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Britain: भारतीय छात्र का आरोप- भारत विरोधी ताकतें चला रहीं लंदन में अभियान, हिंदू होने के चलते किया प्रताड़ित
Tue, 04 Apr 2023 02:59 PM IST
नितिन गौतम
यतींद्र लवानिया
यतींद्र लवानिया
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 04 Apr 2023 02:59 PM IST
सार
करण ने कहा कि दुर्भाग्य से कुछ लोग यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि एक भारतीय हिंदू लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स का नेतृत्व करे।
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लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, करन कटारिया
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
गुरुग्राम के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले 22 वर्षीय करण कटारिया दुनिया के नामी संस्थान में हिंदू विरोधी अभियान के शिकार हो गए। लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स (एलएसई) में छात्र संघ के महासचिव के लिए चुनाव में उन्हें नस्लभेदी बताकर अयोग्य साबित कर दिया। करण ने बताया कि असल में उनके विरोध में वही ताकतें हैं, जो भारत के टुकड़े करना चाहती हैं।
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करण बड़े अरमान के साथ एलएसई से अंतरराष्ट्रीय कानून में स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने पहुंचे थे। छात्रों के साथ घुलने-मिलने और सबकी मदद करने की आदत ने उन्हें छात्रों के बीच पहचान मिलने लगी। साथी छात्रों के बार-बार प्रोत्साहित करने पर ही उन्होंने महासचिव का चुनाव लड़ने का फैसला किया, लेकिन चुनाव से ठीक पहले करण को इस्लमोफोबिक, यूरोफोबिक, ट्रांसफोबिक और फासीवादी करार देते हुए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
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करण ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा, कभी सोचा नहीं था कि दुनिया के सबसे नामी संस्थानों में भारतीय और हिंदू होने की वजह से प्रताड़ित किया जाऊंगा। छात्रसंघ ने झूठे आरोपों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई की। करण का कहना है कि वे शुरुआत में तो बहुत डर गए थे। क्योंकि, छात्रों के अपार समर्थन के बाद भी जिस तरह से उन्हें अयोग्य ठहराया गया, वह किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा कर रहा था। करण कहते हैं, शुरुआत में तो अकेला पड़ गया था, लेकिन अब यहां (लंदन) में रह रहे भारतवंशी और भारत से तमाम लोगों के समर्थन से हौसला बढ़ गया है।
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बदनामी के पीछे भारतीय मूल की प्रोफेसर
करण की छवि धूमिल करने का आरोप एक भारतीय मूल की प्रोफेसर मुकुलिका बनर्जी पर लग रहा है। ब्रिटिश भारतीय अदित ने ट्विटर पर व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा, मुकुलिका ने साजिश के तहत करण को अयोग्य ठहराए जाने के लिए शिकायत करते हुए कहा था कि वह आरएसएस से जुड़ा है, जो कि एक फासीवादी और हिंदू राष्ट्रवादी संगठन है। अदित ने लिखा, ये शिक्षाविद नहीं, बल्कि ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में जन्मी भारत और हिंदू विरोधी राजनीति का स्याह चेहरा हैं। मुकुलिका को तत्काल प्रभाव से एलएसई से बाहर करना चाहिए।
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प्रवासी समुदाय का मिला समर्थन
करण को लंदन में रहने वाले प्रवासी भारतीयों सहित तमाम लोगों से समर्थन मिल रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी छात्र संघ की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष रश्मित सामंत कहती हैं, मुझे भी हिंदू होने पर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रताड़ित किया, धमकाया और अपमानित किया गया और मुझे इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। करण को देखना दिल तोड़ने वाला है। वहीं, एलएसई की एक छात्रा तेजस्विनी शंकर ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट कर बताया कि किस तरह चुनाव के आखिरी दिन करण के खिलाफ एक दुर्भावनापूर्ण अफवाह फैलाई गई और उनके लिए प्रचार करने वालों को परेशान किया गया। उनका साथ देने वाले तमाम दूसरे छात्रों को हिंदू फासीवादी, परजीवी और बेइमान भूरे लोग कहा जाता है।
ब्रिटिश पत्रकार ने की जांच की मांग
ब्रिटिश पत्रकार नेओमी केंटन ने इस पूरी घटना को दुखद बताया है। उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री रॉबर्ट हैल्फन से इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा, क्या वाकई ब्रिटेन भारतीयों छात्रों को यही संदेश देना चाहता है कि वे यहां आएंगे, तो उन्हें प्रताड़ना और दबंगई झेलनी होगी।
यूनिवर्सिटी ने दी सफाई
वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि वह किसी भी तरह की प्रताड़ना के खिलाफ हैं। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र संघ चुनाव की समीक्षा करने की बात कही है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि नियमों के तहत छात्र संघ चुनाव के उम्मीदवारों को वोट डाल रहे छात्रों से दो मीटर की दूरी बनाकर रखनी होती है। इसका उल्लंघन करने पर एक छात्र को अयोग्य घोषित कर दिया गया है।