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अमेरिका: नासा ने सोलर ऑर्बिटर किया लॉन्च, सूर्य के ध्रुवों की भेजेगा तस्वीरें, सुलझेगी कई गुत्थी

Mon, 10 Feb 2020 11:56 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, वॉशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Mon, 10 Feb 2020 11:56 AM IST
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ESA and NASA Solar Orbiter launches from Florida journey to the source of all light on Earth and Sun
ESA and NASA Solar Orbiter launched - फोटो : NASA

उर्जा के स्रोतों के अध्ययन के लिए सोमवार को नासा ने यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के साथ मिलकर सोलर ऑर्बिटर मिशन लॉन्च किया। भारतीय समयानुसार इसे सोमवार सुबह 9:33 बजे फ्लोरिडा स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया।

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इस दो टन वजनी अंतरिक्ष यान को यूनाइटेड लॉन्च अलायंस एटलस वी रॉकेट पर केप कैनावेरल से लॉन्च किया गया। सोलर ऑर्बिटर सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव की तस्वीरों को कैद करने के लिए ऑर्बिटर एक्लिप्टिक प्लेन से बाहर निकलेगा। इसे अंतरिक्ष की कक्षा में जो सूर्य के भूमध्य रेखा के साथ मोटे तौर पर जुड़ा हुआ है, इसके माध्य में ग्रह की कक्षा में स्थापित किया जाएगा। पृथ्वी और शुक्र की कक्षा से ऊपर उठकर यह अंतरिक्ष में यह इस तरह स्थापित होगा कि सूर्य के दोनों ध्रुवों का नजारा दिखाई दे सके। इसके लिए इसे 24 डिग्री तक घुमाया जाएगा।
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वहां, सोलर ऑर्बिटर सूर्य के बारे में बुनियादी सवालों के जवाब देने की कोशिश करेगा। ये सवाल हैं - सौर हवा कैसे चलती हैं, क्या सूर्य से लगातार उड़ने वाले आवेशित कण सौर वायु को प्रेरित करता है? या सूर्य के अंदर मंथन से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है? सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र हमारे तारे के वर्चस्व वाले अंतरिक्ष के विशाल बुलबुले को कैसे आकार देता है? 
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मैड्रिड में यूरोपीय अंतरिक्ष खगोल विज्ञान केंद्र में यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के डिप्टी प्रोजेक्ट वैज्ञानिक यानिस जोगनेलिस ने कहा कि ये सवाल नया नहीं है कि हम अभी भी तारों के बारे में मूलभूत बातों को नहीं समझते हैं। इन रहस्यों को सुलझाने से पहले वैज्ञानिक बेहतर तरीके से यह समझना चाहते हैं कि सूर्य अंतरिक्ष के मौसम को कैसे आकार देता है। अंतरिक्ष में जो स्थितियां हैं वह अंतरिक्ष यात्रियों, उपग्रहों और रेडियो और जीपीएस जैसी रोजमर्रा की तकनीक को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।

उन्होंने बताया कि अगले सात साल में सोलर ऑर्बिटर करीब 4 करोड़ 18 लाख किलोमीटर (260 लाख मिलियन मील) की दूरी तय करेगा। जो पृथ्वी से तारे की दूरी लगभग दो-तिहाई है। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंट्रेअन ग्रीनबेल्ट मैरीलैंड में डिप्टी प्रोजेक्ट वैज्ञानिक टेरेसा निक्स-चिंचिला के मुताबिक हम नहीं जानते कि हम क्या देखने जा रहे हैं। लेकिन अगले कुछ वर्षों में सूर्य के बारे में हमारा दृष्टिकोण बहुत कुछ बदलने वाला है।


सूर्य की झुलसा देने वाली गर्मी को सहने में ऑर्बिटर को सक्षम बनाने लिए एक खास हीट शील्ड तैयार की गई है जिसमें कैल्शियम फॉस्फेट की काली कोटिंग की गई है। यह कोटिंग लकड़ी के कोयले के चूरे की तरह होती है, जिसे हजारों साल पहले गुफाओं में चित्र बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था। नासा ने कहा कि अंतरिक्ष यान के टेलीस्कोप हीट शील्ड के आर-पार देख सकें, इसके लिए खास इंतजाम किए गए हैं।



हीट शील्ड करीब 1,000 डिग्री फारेनहाइट तापमान से ऑर्बिटर को सामने से सुरक्षित रखेगा। जबकि इसके पीछे लगे उपकरणों को गर्मी से नुकसान नहीं पहुंचे, इसके लिए ऐसी व्यवस्था की गई है कि शील्ड के पीछे का तापमान माइनस 4 फारेनहाइट और 122 फारेनहाइट के बीच रहेगा।

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