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केनेडी सेंटर नवीनीकरण मामला: नाम हटाने के आदेश पर फूटा राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा, जज पर लगाया पक्षपात का आरोप

Sun, 31 May 2026 02:06 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 31 May 2026 02:06 AM IST
सार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केनेडी सेंटर के मरम्मत काम को रोकने के अदालती फैसले पर भारी नाराजगी जताई है। उन्होंने जज को पक्षपाती बताते हुए अब इस पूरे कला केंद्र की जिम्मेदारी वापस अमेरिकी संसद को सौंपने की बात कही है। क्या है पूरा मामला? जानिए...
 

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Donald Trump fumes over kennedy center court ruling and legal setbacks
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार को एक बार फिर अदालत पर भड़क उठे। उन्होंने संघीय न्यायाधीश को ट्रंप विरोधी और नफरत करने वाला बताया। इस न्यायाधीश ने केनेडी सेंटर के मरम्मत काम पर रोक लगा दी है। ट्रंप ने कहा कि देश का यह बड़ा कला केंद्र अब जल्द ही बंद हो जाएगा। उन्होंने डर जताया कि यह केंद्र शायद फिर कभी नहीं खुलेगा। ट्रंप इस केंद्र को दो साल के लिए पूरी तरह बंद करना चाहते थे।
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न्यायाधीश के फैसले से ट्रंप नाराज
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट लिखी। उन्होंने जिला न्यायाधीश क्रिस्टोफर कूपर के फैसले पर बहुत गुस्सा जताया। न्यायाधीश कूपर ने केंद्र से ट्रंप का नाम हटाने का भी आदेश दिया है। इस फैसले से ट्रंप बेहद परेशान दिखे। उन्होंने कहा कि उनके साथ कभी निष्पक्ष व्यवहार नहीं हो सकता।
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प्रोजेक्ट से पीछे हटने का फैसला
ट्रंप ने कहा कि इस ऐतिहासिक इमारत को मरम्मत की बहुत जरूरत थी। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह आगे कोर्ट में लड़ेंगे या नहीं। फैसले के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने बड़ा एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अब इस काम से पीछे हट रहे हैं। वह इस केंद्र का पूरा जिम्मा वापस कांग्रेस को सौंप रहे हैं। ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने से पहले तक इसे 'जॉन एफ. केनेडी सेंटर' के नाम से ही जाना जाता था। व्हाइट हाउस ने अभी यह नहीं बताया है कि ट्रंप बोर्ड के अध्यक्ष पद पर रहेंगे या नहीं।
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जज के परिवार पर उठाए सवाल
ट्रंप ने बिना किसी सबूत के इस फैसले के लिए न्यायाधीश की पत्नी एमी जेफ्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने बताया कि जेफ्रेस एक बड़ी वकील हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल में सरकारी सलाहकार थीं। न्यायाधीश कूपर को भी ओबामा ने ही नियुक्त किया था। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि जेफ्रेस की कंपनी पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन का केस लड़ रही है।


नाम बदलने पर था कानूनी विवाद
ट्रंप का दावा है कि 1971 में बनी यह इमारत बहुत पुरानी हो चुकी है। इसमें जंग लग चुका है और चूहे-कीड़े भर गए हैं। उनका कहना था कि नई इमारत बहुत शानदार बनती। इसके विपरीत, न्यायाधीश कूपर ने कहा कि बोर्ड ने बिना सोचे-समझे केंद्र को बंद करने का फैसला लिया था। प्रशासन जुलाई से काम शुरू करने वाला था, जिस पर अब कोर्ट ने रोक लगा दी है।

जज ने कहा कि बोर्ड को केंद्र का नाम बदलने का कोई अधिकार नहीं था। यह अधिकार सिर्फ देश की संसद के पास है। कोर्ट ने दो हफ्ते के अंदर ट्रंप का नाम हटाने को कहा है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने खुद अपना नाम नहीं जुड़वाया था, बल्कि बोर्ड ने ही संस्था को बचाने के लिए ऐसा किया था। जनवरी 2025 में दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने पुराना बोर्ड हटाकर खुद को इसका अध्यक्ष बनाया था। यह पूरा मामला कांग्रेस सदस्य जॉयस बीटी की शिकायत के बाद सामने आया।
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