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China: संघर्ष के बीच यूक्रेन जाएगा चीन का शांति प्रतिनिधिमंडल, रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करा सकता है ड्रैगन?

Thu, 27 Apr 2023 04:33 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Thu, 27 Apr 2023 04:33 PM IST
सार

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यूक्रेनी समकक्ष वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ फोन पर बातचीत की। जिनपिंग संघर्ष को रोकने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत करने के लिए यूक्रेन में एक प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे।

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China's peace delegation will go to Ukraine amid conflict, can the dragon end the Russia-Ukraine war
व्लादिमीर पुतिन और जिनपिंग(फाइल) - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

24 फरवरी 2022 को शुरु हुआ रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध अब भी जारी है। दोनों देशों के हजारों सैनिक और नागरिक मारे जा चुके हैं। 14 महीने से जारी युद्ध के बीच चीन यूक्रेन में एक प्रतिनिधिमंडल भेजेगा जो इस संघर्ष को सुलझाने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत करेगा। इससे पहले भी ड्रैगन युद्ध को रोकने के लिए एक शांति समझौता पेश कर चुका है।
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China's peace delegation will go to Ukraine amid conflict, can the dragon end the Russia-Ukraine war
वोलोदिमिर जेलेंस्की, शी जिनपिंग - फोटो : सोशल मीडिया
रूस-यूक्रेन युद्ध मुद्दा हल करने के लिए चीन क्या कर रहा है? 
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को यूक्रेनी समकक्ष वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ फोन पर बातचीत की। लगभग एक घंटे हुई इस वार्ता के दौरान उन्होंने युद्ध को खत्म करने के लिए संघर्ष विराम और राजनीतिक समाधान लाने के लिए मध्यस्थता करने की पेशकश की। 

जिनपिंग संघर्ष को रोकने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत करने के लिए यूक्रेन में एक प्रतिनिधिमंडल भेजेंगे। चीन की सरकारी मीडिया सीसीटीवी के अनुसार, जिनपिंग ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन संघर्ष में तटस्थ रहेगा। बीजिंग न तो एक तरफ खड़ा रहकर आग जलते देखेगा, न ही आग में घी डालेगा।
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China's peace delegation will go to Ukraine amid conflict, can the dragon end the Russia-Ukraine war
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की(फाइल) - फोटो : SOCIAL MEDIA
मध्यस्थता योजना पर यूक्रेन क्या बोला?
चीनी समकक्ष से फोन वार्ता के बाद जेलेंस्की ने बताया कि यह बातचीत लंबी और सार्थक रही। उन्होंने कहा कि दोनों ने निष्पक्ष और स्थायी शांति तक पहुंचने के लिए संभावित सहयोग पर चर्चा की। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यूक्रेन खोए हुए क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा।

 जेलेंस्की ने कहा, 'क्षेत्रीय समझौते की कीमत पर कोई शांति नहीं हो सकती। 1991 के सीमा समझौते के भीतर यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को बहाल किया जाना चाहिए।'
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क्या चीन पहले भी मध्यस्थता का प्रयास कर चुका है? 
दो देशों के नेताओं के बीच हुई यह अहम फोन कॉल चीन द्वारा प्रस्तावित शांति योजना के जारी होने के बाद हुई। दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध के एक साल होने पर चीन ने एक 12-सूत्रीय शांति प्रस्ताव जारी किया था। इसे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में पेश किया गया था।

 'यूक्रेन संकट के राजनीतिक समाधान पर चीन की स्थिति' शीर्षक वाले इस शांति प्रस्ताव में 12 बिंदु हैं। सबसे अहम बिंदु के रूप में इसमें युद्धविराम, शांति वार्ता और रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को खत्म करने को कहा गया।

