अमेरिका: पढ़ाई के बाद विदेशी छात्रों के देश में रुकने के खिलाफ संसद में विधेयक पेश
अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने एक बार फिर प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) में विदेशी छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद काम के लिए रुकने देने का कार्यक्रम बंद करने संबंधी विधेयक पेश किया। फिलहाल विदेशी छात्रों को कुछ निश्चित शर्तों के साथ उनकी अमेरिका में पढ़ाई पूरी होने के बाद भी वहां रुकने की मंजूरी दी जाती है।
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सांसद पॉल ए गोसर के साथ सांसद मो ब्रूक्स, एंडी बिग्स और मैट गेट्ज ने ‘फेयरनेस फॉर हाई-स्किल्ड अमेरिकन एक्ट’ पेश किया। इस बिल के पारित होने पर इसके जरिए वैकल्पिक अभ्यास प्रशिक्षण (ऑप्ट) के लिए आव्रजन एवं राष्ट्रीयता अधिनियम में संशोधन मुमकिन हो पाएगा।
गोसर ने कहा, कौन सा देश ऐसा कानून नहीं, बल्कि कार्यक्रम बनाता है, जो अपने व्यवसायों से देश के नागरिकों को निकालने और उनके स्थान पर विदेशी श्रमिकों को रखने के लिए पुरस्कृत करता है... निश्चित ही यह देश है अमेरिका। इस कार्यक्रम का नाम है ‘ऑप्ट’ और यह हमारे अपने कामगारों के पूर्ण परित्याग को दर्शाता है।
गोसर ने पहली बार 116वीं संसद में ‘फेयरनेस फॉर हाई-स्किल्ड अमेरिकन एक्ट’ पेश किया था और ऑप्ट को खत्म करने के लिए गृह मंत्रालय के खिलाफ एक मुकदमे में हस्ताक्षर भी किए थे।
एच-1बी सीमा के नियम दरकिनार
सांसद पॉल ए गोसर ने आरोप लगाया कि ऑप्ट कार्यक्रम ने एक लाख से अधिक विदेशी छात्रों को स्नातक के बाद अमेरिका में तीन साल तक काम करने की अनुमति देकर एच-1बी सीमा के नियम दरकिनार किए हैं। इन विदेशी कामगारों को पेरोल करों से छूट दी गई है, जिससे उनका खर्चा एक अमेरिकी श्रमिकों की तुलना में करीब 10 से 15 फीसदी तक कम हो जाता है।
28-29 अक्तूबर को चौथा हिंद-प्रशांत बिजनेस फोरम
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि भारत सरकार, यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स और यूएस-आसियान बिजनेस काउंसिल के साथ अमेरिका की सरकार चौथे वार्षिक हिंद-प्रशांत बिजनेस फोरम को प्रायोजित कर रही है। यह बिजनेस फोरम ऑनलाइन माध्यम से 28 और 29 अक्तूबर को आयोजित होगा।
दिल्ली में भारतीय रक्षा अधिकारियों से मिले यूएस स्पेशल ऑपरेशन कमांड के कमांडर
अमेरिका की स्पेशल ऑपरेशन कमांड के कमांडर जनरल रिचर्ड डी क्लार्क ने गुरुवार को नई दिल्ली में भारतीय रक्षा अधिकारियों के साथ अमेरिकी दूतावास में मुलाकात की। अमेरिकी दूतावास ने इसे लेकर कहा कि ये बैठकें एशिया के कई देशों के माध्यम से नियमित यात्रा का हिस्सा हैं। इस दौरान इस बात पर चर्चा की गई कि रक्षा भागीदारी बढ़ाने के लिए दोनों देश क्या कर सकते हैं। इससे पहले जनरल रिचर्ड राष्ट्रीय युद्ध स्मारक भी गए और शहीदों को श्रृद्धांजलि अर्पित की।