फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Coronavirus Case News In Hindi: Air can spread infection, will occur if the droplets are small in size

Coronavirus : बूंदों का आकार छोटा हो तो हवा से भी फैलेगा संक्रमण!

Sat, 11 Apr 2020 01:45 PM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च टीम, न्यूयॉर्क सिटी। 
अमर उजाला रिसर्च टीम, न्यूयॉर्क सिटी।  Published by: योगेश साहू Updated Sat, 11 Apr 2020 01:45 PM IST
विज्ञापन
Coronavirus Case News In Hindi: Air can spread infection, will occur if the droplets are small in size
कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पूरे देश में लॉकडाउन किया गया है। - फोटो : PTI

कोरोना वायरस एक जगह से दूसरी जगह हवा में भी जा सकता है या नहीं, इसे लेकर तरह-तरह के सिद्धांत बताए जा रहे हैं। न्यूयॉर्क के सिटी विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग के प्रोफेसर लुइस ए एंकरोडोकी और सीएम यूजन के शोध के मुताबिक यह छींक से निकली बूंद के आकार पर निर्भर करता है कि वह कितनी देर तक हवा में रह सकती है।

विज्ञापन


50 माइक्रॉन से बड़े आकार की बूंद को डेढ़-दो मीटर की ऊंचाई से जमीन पर आने में आधा सेकंड लगता है। इनका आकार जितना छोटा होता है, वे उतने अधिक समय हवा में बनी रहती हैं। 0.5 माइक्रॉन की बूंद को जमीन पर आने में 16.6 घंटे तक लग जाते हैं। इन वैज्ञानिकों ने इस प्रकार की 12 से 21 हजार बूंदों का अध्ययन करते हुए दावा किया कि इनके जरिए वायरस का सीधा संक्रमण संभव है।
विज्ञापन


भौतिक विज्ञानियों ने बताया

  • सूक्ष्म बूंदों को धरती पर गिरने में 16.6 घंटे तक लग जाते हैं, तब तक ये हवा में रहती हैं।
  • 50 माइक्रॉन से बड़ी बूंदें आधा सेकंड में जमीन पर गिरती हैं, इनसे हवा से संक्रमण की आशंका कम।

गुरुत्वाकर्षण का असर नहीं

वैज्ञानिकों ने पाया कि सूखी हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म विषाणु पर गुरुत्वाकर्षण का असर तुरंत नहीं होता। वैसे ही जैसे कुछ दूरी पर खोली गई इत्र की बोतल से निकली खुशबू हवा के जरिए आप तक पहुंचती है, यह भी पहुंच सकते हैं।

ब्राउनियन मोशन फैला सकता है संक्रमण

हवा में बूंदों से बने एयरोसोल के जरिए संक्रमण संभव है। यहां से सांस लेने, बातचीत, छींकने और खांसने के दौरान निकले द्रव के वायरस से संक्रमण हो सकता है। इसमें वायरस, फंगस और बैक्टीरिया हो सकते हैं। सूक्ष्म कणों के हवा के साथ बहाव को भौतिक विज्ञान में ब्राउनियन मोशन कहते हैं।

हवा गर्म से ठंडे भाग की ओर जाती है तो एयरोसोल और वायरस भी उसके साथ चलते हैं। छींक या खांसी से निकलीं बूंदें कमरे के दूसरे हिस्से में पहुंच सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ मीटर फासला रख कर संक्रमित के वायरस से बचा नहीं जा सकता। मॉल, रिटेल स्टोर, ऑफिस और मीटिंग रूम में इनके जरिए संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

विज्ञापन

राहत की बात : अभी तक एक भी मामला नहीं

रिपोर्ट में राहत जताई गई कि अभी तक उन अस्पतालों से हवा से वायरस फैलने का कोई मामला सामने नहीं आया है जहां कोविड-19 के मरीज रखे गए हैं।

अहम सुझाव

  1. हवा साफ रखने वाले वेंटीलेटर बड़े हॉल में जरूर लगाएं, जिसे वे ब्राउनियन मोशन को नियंत्रित कर हवा से संक्रमण को बाहर निकाल सकें।
  2. मुंह से किसी भी प्रकार का द्रव्य सामान्य परिस्थिति में निकलने से रोकें, खांसते-छींकते समय मुंह को कपड़े से पूरी तरह कवर करें।
  3. खांसी-छींक आदि से संक्रमण के खतरे को कुछ मीटर दूरी बनाकर पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, इसका समाधान सख्ती से लॉकडाउन का पालन करने में ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed