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Coronavirus in Hong Kong: हांग कांग में इतनी सावधानी के बाद भी तीसरी लहर का डर क्यों?

Wed, 05 Aug 2020 01:22 PM IST
देव कश्यप बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Published by: देव कश्यप Updated Wed, 05 Aug 2020 01:22 PM IST
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Coronavirus in Hong Kong latest news in Hindi Why fear third wave in Hong Kong even after so much caution?
हांग कांग में कोरोना संक्रमण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI

अब तक ये माना जाता रहा है कि हांग कांग कोरोना महामारी से लड़ने में कामयाब रहा है। चीन के साथ सीमा साझा करने वाला हांग कांग अपने यहां संक्रमितों के मामले कम रखने में कामयाब रहा था। यहां के लोगों पर अमरीका, यूरोप और ब्रिटेन की तरह लॉकडाउन के कड़े नियम भी लागू नहीं किए गए। लेकिन अब हांग कांग में संक्रमण की दूसरी नहीं, बल्कि तीसरी लहर के कारण चिंता बढ़ रही है।

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सरकार ने चेतावनी दी है कि कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण यहां अस्पतालों पर काफी दवाब पड़ सकता है। हांग कांग में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला इस साल जनवरी में सामने आया था, लेकिन दूसरे देशों की तरह यहां संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े नहीं।
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मार्च में यहां संक्रमण का दूसरा दौर तब आया जब विदेश से छात्र और नागरिक लौटने लगे। संक्रमण पर काबू पाने के लिए हांग कांग ने सीमा पर नियंत्रण सख्त किया और किसी भी रास्ते दूसरे देशों के नागरिकों के आने पर पाबंदी लगा दी। साथ ही जो लोग बाहरी मुल्कों से लौटे उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रहने की हिदायत दी।
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संक्रमितों के बारे में जानकारी लेने के लिए हांग कांग में तकनीक की भी इस्तेमाल किया गया। लोगों को तकनीकी रूप से उन्नत ब्रेसलेट पहनने के लिए दिए गए ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि लोग घरों से बाहर न निकलें।

साथ ही प्रशासन ने लोगों के लिए मास्क पहनना और फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन करना अनिवार्य बना दिया। कई सप्ताह तक यहां संक्रमण के नए मामले कम ही रहे, जिसके बाद लगने लगा कि जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। लेकिन हाल में हांग कांग में लगातार नौ दिनों तक रोजाना संक्रमण के सौ से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद यहां कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को लेकर चिंता बढ़ गई है।

तीसरी लहर के लिए जिम्मेदार कौन?
यूनिवर्सिटी ऑफ हांग कांग में वायरोलॉजी के विशेषज्ञ मलिक पेयरिस कहते हैं कि "हांग कांग में स्थिति काबू में आ गई थी, ऐसे में ये पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है और परेशान करने वाला है।" वो मानते हैं कि इसके लिए व्यवस्था में दो खास कमियां जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि "इस व्यवस्था में ये खामी है कि परिवार के दूसरे सदस्यों पर किसी तरह की कोई रोक नहीं होती और वो कहीं भी आ-जा सकते हैं। पहला तो ये कि जो लोग बाहर से आए उन्हें 14 दिनों के लिए घरों में क्वारंटीन किया गया, न कि क्वारंटीन कैंप में।'' हालांकि मलिक मानते हैं कि मौजूदा स्थिति के लिए कई लोगों को टेस्टिंग और क्वारंटीन में राहत देने का सरकार का फैसला था।

हांग कांग ने समुद्र में काम करने वाले, विमान उद्योग में काम करने वाले और स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनी के कर्मचारियों समेत के करीब दो लाख लोगों को हांग कांग आने पर टेस्टिंग और क्वारंटीन में राहत देने का फैसला किया था। प्रशासन का कहना था कि सामान्य काम चालू रखने और शहर की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए ये बेहद जरूरी था। संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जोसेफ सांग कहते हैं यही राहत सबसे बड़ी खामी रही क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ा।

