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चीन की चालाकी: भूटान की जमीन भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने की फिराक में ड्रैगन, बसा रहा गांव और सैन्य अड्डे

Mon, 10 May 2021 10:45 AM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 10 May 2021 10:45 AM IST
सार

 ड्रैगन साल 2015 से भूटान की एक सुदूर घाटी में सड़कों का विशाल नेटवर्क, इमारतों और सैन्य चौकियां का निर्माण कर रहा है। चीन अपने इस निर्माण कार्य के दम पर भूटान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता है।

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China Is Building Entire Villages and military base at disputed land in northern Bhutan Eye on Doklam
नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग - फोटो : File

विस्तार

दुनिया भर के देश जहां चीन से निकलकर तबाही मचाने वाले वायरस से निपटने में लगे हैं, तो वहीं अपनी विस्तारवादी नीतियों को अंजाम देने में जुटा है। ड्रैगन साल 2015 से भूटान की एक सुदूर घाटी में सड़कों का विशाल नेटवर्क, इमारतों और सैन्य चौकियां का निर्माण कर रहा है। चीन अंतरराष्ट्रीय स्तर और ऐतिहासिक रूप से भूटानी माने जाने वाले क्षेत्र में अपने नागरिकों और सुरक्षाबलों को बसाने के साथ ही सैन्य उपकरण भी तैनात कर रहा है। चीन अपने इस निर्माण कार्य के दम पर भूटान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता है।

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 चीन ने 2015 में एलान किया था कि वह तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के दक्षिण में ग्यालफुग गांव बसा रहा है, लेकिन यह गांव भूटान में पड़ता है। माना जा रहा है कि भूटान में निर्माण कार्य चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा तिब्बती सीमावर्ती क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए एक प्रमुख अभियान का हिस्सा है।
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भूटान में भारत के प्रभाव को कम करने में जुटा ड्रैगन
फॉरेन पॉलिसी में छपी रॉबर्ट बार्नेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 2015 में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) के दक्षिण में ‘जियेलुओबो’ नाम का एक नया गांव बसाने की घोषणा की थी। हालांकि, तिब्बत में ‘ग्यालाफुग’ नाम से पहचाना जाने वाला यह गांव भूटान की सीमा में पड़ता है। ऐसे में चीनी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन किया है। उनकी यह कोशिश हिमालयी क्षेत्र में भारत समेत अन्य देशों के हितों को कमतर करने के वर्षों से जारी अभियान का हिस्सा है।

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भारत पर दबाव बनाने का भूटान पर कब्जा 

बार्नेट के अनुसारए ‘ग्यालाफुग’ पर दावा जताकर चीन भूटान सरकार पर क्षेत्र को उसके हवाले करने का दबाव बना रहा है। इसका मकसद भारत से जारी संघर्ष में सैन्य लाभ हासिल करना है। यानी चीन को असल में यह इलाका चाहिए नहीं, लेकिन सिर्फ भारत पर दबाव बनाने के लिए वह इसपर कब्जा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ग्यालाफुग’ में निर्माण चीन और भूटान के बीच हुई स्थापना संधि का सीधा उल्लंघन है। बीजिंग भूटान के कई अन्य सीमाई इलाकों में भी सैन्य दखल बढ़ा रहा है, जिसका हिमालयी देश ने कड़ा विरोध किया है।

वर्ष 2017 में भी भूटान के दक्षिण पश्चिमी हिस्से में चीन ने एक क्रॉस रोड बनाने की कोशिश की थी। यह जगह भारतीय सीमा से सटी हुई है, जिसकी वजह से डोकलाम में 73 दिनों तक सैकड़ों भारतीय और चीनी सैनिकों का आमना-सामना भी हुआ था। फिर बाद में चीन को यह जगह छोड़नी पड़ी थी। 

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