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रूस और यूक्रेन युद्ध - फोटो : Social Media
प्रस्ताव में क्या था?
प्रस्ताव के माध्यम से चीन ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों से कहा था कि इनको एकतरफा प्रतिबंधों का दुरुपयोग बंद करना चाहिए और रूस-यूक्रेन संकट को कम करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। रूस या यूक्रेन का उल्लेख किए बिना कहा गया था कि सभी देशों की संप्रभुता को बरकरार रखा जाना चाहिए। अन्य बिंदुओं में संघर्ष विराम, शांति वार्ता, युद्ध के कैदियों के लिए सुरक्षा और नागरिकों पर हमलों को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को सुरक्षित रखने और अनाज निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए कहा गया था।

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Xi Jinping and Vladimir Putin - फोटो : Agency
इन 12 बिंदुओं में जानें क्या थे शांति प्रस्ताव...
1. सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना।
2. शीत युद्ध की मानसिकता का छोड़ना।
3. दुश्मनी को रोकना।
4. शांति वार्ता दोबारा शुरू करना।
5. मानवीय संकट का समाधान करना।
6. नागरिकों और युद्धबंदियों की सुरक्षा करना।
7. परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को सुरक्षित रखना।
8. रणनीतिक खतरों को कम करना।
9. अनाज के निर्यात को सुविधाजनक बनाना।
10. एकतरफा प्रतिबंधों को रोकना।
11. औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर रखना।
12. संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण को बढ़ावा देना।

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नाटो के महासचिव - फोटो : Social media
चीनी शांति योजना पेश होने के बाद क्या हुआ?
शांति योजना दस्तावेज को यूक्रेन के सहयोगियों ने संदेह के साथ देखा था। नाटो के महासचिव, जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा था कि चीन की अधिक विश्वसनीयता नहीं है क्योंकि वह यूक्रेन के अवैध आक्रमण की निंदा करने में सक्षम नहीं है।'

चीन मध्यस्थता की पहल क्यों कर रहा है?
पिछले साल फरवरी में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद शी जिनपिंग और जेलेंस्की के बीच यह पहली वार्ता है। मध्य पूर्व के दो प्रतिद्वंद्वी देश ईरान और सऊदी अरब के बीच शांति समझौते पर सफलतापूर्व बात करने के बाद शी जिनपिंग अब चीन की राजनयिक पहुंच को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

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पुतिन और जिनपिंग - फोटो : ANI
रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन का रुख क्या रहा है?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संघ के अन्य सदस्यों की तरह चीन ने रूस की निंदा नहीं की है। हालांकि, उसने मॉस्को के दावों को भी मान्यता नहीं दी है। लेकिन, उसने रूस के साथ राजनीतिक, व्यापारिक और सैन्य संबंधों को मजबूत किया है। 

शी जिनपिंग ने पिछले महीने मॉस्को का दौरा कर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एकजुटता जताई थी। तब इसकी दुनियाभर में खूब चर्चा हुई थी। अब वही शी जिनपिंग जेलेंस्की के साथ फोन पर बातचीत में मध्यस्थता की बात कर रहे हैं।

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व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग - फोटो : Agency
क्या चीन खत्म करा सकता है रूस-यूक्रेन युद्ध? 
चीन के शांति प्रस्ताव पर विशेषज्ञों का कहना है, 'इस प्रस्ताव में रूस की सेना को यूक्रेन छोड़ने के लिए नहीं कहा गया। इसमें यूक्रेनी भूमि की वापसी का वादा नहीं किया गया है जो अब रूसी सेना द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर ली गई है। इसके अलावा देश के पुनर्निर्माण के लिए भी कुछ खास नहीं है।' 

जानकार कहते हैं कि एक तत्काल युद्ध विराम होने से रूस की पकड़ स्थिर हो जाएगी। वास्तव में, युद्ध के इस चरण में किसी भी शांति योजना के सफल होने की संभावना नहीं है क्योंकि न तो रूसी और न ही यूक्रेनी सरकार हारने का जोखिम उठा सकती है। इसके अलावा, पश्चिमी देशों ने लगातार कहते रहे हैं कि चीन रूस को हथियार उपलब्ध कराने के बारे में सोच रहा होगा। पश्चिमी देशों का अविश्वास चीन के तथाकथित प्रयासों के सफल होने में बड़ा रोड़ा है।
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