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निशाने पर सीपीईसी: पाकिस्तान और चीन के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं बलूच विद्रोही

Tue, 03 May 2022 05:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 03 May 2022 05:33 PM IST
सार

सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि महिला फिदायीन का भर्ती होना बीएलए के तौर-तरीकों में आया एक गुणात्मक बदलाव है। बीएलए एक सेक्युलर संगठन समझा जाता है। बताया जाता है कि उसने माजिद ब्रिगेड का गठन खास तौर पर सीपीईसी और चीन से जुड़े अन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया है...

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China-Pakistan Economic Corridor, CPEC under target of the Balochistan Liberation Army
बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

बलूचिस्तान प्रांत में जारी आतंकवादी गतिविधियां पाकिस्तान और चीन दोनों देशों की सरकारों के लिए बड़ा सिरदर्द बनती जा रही हैं। चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना के तहत बन रहे चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर (सीपीईसी) वहां सक्रिय बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) का खास निशाना बना हुआ है। इस प्रतिबंधित संगठन के हमलों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है। बीएलए ने सबसे हालिया हमला पिछले 26 अप्रैल को कराची यूनिवर्सिटी कैंपस में किया था, जिसमें तीन चीनी शिक्षकों की जान गई।

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चीन बोला- कड़ी कार्रवाई करे पाक

बीएलए के कुख्यात गुरिल्ला सेल- माजिद ब्रिगेड ने कराची यूनिवर्सिटी में हुए की जिम्मेदारी ली। बीएलए के एक प्रतिनिधि ने एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल से बातचीत में कहा है- ‘यह हमला चीन को साफ संदेश है कि बलूचिस्तान में उसकी मौजूदगी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।’ कराची हमले के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के अधिकारियों से दो टूक कहा था कि इस ‘आतंकवादी संगठन’ पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ इस घटना पर शोक जताने के लिए खुद इस्लामाबाद स्थित चीनी दूतावास गए थे। इसके जरिए उन्होंने चीन को संदेश दिया कि वे इस मामले में चीन के साथ हैं।

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विश्लेषकों का कहना है कि हालिया घटनाएं बदलते भू-राजनीतिक माहौल के लिहाज ज्यादा अहम मानी जा रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश में अमेरिका विरोधी माहौल बना रखा है। पाकिस्तान की नीतियां चीन की तरफ झुकी रही हैं। शाहबाज शरीफ ने साफ कहा है कि उनके शासनकाल में चीन से संबंध में कोई ढिलाई नहीं आएगी। करीब इसके बीच कुछ हलकों से यह कयास भी लगाया गया है कि बीएलए को विदेशी समर्थन मिल रहा हो सकता है।
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इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक एफएटीए रिसर्च सेंटर के कार्यकारी निदेशक मंसूर खान मेहसूद ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा कि बलूच विद्रोह से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा- ‘पहले बलूच विद्रोही छोटे हमले करते थे। लेकिन अब गंभीर हमले करने लगे हैं। उन्होंने माजिद ब्रिगेड नाम से आत्मघाती दस्ते बना लिए हैं, जिनमें पुरुष और महिला दोनों फिदायीन शामिल हैं।’ मंसूर ने बताया कि बलूच विद्रोहियों की गतिविधियां सिर्फ बलूचिस्तान तक सीमित नहीं हैं। बल्कि वे कई अन्य प्रांतों में भी निशाना साधने लगे हैं।

क्या सेक्युलर है बीएलए?

सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि महिला फिदायीन का भर्ती होना बीएलए के तौर-तरीकों में आया एक गुणात्मक बदलाव है। बीएलए एक सेक्युलर संगठन समझा जाता है। बताया जाता है कि उसने माजिद ब्रिगेड का गठन खास तौर पर सीपीईसी और चीन से जुड़े अन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया है।  



बलूच राष्ट्रवादियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने इस प्रांत में मानवाधिकारों के घोर हनन किए। उसके ही जवाब में वहां हिंसक विद्रोह की स्थिति बनी है। सत्ताधारी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के सीनेटर मुशाहिद हुसैन सईद ने कहा है- ‘कराची में चीनी नागरिकों पर हुआ हमला खतरे की घंटी था। इससे इस बात का भी संकेत मिला कि बलूचिस्तान में लोगों के मन में गहरी शिकायतें बैठी हुई हैं, जिनका अब तक समाधान नहीं ढूंढा गया है।’ हुसैन ने कहा कि बीएलए अब कराची, डासू, ग्वादार, बल्कि देश में कहीं भी हमला करने में सक्षम हो गया है।

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