East China Sea: विवादित द्वीपों पर चीन और जापान ने स्थापित की सैन्य हॉटलाइन, समुद्री-हवाई संकटों पर लगेगी लगाम
चीन के रक्षा मंत्रालय ने हॉटलाइन की घोषणा करते हुए कहा, बीजिंग और टोक्यो के रक्षा विभागों के बीच बनी सहमति के अनुसार दोनों पक्षों ने हाल ही में समुद्री और वायु संपर्क तंत्र के लिए एक हॉटलाइन (सीधी टेलीफोन लाइन) बनाने का काम पूरा कर लिया है।
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पूर्वी चीन सागर में विवादित जल क्षेत्र में आक्रामक गश्त के कारण पैदा होने वाली समुद्री और हवाई घटनाओं के प्रबंधन और नियंत्रण की क्षमता को मजबूत करने के लिए चीन और जापान ने शुक्रवार को एक सैन्य हॉटलाइन स्थापित की। इस हॉटलाइन तंत्र की ऐसे समय में घोषणा की गई है जब जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी इस सप्ताहांत पर बीजिंग का दौरा करेंगे। वह दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार पर बातचीत के लिए अपने चीनी समकक्ष किंग गैंग से मुलाकात करेंगे।
चीन का दौरा करेंगे जापान के विदेश मंत्री हयाशी
साल 2019 के बाद से किसी जापानी विदेश मंत्री का यह पहला चीन दौरा होगा। आखिरी बार हयाशी के पूर्ववर्ती तोशिमित्सु मोटेगी बीजिंग गए थे। इसके बाद कोविड-19 के कारण चीन ने अपनी सीमाओं को बंद कर दिया था। चीन ने इस साल की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए देश को फिर से खोल दिया था।
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चीन के रक्षा मंत्रालय ने हॉटलाइन को लेकर क्या कहा?
चीन के रक्षा मंत्रालय ने हॉटलाइन की घोषणा करते हुए कहा, बीजिंग और टोक्यो के रक्षा विभागों के बीच बनी सहमति के अनुसार दोनों पक्षों ने हाल ही में समुद्री और वायु संपर्क तंत्र के लिए एक हॉटलाइन (सीधी टेलीफोन लाइन) बनाने का काम पूरा कर लिया है। मंत्रालय ने कहा कि इस हॉटलाइन की स्थापना चीन और जापान के रक्षा विभागों के बीच संचार चैनलों को प्रभावी ढंग से मजबूत करेगी, समुद्री और हवाई संकटों का प्रबंधन और नियंत्रण करने के लिए दोनों पक्षों की क्षमताओं को मजबूत करेगी और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी।
द्वीपों पर चीन, जापान और ताइवान करते हैं अपना दावा
पूर्वी चीन सागर में जापान के नियंत्रण वाले वाले द्वीपों को लेकर चीन और जापान के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। चीन इन द्वीपों पर अपना दावा करता है।
करीबी रक्षा संबंध रखते हैं जापाना और ताइवान
इन द्वीपों को जापान द्वारा सेंकाकस के रूप में जाना जाता है, जबकि चीन ने उन्हें दियाओयू नाम दिया है। ताइवान भी इन द्वीपों पर दावा करता है। हालांकि, उसने किसी भी संघर्ष से बचने के लिए जापान के साथ समझौता किया है, क्योंकि जापान, ताइपे के साथ करीबी रक्षा संबंध रखता है। चीनी रक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित हॉटलाइन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों की नौसेनाओं और वायु सेनाओं ने अपने दावों पर जोर देने के लिए द्वीपों पर आक्रामक गश्त की थी।