वो कहते हैं कि समुद्र और बंदरगाहों में काम करने वालों के लिए दूसरे देश से आए लोगों से मिलना-जुलना सामान्य था, वहीं विमान उद्योग में लगे लोगों ने सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल किया जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ा।

पहले तो सरकार यह मानने से इनकार करती रही कि संक्रमण के मामलों में आई बढ़ोतरी का नाता कुछ काम में लगे लोगों को दी गई राहत से है। हालांकि बाद में इसने स्वीकार किया कि इस बात के सबूत हैं कि लोगों का टेस्ट न करने और क्वारंटीन में राहत देने के कारण फिर से संक्रमण के मामले बढ़े। शहर प्रशासन ने इसके बाद विमान उद्योग और समुद्र में काम करने वालों पर पाबंदियां बढ़ा दी हैं, लेकिन नियमों को लागू करना मुश्किल बना हुआ है। इसी सप्ताह एक विदेशी पायलट शहर में घूमते हुए पाए गए थे। वो अपने कोरोना टेस्ट के नतीजे का इंतजार कर रहे थे।

क्वारंटीन के नियम कड़े न करने से हुई मुश्किल?
यूनिवर्सिटी ऑफ हांग कांग में संक्रामक बीमारियों के विशेषज्ञ प्रोफेसर बेन्जामिन काउलिंग कहते हैं कि हांग कांग जिस मुश्किल से गुजर रहा है वो मुश्किल परिस्थिति दूसरे देशों के सामने भी आ सकती है। उन्होंने कहा कि "ब्रिटेन में 14 दिनों के होम क्वारंटीन की व्यवस्था है और यहां पर भी संक्रमण का खतरा बढ़ने की संभावना हो सकती है। वहीं ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में 14 दिनों क व्यक्ति को होटल में क्वारंटीन किया जाता है जो बेहतर व्यवस्था है। हालांकि इस पूरे वक्त का खर्च कौन उठाता है, ये चर्चा का मुद्दा है।"

हांग कांग में क्वारंटीन को लेकर नियम कई महीनों से ही लागू हैं तो फिर जुलाई से पहले यहां संक्रमण की तीसरी लहर क्यों नहीं आई? इस बारे में वायरोलॉजी एक्सपर्ट मलिक पेयरिस कहते हैं कि जून में प्रशासन ने फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों में ढील दे दी थी।

वो कहते हैं कि "जब तक फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियम लागू रहते हैं व्यवस्था हालात से जूझ सकती है लेकिन एक बार जब इसमें ढील दे दी गई तो बाहर से आए लोगों से संक्रमण तेजी से बढ़ा। ये सभी लोगों के लिए एक सीख है। "

डॉक्टर सांग कहते हैं कि जून के आखिर तक सरकार ने सामूहिक कार्यक्रमों में 50 लोगों के शामिल होने को अनुमति दे दी। इसी दौरान फादर्स डे और हांग कांग के हस्तांतरण की सालगिरह भी थी। वो कहते हैं कि ''महीनों से फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन कर रहे लोग थक चुके थे। जब सरकार ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सब कुछ सामान्य हो रहा है तो लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मुलाकातें करने लगे। मुझे लगता है ये दुर्भाग्यपूर्ण था। यहां कई चीजें एक साथ हो रही थीं।"

पेयरिस कहते हैं कि हांग कांग के लोगों ने फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पूरी तरह पालन किया है और कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के दौरान स्वच्छता का भी पालन किया है। सरकार के मास्क पहनने को अनिवार्य बनाने से पहले ही लोग मास्क पहनना शुरू कर चुके थे। वो कहते हैं कि ''एक बार फिर शहर में फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों को लागू कर दिया गया है और असर भी दिख रहा है। उन्हें उम्मीद है कि चार से छह सप्ताह में हांग कांग में संक्रमण के मामले न के बराबर हो जाएंगे।''

हालांकि वो कहते हैं कि अभी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती विदेश से आने वाले लोगों के जरिए संक्रमण फैसले नी संभावना को रोकना है। खासकर तब जब फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों को फिर से हटा लिया जाएगा। वो कहते हैं कि ये केवल हांग कांग की मुश्किल नहीं बल्कि सभी देश आज नहीं तो कल इस मुश्किल का सामना करेंगे।

