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कैलिफोर्निया विवि: भेदभाव रोधी नीति में 'जाति' शामिल करने का विरोध, 80 संकाय सदस्यों ने लिखा पत्र

Tue, 25 Jan 2022 12:34 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वॉशिंगटन
एजेंसी, वॉशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Tue, 25 Jan 2022 12:34 AM IST
सार

कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा हाल में घोषित की गई भेदभाव रोधी नीति में कहा गया है कि जाति के कारण उत्पीड़न का शिकार विद्यार्थी अब दलित विरोधी पक्षपात की शिकायत कर पाएंगे। कई छात्रों का दावा है, उनके साथ नियमित पक्षपात होता है।

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California University 80 faculty members wrote a letter opposing inclusion of caste in anti-discrimination policy
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अमेरिका की प्रतिष्ठित कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी (सीएसयू) के 80 से ज्यादा संकाय सदस्यों ने विश्वविद्यालय द्वारा हाल में भेदभाव रोधी नीति में ‘जाति’ को शामिल किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि इससे भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के हिंदू संकाय सदस्यों को असांविधानिक तौर पर लक्षित करके उनके साथ भेदभाव किया जाएगा।

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सीएसयू द्वारा हाल में घोषित की गई भेदभाव रोधी नीति में कहा गया है कि जाति के कारण उत्पीड़न का शिकार विद्यार्थी अब दलित विरोधी पक्षपात की शिकायत कर पाएंगे। कई छात्रों का दावा है, उनके साथ नियमित पक्षपात होता है। दलित नागरिक अधिकार संगठन ‘इक्वेलिटी लैब्स’ के मुताबिक, दलित वे लोग होते हैं जो भारत की सामाजिक वर्ण व्यवस्था में सबसे नीचे समझे जाते हैं और उन्हें भेदभाव एवं हिंसा का शिकार होना पड़ता है।
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उसने कहा कि जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव करना भारत में गैर कानूनी है लेकिन यह प्रथा जारी है, यहां तक कि अमेरिका में दक्षिण एशियाई प्रवासियों में भी यह चलन है। भेदभाव रोधी नीति में जाति को शामिल करने का विरोध करते हुए संकाय सदस्यों ने कहा है कि नई नीति अल्पसंख्यक समुदाय को अनुचित रूप से निशाना बनाएगी।
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सिर्फ भारतीय व दक्षिण एशियाई मूल के लोगों पर लागू होगा नियम
सीएसयू के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को लिखे पत्र में संकाय सदस्यों ने लिखा, विशिष्ट व पृथक संरक्षित श्रेणी के तौर पर जाति को शामिल किए जाने के बाद यह नियम सिर्फ भारतीय और दक्षिण एशिया मूल के संकाय सदस्यों पर लागू होगा। सीएसयू में अकाउंटेंसी के प्रोफेसर प्रवीण सिन्हा ने कहा, व्यापक नीतियों के अस्तित्व को देखते हुए इसमें जाति को शामिल करना दिग्भ्रमित करता है, जो पहले ही विभिन्न भेदभावों के खिलाफ संरक्षित है। सीएसयू ने इसमें सिर्फ एक श्रेणी को शामिल किया है जो सिर्फ भारतीय वंशावली से जुड़े लोगों से संबंधित है जैसे कि मैं और सीएसयू की व्यवस्था से जुड़े हजारों अन्य संकाय सदस्य और छात्र।


भेदभाव का नहीं होगा निवारण
सीएसयू में भारतीय और दक्षिण एशियाई मूल के 600 से ज्यादा संकाय सदस्य हैं। सैन डिएगो राज्य विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के प्रोफेसर सुनील कुमार ने कहा, भारतीय मूल का एक संकाय सदस्य होने के नाते, मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि विभिन्न पृष्ठभूमि के कई छात्रों के लिए भेदभाव एक सच्चाई है और मौजूदा कानूनों व सीएसयू नीति में ऐसी सभी शिकायतों को दूर करने के लिए एक मजबूत तंत्र है। लेकिन नीति में यह बदलाव बिना किसी विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्य या डाटा के किया गया है। यह भेदभाव का निवारण करने के बजाय, वास्तव में भेदभाव करेगा।

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