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वैज्ञानिकों का दावा: यूरोप में और खतरनाक रूप लेकर दूसरे देशों में पहुंचा कोरोना

Sat, 09 May 2020 05:07 AM IST
Rajeev Rai न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस Published by: Rajeev Rai Updated Sat, 09 May 2020 05:07 AM IST
सार

  • न्यू मैक्सिको में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों का दावा
  • कुछ विशेषज्ञों ने जताई ठोस सुबूत की दरकार

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Covid 19 pandemic reached Europe and other countries in dangerous form claims scientists
कोरोना वायरस - फोटो : social media

विस्तार

दुनियाभर में फैले कोरोना के ज्यादा घातक न होने के साक्ष्य कई वैज्ञानिक दे चुके हैं, लेकिन अब एक ताजा अध्ययन ने खलबली मचा दी है। इसका दावा है, वायरस शुरुआती दिनों की तुलना में अब ज्यादा खतरनाक प्रतीत हो रहा है। इसके पीछे फरवरी के दौरान यूरोप में वायरस द्वारा बदले एक रूप (म्यूटेशन) को जिम्मेदार ठहराया गया है।

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न्यू मैक्सिको की लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेटरी में हुए अध्ययन का कहना है, इस म्यूटेशन (डी614जी) के कारण ही कोरोना के प्रचार में तेजी आई और दूसरे देशों में भी खतरनाक हो गया। लिहाजा, वायरस के इस रूप पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह म्यूटेशन कोरोना के बाहरी हिस्से पर स्पाइक्स को प्रभावित करता है, जो इसे मानव श्वसन कोशिकाओं में प्रवेश करने की अनुमति देता है। यह अध्ययन अभी ऑनलाइन पोस्ट किया गया है, जिसकी वैज्ञानिक समीक्षा होनी बाकी है।
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विशेषज्ञों ने किया खारिज
रिपोर्ट सामने आते ही कई विशेषज्ञों ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने संदेह जताते हुए ज्यादा स्पष्टता की मांग की। उनका कहना है, म्यूटेशन हरेक वायरस की प्रकृति है। कोरोना भी अपवाद नहीं। पर, अन्य फ्लू वायरसों की तरह यह साफतौर पर दूसरे स्वरूप में विभाजित नहीं हुआ है। इसके पुख्ता साक्ष्य भी नहीं हैं कि इसने घातक रूप ले लिया है। कोई म्यूटेशन कई जगह सामान्य रूप से पाया जाए तो यह नहीं है कि इसकी कार्यप्रणाली ही बदल गई है।
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ठोस सुबूत की दरकार
टेंपल यूनिवर्सिटी के उद्भव-विकास जीवविज्ञानी डॉ सर्गेई पॉन्ड का कहना है, कई वायरसों द्वारा ताकतवर म्यूटेशन के जरिए अपनी पीढ़ियां बढ़ाने की बात मानी जा सकती है। लेकिन कोरोना को लेकर ऐसा स्थापित नहीं हुआ है। लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेट्री ने भी इसके संक्रामक होने के दावे के ठोस सुबूत नहीं दिए गए हैं।

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