दावा: तुर्किये की चेतावनी पर EU ने जताई नाराजगी; क्या है ग्रीस-साइप्रस-इस्राइल केबल लिंक परियोजना पर विवाद?
साइप्रस के राष्ट्रपति ने दावा किया कि यूरोपीय संघ ने तुर्किये की उस चेतावनी पर नाराजगी जताई है जिसमें उसने ग्रीस और साइप्रस के बीच बिजली केबल परियोजना में बाधा डालने की बात कही थी। यह परियोजना यूरोप, साइप्रस और इस्राइल के लिए रणनीतिक रूप से अहम है और इससे उन्हें ऊर्जा संकट में राहत मिलने की उम्मीद है।
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यूरोपीय संघ (ईयू) ने तुर्किये की इस चेतावनी को लेकर गहरी नाराजगी जताई है कि वह ग्रीस और साइप्रस के बीच बिजली केबल लिंक को स्थापित करने में बाधा डालने की कोशिश करेगा। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलिडेस ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तुर्किये के अधिकारियों के साथ वार्ता में ईयू का आक्रोश साफ तौर पर दिखा। इस वार्ता में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और भूमध्यसागर मामलों की आयुक्त डबरावका सुइका भी शामिल थीं।
ईयू ने परियोजना में किया है करीब 800 मिलियन यूरो का निवेश
ईयू ने 'ग्रेट सीज इंटरकनेक्टर' (जीएसआई) नामक परियोजना में करीब 800 मिलियन यूरो (908 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश किया है, जो ग्रीस और साइप्रस को जोड़ने के साथ-साथ भविष्य में इस्राइल के पावर ग्रिड से भी जुड़ जाएगा। यह केबल ग्रीस से इस्राइल तक कुल 1,208 किलोमीटर लंबी होगी।
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तुर्किये ने कहा- परियोजना उकसाने वाली
मीडिया रिपोर्ट में तुर्किये के रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इस केबल को बिना तुर्किये की सहमति के स्थापित नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह तुर्किये के दावे वाले पानी से होकर गुजरता है। तुर्किये के अधिकारियों ने इसे 'उकसाने' वाली परियोजना करार दिया है, क्योंकि इसके जरिए तुर्किये और तुर्किये-नियंत्रित उत्तरी साइप्रस के अधिकारियों की अनदेखी की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि तुर्किये किसी भी काम पर प्रतिक्रिया देगा, जैसाकि उन्होंने अतीत में किया है।
हालांकि, तुर्किये ने विस्तार से नहीं बताया कि उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी। लेकिन खबरों में बताया गया है कि तुर्किये के युद्धपोत ग्रीस के काकोस और करपाथोस द्वीपों के पास पानी में केबल के मार्क का सर्वेक्षण कर रहे जहाजों के काम में रुकावट डालेंगे।
ग्रीस ने कहा- परियोजना का काम जारी रहेगा
वहीं, ग्रीस के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जीएसआई परियोजना का काम जारी रहेगा। ग्रीस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उनके पक्ष में है, क्योंकि उन्होंने मिस्र के साथ समुद्री सीमा समझौता किया था, जबकि तुर्किये और लीबीया के बीच हुआ समझौता ग्रीस के अनुसार कानूनी रूप से अमान्य है।
तुर्किये ने युद्धपोत भेजकर डाली थी पहले भी रुकावट
तुर्किये ने पहले भी साइप्रस के दक्षिणी तट के पास अपने युद्धपोत भेजे थे, ताकि प्राकृतिक गैस की खोज में रुकावट डाली थी। साइप्रस के राष्ट्रपति ने तुर्किये के साथ तनाव को लेकर कहा कि साइप्रस कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगा जो संघर्ष का कारण बने। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि साइप्रस सरकार अपने अधिकारों की रक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत करेगी।
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परियोजना साइप्रस और इस्राइल के लिए महत्वपूर्ण
जीएसआई परियोजना खासतौर पर साइप्रस और इस्राइल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह इन दोनों देशों को उर्जा संकट से उबारने और उपभोक्ताओं के लिए उर्जा लागत को कम करने में मदद करेगी।
अभी शुरू नहीं हुआ केबल बिछाने का काम
हालांकि, ग्रीस की कंपनी 'इंडिपेंडेंट पावर ट्रांसमिशन ऑपरेटर' ने एपी से कहा, अब तक 160 किलोमीटर के इलेक्ट्रिक केबल बनाए जा चुके हैं, लेकिन केबल बिछाने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है, क्योंकि ग्रीस के क्रीट द्वीप और साइप्रस के बीच केबल के अंतिम मार्ग का सर्वेक्षण जारी है। कंपनी ने यह भी कहा कि साइप्रस-इस्राइल केबल लिंक परियोजना का तकनीकी और कानूनी स्तर पर काम आगे बढ़ रहा है और इस परियोजना की और जानकारी गर्मियों के बाद दी जाएगी।
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