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Hindi News ›   World ›   demand in Nepal, soldiers in Gorkha Rifles should not go back in Indian Army

नेपाल में उठने लगी मांग, गोरखा राइफल्स में शामिल सैनिक वापस न जाएं

Wed, 24 Jun 2020 07:43 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 24 Jun 2020 07:43 PM IST
सार

  • सरकार से अपील, गोरखाओं को नेपाल में ही दें रोजगार, भारतीय सेना में न भेजें
  • भारतीय सेना पर नेपाल का आरोप, गोरखाओं का इस्तेमाल चीन के खिलाफ करने की कोशिश
  • नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में न जाने देने की मुहिम हुई तेज, एनसीपी के एक गुट ने की मांग 
  • गोरखा सैनिकों का गौरवशाली है इतिहास, 1815 से भारतीय सेना का हिस्सा

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demand in Nepal, soldiers in Gorkha Rifles should not go back in Indian Army
gorkha regiment - फोटो : PTI (File)

विस्तार

भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट से जुड़े नेपाली गोरखाओं को फिर से वापस न जाने को लेकर नेपाल में मुहिम तेज हो गई है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के एक गुट ने बयान जारी करके कहा है कि नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में शामिल नहीं होना चाहिए।

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भारत इन गोरखाओं को चीन के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल करता है जो नेपाल के लिए उचित नहीं है। ये कहा जा रहा है कि नेपाल के लिए भारत और चीन दोनों से ही अच्छे रिश्ते हैं, ऐसे में हमारे गोरखा नागरिकों का इस्तेमाल भला भारत चीन के खिलाफ क्यों करे।

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हाल ही में कोरोना काल के दौरान हजारों गोरखा सैनिक वापस अपने-अपने घर नेपाल आए हैं और भारतीय सेना की तरफ से उन तमाम गोरखा सैनिकों के पास ये आदेश आया है कि वो तत्काल वापस आएं और ड्यूटी करें।
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नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेत्र बिक्रम चंद गुट ने एक बयान जारी कर कहा है गलवां घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद भारतीय सेना गोरखा रेजिमेंट के हमारे जवानों को चीन के खिलाफ लड़ाई में उतारना चाहती है।

उन्होंने कहा है कि नेपाल एक आजाद देश है और यहां के नागरिक अगर किसी देश की सेना में काम करते हैं, तो उनका इस्तेमाल ऐसे किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होना चाहिए, जिससे हमारे रिश्ते अच्छे हों। भारत और चीन दोनो से ही नेपाल के लिए अहम हैं और हमें इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।  

बयान में कहा गया है कि ये हमारे लिए शर्म की बात है कि हमारे लोग महज एक सदियों पुराने समझौते की वजह से किसी और देश की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि नेपाली नागरिकों और गोरखाओं को भारत की सेना में काम करने पर रोक लगाई जाए और उनके लिए अपने देश में रोजगार के मौके उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने नेपाली युवाओं से अपील की है कि वो भारतीय सेना में नौकरी की कोशिश न करें।

जाहिर है, कि इन सारे विवाद की जड़ भारतीय सेना प्रमुख का मई में दिया गया वह बयान है, जिसमें नेपाल की ओर से लिपुलेख और कालापानी पर दावा जताने की कोशिश को किसी और देश के इशारे पर करने का आरोप लगाया गया था।

नेपाल पर ये आरोप लगता रहा है कि उसने अपने नक्शे में जो बदलाव किए हैं और भारत विरोधी उसका जो रुख नजर आ रहा है, वह कहीं न कहीं चीन इशारे पर है।

इसे लेकर नेपाल में खासी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। यहां तक कि नेपाल के रक्षा मंत्री ईश्वर पोखरेल ने भी साफ कहा था कि ऐसा कहकर नेपाल के इतिहास का अपमान किया गया है।

साथ ही ये भी कहा गया था कि इससे भारतीय सेना में काम करने वाले नेपाली गोरखाओं का मनोबल गिरेगा। भारत को गोरखाओं की बहादुरी और देश की रक्षा के लिए लगातार की गई कुर्बानियों को नहीं भूलना चाहिए।

नेपाल में इसके बाद से लगातार ये मुद्दा गरम है और गोरखा रेजीमेंट में काम करने वाले नेपाली नागरिकों और युवाओं को लेकर ये मांग उठ रही है कि उन्हें अपने देश में ही रोजगार दिया जाए, न कि भारत की रक्षा में लगाया जाए।

बहुत पुराना है गोरखा रेजिमेंट का इतिहास

गोरखा राइफल्स भारतीय सेना का एक अहम हिस्सा है और ये एक गोरखा इंफेंट्री रेजिमेंट है, जिसमें नेपाली मूल के गोरखा सैनिक शामिल हैं। 1815 में ब्रिटिश सेना ने भारतीय सेना के एक हिस्से के तौर पर इसका गठन किया था और प्रथम जॉर्ज पंचम ने अपनी गोरखा राइफल्स के नाम से अपना लिया था।



बाद में 1950 में 1 गोरखा राइफल्स के नाम से ये भारतीय सेना का अहम अंग बन गया और इसका इस्तेमाल आजादी के बाद के तमाम औपनिवेशिक युद्ध के दौरान होता रहा।

पाकिस्तान के खिलाफ 1965 और 1971 की जंग में भी गोरखा राइफल्स के जवानों की अहम भूमिका रही। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। गोरखा रेजिमेंट को परमवीर चक्र, महावीर चक्र समेत तमाम शौर्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

गोरखा राइफल्स में करीब 80 हजार नेपाली गोरखा सैनिक शामिल हैं। हर साल 1200 से 1300 नए गोरखा सैनिक हमारी सेना में शामिल किए जाते हैं।

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