विचित्र समस्या : कोरोना को मात देने के बाद पारोस्मिया, खाने में महसूस होती है बदबू
- पारोस्मिया और फैंटोस्मिया की तकलीफ से मुश्किल में पड़ गई जिंदगी
- रोग की चपेट में आने वालों को ऐसी खुशबू महसूस होती है जो है नहीं
- मुश्किल : स्वाद और सूंघने की विचित्र तकलीफ से लोग हो रहे परेशान
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कोरोना को मात देने वाले लोगों को स्वाद और सूंघने की अजीब और विचित्र सी समस्या से जूझना पड़ रहा है। हैरानी की बात ये है कि लोगों को खाने का स्वाद और महक केमिकल और सड़न जैसा महसूस हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना को मात देने वाले मरीजों में इस तरह की स्थिति को डॉक्टरी भाषा में पारोस्मिया कहते हैं। इसमें सूंघने की क्षमता अलग ढंग से प्रभावित होती है, व्यक्ति वो महसूस नहीं कर पाता है जो उस चीज की सुगंध या दुर्गंध है। कुछ लोगों को हर चीज से एक अलग या विचित्र तरह की महक महसूस होती है जबकि वैसा होता नहीं है। इस रोग को फैंटोस्मिया कहते हैं।
आखिर ऐसी तकलीफ क्यों हो रही...
बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रो. विजयनाथ मिश्रा बताते हैं कि पारोस्मिया का एक कारण कोल्ड या वायरस के कारण ओल्फक्ट्री (सूंघने की क्षमता) का क्षतिग्रस्त होना है। श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में संक्रमण के कारण ओलफैक्ट्री न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त होते हैं। बुजुर्गों में ये तकलीफ ज्यादा होती है। सिगरेट पीने वाले लोगों को भी इस तरह की तकलीफ होती है, कोरोना महामारी में ये तकलीफ एक लक्षण बन गई है।
सूंघने की क्षमता लौटने में समय
कोरोना से स्वाद और सूंघने की क्षमता प्रभावित होने का दावा करने वाले ब्रिटिश राइनोलॉजिकल सोसाइटी के प्रो. क्लेयर हॉपकिन्स का कहना है कि कोरोना के कारण पारोस्मिया की चपेट में आने वाले स्वस्थ हो रहे हैं। सूंघने की क्षमता भी पहले की तरह वापस आ रही है पर इसमें समय लग रहा है। वे बताते हैं कि वायरस या वायरल संक्रमण के कारण मस्तिष्क का सूंघने वाला तंत्र प्रभावित होता है। इसलिए ऐसा होता है।
अचानक सिगरेट की बदबू आने लगी
न्यूजर्सी की मोनिका फ्रैंकलिन (31) अप्रैल 2020 में कोरोना की चपेट में आईं और सूंघने की क्षमता प्रभावित हो गई। दो महीने बाद उन्हें पारोस्मिया के साथ फैंटोस्मिया का पता चला। फैंटोस्मिया में व्यक्ति को ऐसी खूशबू या बदबू महसूस होती है जो वहां मौजूद किसी वस्तु या खाद्य पदार्थ में है ही नहीं। संक्रमण के दो माह बाद मोनिका को सिगरेट की बदबू महसूस होने लगी जबकि आसपास कोई सिगरेट नहीं पी रहा था।
ऐसी तकलीफ के पहले 100 कारण
फिलाडेल्फिया के मोनेल केमिकल सेंसेज सेंटर की वाइस प्रेसिडेंट नैंसी ई रॉसन का कहना है कि कोरोना महामारी से पहले पारोस्मिया के मामले बेहद कम थे। इसलिए इस ओर ध्यान नहीं दिया जाता था। महामारी के बीच इसके मामले बढ़े हैं। वे बताती हैं कि पहले इस तरह की तकलीफ के कई कारण जैसे वायरस, साइनसआईटिस, हेड ट्रॉमा, कीमोथैरेपी, पार्किन्सन और अल्जामइर जैसे रोग शामिल थे।
- केस एक
- केस दो