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ग्रीन कार्ड पर US ने दी राहत: सभी प्रवासियों को देश छोड़ने की नहीं होगी जरूरत, H-1B वीजाधारकों को मिलेगा लाभ

Sun, 31 May 2026 12:01 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Pavan Updated Sun, 31 May 2026 12:01 AM IST
सार

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले सभी प्रवासियों को अपने देश लौटना नहीं होगा। डीएचएस के अनुसार, यह कोई नया नियम नहीं बल्कि अधिकारियों के विवेकाधिकार की याद दिलाने वाला निर्देश है। भारतीय H-1B वीजाधारकों समेत लाखों प्रवासियों के लिए इससे कुछ राहत मिली है।

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US Department of Homeland Security: Not all immigrants will have to leave US to seek green cards: Report
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका ने ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) के लिए आवेदन करने वाले लाखों प्रवासियों को बड़ी राहत दी है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन कार्ड पाने के इच्छुक सभी लोगों को आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक अपने मूल देश लौटने की जरूरत नहीं होगी। दरअसल, हाल ही में अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के एक मेमो को लेकर यह आशंका पैदा हो गई थी कि अमेरिका में रह रहे लोग यदि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करेंगे तो उन्हें अपने देश वापस जाकर वहीं इंतजार करना होगा। इस खबर के बाद प्रवासी समुदाय, खासकर भारतीयों में चिंता बढ़ गई थी। हालांकि अब डीएचएस ने कहा है कि 22 मई को जारी किया गया मेमो कोई नया नियम या व्यापक नीति परिवर्तन नहीं है। विभाग के अनुसार यह केवल अधिकारियों को उनके विवेकाधिकार की याद दिलाने के लिए जारी किया गया था, जो पहले से ही मौजूद है। इसका मतलब है कि हर मामले का फैसला अलग-अलग परिस्थितियों को देखते हुए किया जाएगा।
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डीएचएस के प्रवक्ता ने बताया कि यह निर्णय संबंधित आव्रजन अधिकारी पर निर्भर करेगा कि किसी व्यक्ति को ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के दौरान अमेरिका में रहने दिया जाए या उसे विदेश जाकर प्रक्रिया पूरी करने को कहा जाए। विशेष रूप से वीजा अवधि से अधिक समय तक अमेरिका में रहने वाले लोगों या कुछ विशेष श्रेणी के मामलों में यह नियम लागू हो सकता है। हालांकि सरकार के इस स्पष्टीकरण के बावजूद आव्रजन कानून विशेषज्ञ अभी भी इंतजार करो और देखो की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक इस नीति के व्यावहारिक प्रभाव और विस्तृत दिशा-निर्देश सामने नहीं आते, तब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।
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अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा है कि यह कदम केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए उठाया गया था, न कि आव्रजन नीति में किसी बड़े बदलाव के लिए। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में लगभग 14 लाख लोगों को ग्रीन कार्ड मिला था। इनमें से 8.2 लाख से अधिक लोगों को अमेरिका के भीतर ही 'एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस' प्रक्रिया के जरिए स्थायी निवास की मंजूरी मिली थी। पिछले दो दशकों में हर साल औसतन पांच लाख से अधिक लोगों को इसी प्रक्रिया के माध्यम से ग्रीन कार्ड प्राप्त हुआ है।


इस मुद्दे का भारतीय समुदाय पर भी बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। अनुमान के अनुसार हर साल 30,000 से अधिक भारतीय H-1B वीजा धारक ग्रीन कार्ड की पात्रता प्राप्त करते हैं। भारतीय मूल के लोगों के संगठन इंडियासपोरा के कार्यकारी निदेशक संजीव जोशीपुरा का कहना है कि भारतीय मूल के प्रवासी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोग अमेरिका की आबादी का केवल 1.5 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल कर राजस्व में उनका योगदान लगभग 6 प्रतिशत है। अमेरिका के करीब 60 प्रतिशत होटल भी भारतीय प्रवासियों के स्वामित्व में हैं, जिससे लगभग 40 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।

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संजीव जोशीपुरा ने चेतावनी दी कि यदि ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को अधिक जटिल बनाया गया तो इससे उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों और उनके परिवारों का अमेरिका में बसने का उत्साह कम हो सकता है। वहीं, डेमोक्रेट सांसदों और आव्रजन विशेषज्ञों ने पहले ही इस प्रस्तावित व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे परिवारों के अलग होने, अतिरिक्त खर्च बढ़ने और प्रशासनिक अव्यवस्था जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। फिलहाल अमेरिकी सरकार के नए स्पष्टीकरण से प्रवासी समुदाय को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन अंतिम स्थिति आने वाले समय में नीति के वास्तविक क्रियान्वयन के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
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