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डिजिटल युद्ध की आहट: अंतरिक्ष में चीन का AI दांव, क्या इससे बदल जाएगा सैन्य संतुलन और कैसे?

Sat, 31 Jan 2026 05:04 AM IST
शुभम कुमार आशुतोष भाटिया
आशुतोष भाटिया Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 31 Jan 2026 05:04 AM IST
सार

चीन ने अंतरिक्ष में दुनिया का पहला जनरल पर्पज लार्ज-स्केल AI मॉडल तैनात करने का दावा किया है, जिससे सामरिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सैटेलाइट अब कच्चा डेटा धरती पर भेजने के बजाय अंतरिक्ष में ही उसका विश्लेषण करेंगे। आइए जानते है इस दावे से दुनियाभर में डिजिटल युद्ध की को लेकर संकट कैसे गहरा गया?

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China AI gamble in space will it shift the military balance and if so News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन ने अंतरिक्ष में दुनिया का पहला जनरल पर्पज लार्ज स्केल एआई मॉडल स्थापित करने में सफलता का दावा किया है। अंतरिक्ष की दौड़ में चीन की इस उपलब्धि से सामरिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इससे चीन अंतरिक्ष में जल्द ही एआई संचालित डाटा सेंटर स्थापित कर युद्ध के मैदान की रीयल टाइम इंटेलिजेंस हासिल कर सकता है। चीन ने अंतरिक्ष में मौजूद अपने सैटेलाइट क्लस्टर पर सीधे एआई प्रॉम्प्ट को प्रोसेस करने में सफलता पाई है। अब तक सैटेलाइट केवल तस्वीरें लेकर कच्चा डेटा जमीन पर प्रोसेस करने के लिए भेजते थे।

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अब भविष्य में चीन का स्पेस क्लाउड और डेटा सेंटर अंतरिक्ष में ही डेटा का विश्लेषण कर फौरन सटीक नतीजे धरती पर भेज पाएगा। युद्ध में लक्ष्य को पहचानने और नष्ट करने की प्रक्रिया अब तक जमीनी स्टेशनों पर निर्भर थी। चीन का एआई डाटा सेंटर बनने पर हथियार सीधे अंतरिक्ष से मिले निर्देशों पर काम कर सकते हैं।
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हाइपरसोनिक मिसाइलों और स्वार्म ड्रोन जैसी प्रणालियों की प्रभावशीलता बढ़ सकती है। इससे विरोधी सेना को संभलने का मौका नहीं मिलेगा। चीन समुद्र में पनडुब्बियों और विमानवाहक पोतों की आवाजाही को रीयल-टाइम में ट्रैक कर सकता है। जमीन पर स्थित डाटा सेंटर्स को युद्ध में नष्ट भी किया जा सकता है, लेकिन अंतरिक्ष में तैरते डाटा सेंटर को रोकना मुश्किल होगा।
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अमेरिका बनाम चीन
अमेरिका भी स्पेस-एक्स और स्पेस फोर्स भी स्टारशील्ड परियोजना के जरिए रक्षा उपयोगी नेटवर्क पर काम कर रहा है। जनरल पर्पज लार्ज स्केल एआई मॉडल को अंतरिक्ष में सक्रिय करने से चीन अमेरिका से चंद कदम आगे दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतरिक्ष के सैन्यकरण में तेजी ला सकता है।

चीन की यह क्षमता वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ाने वाली है। एआई डाटा सेंटर की मदद से भविष्य में चीन सेना की तैनाती व अन्य गतिविधियों की निगरानी रीयल-टाइम में कर पाएगा। जाहिर है भारत को भी अब अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग और एज-एआई में गति बढ़ानी होगी।


विशेषज्ञ राय
रक्षा विशेषज्ञ और चीन के आधुनिकीकरण पर पैनी नजर रखने वाले लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद (रिटायर्ड) ने कहा कि चीन के मामले में भारत को बेहद सावधान रहना चाहिए, उनकी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताएं काफी आधुनिक हैं। हमें इसलिए सतर्क रहना है क्योंकि चीन के पास वह क्षमता होगी जिससे वो हम पर भारी पड़ सकते हैं। इसका कुछ न कुछ इलाज ढूंढना पड़ेगा। साथ ही चीन के साथ आर्थिक मोर्चे पर मिल कर भी चलना चाहिए।

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