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China: भारत से सटी सीमा पर सड़क नेटवर्क मजबूत करने में जुटा चीन, 394 किलोमीटर लंबा राजमार्ग बनाएगा ड्रैगन
Wed, 11 Mar 2026 05:04 AM IST
Nitin Gautam
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Nitin Gautam
Updated Wed, 11 Mar 2026 05:04 AM IST
सार
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 394 किलोमीटर लंबे राजमार्ग निर्माण की तैयारी है। इसके साथ ही एआई और ई-वाहनों के उत्पादन पर जोर दिया गया है। यह पंचवर्षीय योजना फिलहाल मंजूरी के लिए एनपीसी भेजी गई है।
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भारत-चीन सीमा पर ड्रैगन बना रहा बुनियादी ढांचे
- फोटो : ANI
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विस्तार
चीन अपनी 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत अगले पांच वर्षों में भारत से सटे संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक परिवहन नेटवर्क को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रहा है। हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने 15वीं पंचवर्षीय योजना के मसौदा रिपोर्ट के हवाले से लिखा कि एक परियोजना के तहत शिनजियांग, उइगुर स्वायत्त क्षेत्र में स्थित दुर्गम तियानशेन पर्वत शृंखला के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को जोड़ने के लिए 394 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का निर्माण किया जाएगा।
योजना को मंजूरी के लिए एनपीसी के पास भेजा गया
यह पंचवर्षीय योजना चीन की राष्ट्रीय विधायिका, राष्ट्रीय जन कांग्रेस (एनपीसी) के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गई है। इसका सत्र अभी चल रहा है। यह मार्ग विवादित अक्साई चिन क्षेत्र से होकर गुजरने वाली एक रणनीतिक सड़क के समानांतर बनेगा, जिसका निर्माण 1962 के भारत-चीन सीमा युद्ध के बाद सैन्य गतिशीलता को बेहतर बनाने के लिए किया गया था। मध्य शिनजियांग में दुशांजी-कुका राजमार्ग का निर्माण 2032 तक पूरा होने की उम्मीद है।
तिब्बत जाने वाले राजमार्गों को भी बेहतर करेगा चीन
इस पंचवर्षीय योजना में तिब्बत की ओर जाने वाले तीन मौजूदा राजमार्गों के उन्नयन का भी प्रस्ताव है। चीन के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ई-वाहनों और बैटरी जैसी नई उत्पादक शक्तियों पर खासा जोर दिया गया है ताकि कमजोर पड़ रही अर्थव्यवस्था को गति दी जा सके। इस पंचवर्षीय योजना को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पहले ही मंजूरी दे दी गई है।
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चीन की कई योजनाओं से भारत में बढ़ी चिंता
एनपीसी को कम्युनिस्ट पार्टी का रबर-स्टांप संसद माना जाता है और वह अपने मौजूदा सत्र में इस योजना को मंजूरी देने वाली है। चीन ने पिछले साल 14वीं पंचवर्षीय योजना पूरी की है, जिसके दौरान उसने भारतीय सीमा के पास ब्रह्मपुत्र नदी पर तिब्बत में दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण शुरू किया। पिछली जुलाई में चीन ने 170 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से इस बांध का निर्माण शुरू किया है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी अवसंरचना परियोजना बताया जा रहा है। इसके तहत भारी मात्रा में पानी जमा करने की क्षमता और नदी के प्रवाह में बदलाव को लेकर भारत और बांग्लादेश जैसे तटीय देशों में चिंताएं पैदा हो गई हैं।
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योजना को मंजूरी के लिए एनपीसी के पास भेजा गया
यह पंचवर्षीय योजना चीन की राष्ट्रीय विधायिका, राष्ट्रीय जन कांग्रेस (एनपीसी) के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत की गई है। इसका सत्र अभी चल रहा है। यह मार्ग विवादित अक्साई चिन क्षेत्र से होकर गुजरने वाली एक रणनीतिक सड़क के समानांतर बनेगा, जिसका निर्माण 1962 के भारत-चीन सीमा युद्ध के बाद सैन्य गतिशीलता को बेहतर बनाने के लिए किया गया था। मध्य शिनजियांग में दुशांजी-कुका राजमार्ग का निर्माण 2032 तक पूरा होने की उम्मीद है।
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तिब्बत जाने वाले राजमार्गों को भी बेहतर करेगा चीन
इस पंचवर्षीय योजना में तिब्बत की ओर जाने वाले तीन मौजूदा राजमार्गों के उन्नयन का भी प्रस्ताव है। चीन के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ई-वाहनों और बैटरी जैसी नई उत्पादक शक्तियों पर खासा जोर दिया गया है ताकि कमजोर पड़ रही अर्थव्यवस्था को गति दी जा सके। इस पंचवर्षीय योजना को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पहले ही मंजूरी दे दी गई है।
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चीन की कई योजनाओं से भारत में बढ़ी चिंता
एनपीसी को कम्युनिस्ट पार्टी का रबर-स्टांप संसद माना जाता है और वह अपने मौजूदा सत्र में इस योजना को मंजूरी देने वाली है। चीन ने पिछले साल 14वीं पंचवर्षीय योजना पूरी की है, जिसके दौरान उसने भारतीय सीमा के पास ब्रह्मपुत्र नदी पर तिब्बत में दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण शुरू किया। पिछली जुलाई में चीन ने 170 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से इस बांध का निर्माण शुरू किया है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी अवसंरचना परियोजना बताया जा रहा है। इसके तहत भारी मात्रा में पानी जमा करने की क्षमता और नदी के प्रवाह में बदलाव को लेकर भारत और बांग्लादेश जैसे तटीय देशों में चिंताएं पैदा हो गई हैं।