कोरोना संकट : वैश्विक विमानन बाजार को होगा 29 अरब डॉलर का नुकसान, घट सकता है एयर ट्रैफिक
कोरोनावायरस की वजह से फैले संक्रमण से इस साल एशियाई विमानन कंपनियों की मांग में 13 फीसदी की गिरावट आ सकती है। यह गिरावट ऐसे समय में आएगी, जब इन कंपनियों की बिक्री बढ़ रही है।
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कोरोनावायरस के संकट की वजह से वैश्विक विमानन बाजार को इस साल 29 अरब डॉलर की चपत लग सकती है। इनमें चीनी विमानन कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने कहा कि कोरोनावायरस की वजह से फैले संक्रमण से इस साल एशियाई विमानन कंपनियों की मांग में 13 फीसदी की गिरावट आ सकती है। यह गिरावट ऐसे समय में आएगी, जब इन कंपनियों की बिक्री बढ़ रही है।
आईएटीए के मुताबिक, इस संकट की वजह से वैश्विक एयर ट्रैफिक इस साल 4.7 फीसदी तक कम हो जाएगी। यह 2008-09 में आए वित्तीय संकट के बाद मांग में पहली गिरावट होगी। वर्तमान में कई देशों ने चीन जाने और वहां से लौटने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, ब्रिटिश एयरवेज, जर्मनी की लुफ्थांसा, ऑस्ट्रेलिया की क्वांटस और अमेरिका की तीन बड़ी विमानन कंपनियों ने मई तक के लिए चीन की उड़ानें बंद कर दी हैं। घरेलू विमानन कंपनी एयर इंडिया ने भी जून तक चीन के लिए उड़ानें रद्द कर दी है।
वैश्विक विमानन उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण समय
आईएटीए के महानिदेशक एवं सीईओ अलेक्जेंडर डे जूनियक ने कहा कि चीन में फैले कोरोना संकट से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। यात्रियों में डर का माहौल है। चीन के अलावा दक्षिण कोरिया और जापान की सरकारें और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक विमानन उद्योग के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण समय है। इस संकट को खत्म करना पहली प्राथमिकता है। इससे निजात मिलने के बाद वैश्विक विमानन उद्योग एक बार फिर रफ्तार पकड़ेगा।
चीन में डूबा कारों का कारोबार, फरवरी में 92 फीसदी बिक्री घटी
चीन में कार का कारोबार लगभग खत्म हो गया है। फरवरी के पहले दो सप्ताह में यात्री कारों में 92 प्रतिशत की भारी भरकम गिरावट आई है। चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन के आंकड़ों से यह बात सामने आई है। हालांकि उद्योग जगत को इस महीने थोड़ी सी आशा भी बची है और उसका आकलन है कि पूरे फरवरी महीने में कुल गिरावट कम होकर 70 फीसदी पर आ सकती है।
उनका यह भी मानना है कि यह गिरावट अस्थाई है और इसमें सुधार आ सकता है पर यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार कितनी तेजी से अपने पैरों पर खड़ा होता है और सरकार को मामला दोबारा पटरी में लाने में कितना वक्त लग सकता है।
जानकारों का कहना है कि कारों की बिक्री में इतनी बड़ी गिरावट इस बात का संकेत दे रही है कि कोरोना वायरस ने देश की अर्थव्यवस्था को कितना गहरा आघात पहुंचाया है। इससे पहले जनवरी महीने में कार के कारोबार में पिछले साल की तुलना में 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। जानकारों का यह भी मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था को 20 अरब डॉलर का नुकसान पहुंच सकता है।