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China Trade: पश्चिम चाहता है चीन से दूरी, लेकिन बढ़ती गई है आयात की निर्भरता

Sat, 27 Aug 2022 02:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 27 Aug 2022 02:58 PM IST
सार

China Trade: यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (अंकटाड) के मुताबिक 2019 में वस्तुओं के कुल वैश्विक निर्यात में चीन का हिस्सा 13 फीसदी था। 2021 में ये आंकड़ा 15 फीसदी हो गया। दूसरी तरफ उसके मुख्य प्रतिस्पर्धी देशों के निर्यात में गिरावट आई...

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China Trade: US and its allies become more conscious of their dependence on China
China - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन पर निर्भरता घटाने की तमाम चर्चाओं से बावजूद हकीकत यह है कि बीते दो साल में मैन्युफैक्चरिंग (कारखाना उत्पादित) वस्तुओं के मामले में अमेरिका सहित लगभग सभी पश्चिमी देशों की उस पर निर्भरता बढ़ गई है। अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपने एक ताजा विश्लेषण में यह बात कही है। इसके मुताबिक कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में बने हालात का असल में चीन को फायदा हुआ।

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इस विश्लेषण में कहा गया है- ‘महामारी का असर घटने पर संभव है कि चीन को मिला फायदा खत्म हो जाए। इसके बावजूद जो ट्रेंड दिखा, उससे सामने आया कि दुनिया की इस सबसे बड़ी फैक्टरी से संबंध तोड़ना पश्चिम के लिए कितना कठिन है। इस संभावना को देखते हुए यह संबंध विच्छेद और भी मुश्किल मालूम पड़ता है कि चीनी कंपनियां अब चिप, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक कार और ग्रीन एनर्जी से संबंधित उच्च एवं नई तकनीक आधारित वस्तुओं के उत्पादन की तरफ भी बढ़ रही हैं।’

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विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि अमेरिका और उसके कुछ साथी देश चीन पर अपनी निर्भरता को लेकर अधिक सचेत हो गए हैं। उन्हें अहसास हुआ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर वैश्विक सप्लाई चेन जैसे मामलों में उनकी चीन पर अत्यधिक निर्भरता है। इन देशों ने यह निर्भरता खत्म करने की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए हैं। फिर भी महामारी के दौरान चीन से हुए वहां हुए आयात में भारी बढ़ोतरी हुई। ये वृद्धि इसके बावजूद दर्ज हुई कि चीन ने अपने देश में सख्त जीरो कोविड नीति पर अमल करना जारी रखा है, जिसका खराब प्रभाव वहां उद्योग जगत पर पड़ा है।

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यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (अंकटाड) के मुताबिक 2019 में वस्तुओं के कुल वैश्विक निर्यात में चीन का हिस्सा 13 फीसदी था। 2021 में ये आंकड़ा 15 फीसदी हो गया। दूसरी तरफ उसके मुख्य प्रतिस्पर्धी देशों के निर्यात में गिरावट आई। 2019 की तुलना में 2021 में जर्मनी का हिस्सा घट कर 7.8 से 7.3, जापान का 3.7 से 3.4, और अमेरिका का 8.6 से 7.9 फीसदी हो गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इन देशों का निर्यात घटने का सीधा लाभ चीन को मिला।

अंकटाड के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया है कि महामारी के दौरान फेस मास्क, टेस्टिंग किट जैसे सस्ती मेडिकल सामग्रियों, कंप्यूटर उपकरणों आदि की मांग बहुत बढ़ गई। पश्चिमी देशों को इन सबका आयात बढ़ाना पड़ा। शुरुआत में चीन ने अपने यहां महामारी पर जल्द काबू पा लिया था। उस कारण वह निर्यात बढ़ाने की स्थिति में था। 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स के वैश्विक निर्यात में चीन का हिस्सा 42 फीसदी हो गया, जबकि 2019 में ये संख्या 38 फीसदी थी।  

विशेषज्ञों के मुताबिक चीन को दरअसल लंबे समय से जारी ट्रेंड का फायदा मिल रहा है। लंदन स्थित टीएस लोम्बार्ड में चीन एवं एशिया संबंधी अनुसंधान विभाग के प्रमुख रोरी ग्रीन वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा- चीन धीरे-धीरे हाई वैल्यू उत्पादों में भी पश्चिम के बाजार पर कब्जा जमाता जा रहा है। जर्मनी जैसे देशों का बाजार वह निगल रहा है।

इसीलिए अमेरिका अब चीन से व्यापार संबंध घटाने को लेकर बहुत गंभीर हो गया है। हाल के वर्षों में अमेरिका में चीन से आयात कुल मिला कर घटा है। अमेरिकी कंपनियां अब वियतनाम जैसे देशों में अपनी इकाई लगाने को ज्यादा प्राथमिकता दे रही हैँ। लेकिन ग्रीन ने कहा कि छोटे देशों- खास कर एशिया के देशों के लिए ऐसा करना बहुत कठिन है। इसलिए चीन के कुल निर्यात में अभी कमी होने की संभावना नहीं है।

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