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क्या है COP26?: 190 से ज्यादा देशों के नेता और हजारों रिसर्चर्स के बीच होगी जलवायु परिवर्तन पर समझौते की बात, यह क्यों अहम, जानें

Sun, 31 Oct 2021 10:59 PM IST
सुभाष कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला , लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला , लंदन Published by: सुभाष कुमार Updated Sun, 31 Oct 2021 10:59 PM IST
सार

कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (कॉप) का गठन 1994 में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन में बदलाव पर निगरानी के लिए किया गया था। इसे यूनाइटेड नेशंस क्लाइमेट चेंज फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के तहत अस्तित्व में लाया गया था।

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COP26 Talk of agreement will happen between leaders of more than 190 countries and thousands of researchers on climate change, why it is important, know here
जलवायु परिवर्तन को लेकर संयुक्त राष्ट्र की COP26 बैठक ब्रिटेन में हो रही है।(सांकेतिक फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जलवायु परिवर्तन को लेकर संयुक्त राष्ट्र की COP26 बैठक ब्रिटेन में हो रही है। इस कार्यक्रम में इस बार 190 देशों के नेतृत्वकर्ता और हजारों वैज्ञानिक, रिसर्चर्स और नागरिक पहुंचे हैं। कॉप-26 को इस बार जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक अहम कदम माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए देशों के पास एक ऐक्शन प्लान तैयार करने का यह बड़ा मौका है। 

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क्या है कॉप-26?
इस साल जलवायु परिवर्तन पर चर्चा की यह 26वीं कॉन्फ्रेंस है। इसीलिए इस बार कार्यक्रम को (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज-26) कॉप-26 कहा जा रहा है। यह कार्यक्रम इस साल स्कॉटलैंड के ग्लासगो में रखा गया है। यह कॉन्फ्रेंस आईपीसीसी की उस रिपोर्ट के बाद हो रही है, जिसमें कहा गया था कि पृथ्वी का जलवायु तेजी से बदल रहा है और लू, सूखा और भारी बारिश के साथ समुद्र के जलस्तर का बढ़ना अगले एक दशक में काफी ज्यादा होगा। 
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कब हुआ था कॉप-26 का गठन?
कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (कॉप) का गठन 1994 में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन में बदलाव पर निगरानी के लिए किया गया था। इसे यूनाइटेड नेशंस क्लाइमेट चेंज फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के तहत अस्तित्व में लाया गया था। इसकी स्थापना वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैस के जुटाव पर नजर रखने के लिए किया गया था। 
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कब-कब हुआ कॉप का आयोजन?
कॉप के सदस्य देश 1995 के बाद से ही हर साल बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। इस संगठन में 198 पार्टी शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, चीन और भारत भी शामिल हैं। जहां पहली बैठक जर्मनी के बर्लिन में हुई, वहीं कॉप-3 जापान के क्योटो में हुई थी, जहां पहली बार क्योटो प्रोटोकॉल लागू किया गया। इस प्रोटोकॉल के तहत देशों को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लानी है। यह नियम 16 फरवरी 2005 से लागू हुए और 192 देशों ने इसे मंजूरी दी। 

भारत ने 2002 में 23 अक्टूबर से लेकर 1 नवंबर तक कॉप-8 का आयोजन किया। इस बैठक में भी तकनीक साझा करने से लेकर जलवायु परिवर्तन के लिए रिसर्च बढ़ाने पर जोर दिया गया। कॉप की सबसे अहम रही 21वीं बैठक 2015 में फ्रांस के पेरिस में हुई थी। तब सदस्य देशों ने ग्लोबल वार्मिंग को सीमित करते हुए तापमान में इजाफे को दो डिग्री के नीचे रखने पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई थी। 

क्या हैं इस बार कॉप-26 के लक्ष्य?

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस बार कॉप-26 के चार लक्ष्य तय किए गए हैं। यह लक्ष्य हैं...


1. इस सदी के मध्य तक कार्बन उत्सर्जन नेट जीरो और तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री तक रखने का लक्ष्य
कॉप-26 के चार्टर ऑफ ऐक्शन में ब्रिटेन ने कहा था कि वह 2035 तक उत्सर्जन का स्तर 78 फीसदी तक कम करेगा और नेट जीरो का लक्ष्य 2050 तक हासिल कर लेगा। भारत ने भी नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को 450 गीगावॉट तक बढ़ाने और हाइड्रोजन मिशन का एलान कर के बड़ा कदम उठाया था। इस चार्टर में कहा गया कि कई और देश अपनी जिम्मेदारियों के तहत उत्सर्जन कम करने के लिए काम करेंगे। 

UNFCCC की तरफ से प्रस्ताव दिया गया है कि कोयले के इस्तेमाल को धीरे-धीरे कम कर दिया जाए और जंगल को काटने के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा लक्ष्य हासिल करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल सुनिश्चित करने की बात कही गई। 

2. समुदायों और प्राकृतिक निवास के संरक्षण को लागू करने के नियम
इसके अलावा देशों के बीच पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के संरक्षण और उसे दोबारा तैयार करने के साथ लचीले इन्फ्रास्ट्रक्चर और कृषि प्रक्रियाओं को अपनाने पर भी चर्चा तय की गई है। ताकि घरों, समुदायों और प्राकृतिक निवासों को बचाया जा सके। 

3. जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को पाने के लिए आर्थिक मदद
UNFCC की ओर से कहा गया है कि पहले दो लक्ष्य हासिल करने के लिए विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए 2020 तक 100 अरब डॉलर देने के वादे को पूरा करना चाहिए। ब्रिटेन की मंत्री ने कहा कि हमें सभी देशों को इस तरह की मदद के लिए प्रतिबद्ध करना होगा, ताकि वादों को कार्यों में बदला जा सके। 


4. लक्ष्य हासिल करने के लिए सहयोगी रवैया
कॉप26 का एक लक्ष्य पेरिस में हुए जलवायु समझौते के नियमों को लागू करना भी है। इसके लिए बैठक में विस्तृत नियमों पर चर्चा तय की गई, जिससे समझौते के सभी मानकों को पूरा किया जा सके।

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