी महीने यूरोपीय संसद ने उस समझौते पर विराम लगाने के पक्ष में मतदान किया। यूरोप में पिछले हफ्ते चीन को एक और झटका लगा, जब लिथुआनिया ने ‘17+1’ एक ग्रुप से निकलने का एलान कर दिया। ये ग्रुप ईयू मंच से अलग चीन से संबंध बनाने के लिए बनाया गया था।

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लेकिन शनिवार को पोलैंड, सर्बिया, आयरलैंड और हंगरी के विदेश मंत्री बीजिंग यात्रा पर पहुंचे। उनकी यहां चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत होगी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने शुक्रवार को कहा- ‘ये चारों देश यूरोप में चीन के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। इन देशों ने लंबे समय से चीन के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखे हैं।’ उन्होंने बताया कि चारों देशों के विदेश मंत्री यहां द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सहयोग और चीन-ईयू संबंधों पर बातचीत करेंगे। झाओ ने कहा- चीन को उम्मीद है कि चारों विदेश मंत्रियों की यात्रा से राजनीतिक भरोसे और व्यावहारिक सहयोग का वातावरण बनेगा।
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गौरतलब है कि चीन और ईयू के संबंध पिछले मार्च से तेजी से बिगड़ने लगे। मार्च में ईयू ने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ साझा कदम उठाते हुए चार चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिए। उन अधिकारियों पर चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों के मानव अधिकारों के हनन का आरोप लगाया गया था। चीन ने इसका कड़ा जवाब दिया। उसने ईयू के दस नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिए, जिनमें पांच यूरोपीय संसद के सदस्य भी शामिल थे। इससे बिगड़े माहौल के बीच यूरोपीय संसद ने चीन-ईयू व्यापक निवेश समझौते पर विराम लगा दिया।
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पर्यवेक्षकों का कहना है कि जब ईयू के साथ रिश्ते खराब हो गए, तब चीन ने ईयू के सदस्य देशों के साथ अलग-अलग रिश्ते बनाने की शुरुआत की। उसके लिए किए गए संपर्कों के दौरान द्विपक्षीय सहयोग और सौदों पर जोर दिया गया। चीन की फुदान यूनिवर्सिटी में यूरोपीय अध्ययन केंद्र के निदेशक डिंग चुन के मुताबिक ईयू से तनाव के बावजूद अगर चीन ने चार देशों के विदेश मंत्रियों को आमंत्रित किया, तो उसमें कोई हैरत की बात नहीं है।

उन्होंने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘ये यात्राएं दिखाती हैं कि चीन चुपचाप बैठ कर इंतजार नहीं कर रहा है। वह यूरोप के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय है। इनमें हंगरी भी है जिसके साथ चीन के दोस्ताना रिश्ते हैं, और पोलैंड भी है जिसके साथ चीन के संबंध अधिक नाजुक हैं। इन यात्राओं से चीन के यूरोपीय देशों के साथ बहुआयामी और जटिल रिश्तों की झलक मिलती है।’ डिंग ने कहा- ‘चीन और ईयू के बीच बेशक मतभेद हैं, यहां तक कि एक दूसरे खिलाफ उग्र भावनाएं भी हैं, लेकिन आप देख सकते हैं कि व्यापक निवेश समझौते पर भी विराम लगाया गया है, उससे पूरी तरह रद्द नहीं किया गया है।’


फुदान यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के शोधकर्ता सोंग लुझेंग ने कहा कि चीन ने इन चारों विदेश मंत्रियो को दो वजहों से बुलाया। एक तो इसका मकसद चीन को अलग-थलग करने के अमेरिकी प्रयासों का जवाब देना है। दूसरा वह यूरोप में मौजूद चीन विरोधी भावनाओं के बीच चीन उन चारों देशों से चाहता है कि वे वहां चीन का पक्ष रखें।

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