दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ चीन का एक और कदम
मेरिका स्थित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास कार्यक्रम के उप निदेशक होमी खरास ने वेबसाइट रशिया टुडे से कहा कि 2020 में चीन अकेली बड़ी अर्थव्यवस्था रहा, जो मंदी का शिकार नहीं हुआ...
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अब इस बात की आधिकारिक रूप से पुष्टि हो गई है कि 2020 में चीन अकेली बड़ी अर्थव्यवस्था रहा, जिसने पॉजिटिव ग्रोथ हासिल की। यानी जिसकी अर्थव्यवस्था घटने के बजाय बढ़ी। बीते साल चीन की आर्थिक विकास दर 2.3 फीसदी रही। जानकारों का कहना है कि कोरोना महामारी और अमेरिका के व्यापार युद्ध के बावजूद ऐसा होना चीनी अर्थव्यवस्था की मजबूती को जाहिर करता है। अब अनुमान लगाया गया है कि 2021 में चीन की सकल घरेलू उत्पाद दर 8.2 फीसदी रहेगी। ये अनुमान ब्लूमबर्ग सर्वे का है। इसके मुताबिक इस तरह इस साल भी चीन दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रह सकता है।
इस बात को लेकर दुनिया के आर्थिक थिंक टैंक और विशेषज्ञों में आम राय बनती जा रही है कि फिलहाल दुनिया की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था चीन अनुमानित समय से पहले प्रथम स्थान पर पहुंच सकता है। ऐसा इसलिए भी है कि पहले नंबर की अर्थव्यवस्था अमेरिका फिलहाल गहरे संकट में फंसा हुआ है। अमेरिका स्थित ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन में वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास कार्यक्रम के उप निदेशक होमी खरास ने वेबसाइट रशिया टुडे से कहा कि 2020 में चीन अकेली बड़ी अर्थव्यवस्था रहा, जो मंदी का शिकार नहीं हुआ। बीते साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन का हिस्सा इस सदी की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा। पिछले साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में 4.2 फीसदी की गिरावट आई। इस तरह उसमें चीन का हिस्सा डॉलर मूल्य के हिसाब से 14.5 फीसदी तक पहुंच गया।
अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि अब चीन एशिया और यूरोप के साथ अपने आर्थिक संबंधों को और गहरा बनाने और घरेलू उपभोग को बढ़ावा देने की नीति पर चल रहा है। पिछले हफ्ते चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि समय और स्थितियां इस वक्त चीन के पक्ष में हैं।
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ अरकंसास में एशियन स्टडीज के निदेशक का झेंग ने ब्लूमबर्ग से कहा कि महामारी से चीन को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी हैसियत मजबूत करने में मदद मिल सकती है। यह मुमकिन है कि महामारी के बाद चीन दुनिया में ग्रोथ (वृद्धि) का अकेला बड़ा स्रोत बन जाए। अर्थशास्त्रियों ने ध्यान दिलाया है कि 2020 में चीन के निर्यात में 3.6 फीसदी की वृद्धि हुई। ये वृद्धि उस समय बेहद अहम है, जब वैश्विक कारोबार में 5.6 फीसदी की गिरावट आई। ये आंकड़े संयुक्त राष्ट्र की व्यापार एवं विकास एजेंसी अंकटाड के हैं।
अंकटाड के मुताबिक चीन एक बार फिर से दुनिया में विदेशी निवेश का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। 2020 में नवंबर तक वहां 129.5 अरब डॉलर का विदेशी निवेश हुआ था। एक बार फिर यह गौरतलब है कि चीन में ये वृद्धि उस समय हुई, जब 2020 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 30 से 40 फीसदी तक गिरावट आई। अंकटाड में एशियाई मामलों के मुख्य अर्थशास्त्री चांग शू ने इस सिलसिले में कहा है- वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सिर्फ चीन में दर्ज हुई वृद्धि नहीं, बल्कि वृद्धि का पैटर्न महत्वपूर्ण है। चीन लगातार आर्थिक वृद्धि के लिए घरेलू उपभोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इससे लंबी अवधि में चीन बाकी दुनिया के लिए प्रमुख उत्पादक के साथ-साथ प्रमुख उपभोक्ता भी बन जाएगा।