जब देश अपनी सीमा के भीतर संक्रमण के मामलों पर पूरी तरह काबू पा लेंगे तो उनके लिए बाहर आ रहे लोगों का स्थानीय समुदाय से घुलना-मिलना मुश्किल पैदा कर सकता है।

विरोध प्रदर्शनों के कारण बढे मामले?
ये माना जा सकता है कि कोरोना महामारी से हॉन्ग कॉन्ग की जंग दूसरों पर भी लागू हो सकती है, लेकिन ये शहर बीते एक साल से लगातार संघर्ष देख रहा है जो अन्य मुल्कों में नहीं है। जुलाई की एक तारीख को लोकतंत्र समर्थकों ने एक प्रदर्शन का आयोजन किया जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। प्रशासन की अनुमति के बिना ये रैली हुई और इसमें फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों का उल्लंघन हुआ।

जुलाई के मध्य में यहां विपक्ष के चुनाव थे जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। हांग कांग में कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के लिए चीनी सरकारी मीडिया ने इन दो घटनाओं को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि जानकार मानते हैं कि संक्रमण के मामलों में आई तेजी का यही कारण है ऐसे कोई सबूत अब तक नहीं मिले हैं।

प्रोफेसर काउलिंग कहते हैं कि "वैज्ञानिक चेन ऑफ ट्रांसमिशन का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं और इन दो घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों के मिलने-जुलने से मामले बढ़े हों एसे सबूत नहीं मिले हैं।" वहीं डॉक्टर पियरिस कहते हैं कि, "इन घटनाओं में संक्रमण के कुछ मामले अधिक आए होंगे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला हो।"

डॉक्टर सांग का कहना है कि "शोध से पता चला है कि संक्रमण की तीसरी लहर के लिए वायरस की जो स्ट्रेन जिम्मेदार है वो पहले के संक्रमण के लिए जिम्मेदार स्ट्रेन से अलग है।" वो कहते हैं कि वायरस की ये स्ट्रेन विदेश से आई है और विमान उद्योग से जुड़े और फिलिपींस और कजाकिस्तान में समुद्र में काम करने वालों में पाए गए वायरस का जैसा है

संक्रमण का असर हांग कांग के चुनावों पर पड़ेगा?
कयास लगाए जा रहे हैं कि हांग कांग की संसद और विधायिका के लिए होने वाले चुनावों को सरकार सितंबर के लिए आगे बढ़ा सकती है। स्थानीय मीडिया में सूत्रों के हवाले से इस तरह की खबरें छप भी रही हैं। लेकिन इस बीच विपक्ष का कहना है कि सरकार चुनाव से बचने के लिए कोरोना महामारी के बहाने का इस्तेमाल कर रही है।

हाल में हुए स्थानीय चुनावों में विपक्ष ने शानदार प्रदर्शन किया था। हालांकि लेजिस्लेटिव काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष जैस्पर सांग का कहना है कि अगर मतदान केंद्र कोरोना संक्रमण का केंद्र बन गए तो सरकार इस जिम्मेदारी से पीछा नहीं छुड़ा सकेगी। प्रोफेसर काउलिंग कहते हैं कि सरकार के फिर से फिजिकल डिस्टेन्सिंग के नियमों को लगाने के कारण संक्रमण के मामलों में कमी आई है।


वो कहते हैं कि "मुझे नहीं पता कि चुनाव बाद में कराने चाहिए या नहीं, साल भर के लिए चुनाव टाले नहीं जा सकते। स्थिति पर पूरी तरह काबू पाने तक इसे टाला जा सकता है।" वो कहते हैं कि मतदान केंद्र का सैनिटाइजेशन, लोगों को इकट्ठा न होने देने की कोशिश और मतदान से दो दिन पहले चुनाव में लगे सभी कर्मचारियों की कोरोना टेस्टिंग जैसे सुरक्षा उपायों के साथ भी चुनाव करवाने पर विचार किया जा सकता है।

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