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Martial Law Pakistan: पाकिस्तान में लग सकता है मार्शल लॉ! विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने जताई आशंका
Tue, 04 Apr 2023 07:48 PM IST
शिव शरण शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 04 Apr 2023 07:48 PM IST
सार
पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने कहा कि खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) और पंजाब में चुनावों पर तीन न्यायाधीशों के किसी भी फैसले को उनकी पार्टी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी फुल कोर्ट के फैसले को स्वीकार करेगी और उसे लागू करेगी।
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बिलावल भुट्टो (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
पाकिस्तान इन दिनों भीषण आर्थिक और राजनैतिक संकट से जूझ रहा है। इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने संवैधानिक संकट के चलते देश में मार्शल लॉ या आपातकाल जैसी स्थिति होने की बात कही है। हालांकि उन्होंने कहा कि ये तब हो सकता है जब पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में चुनाव से संबंधित इमरान खान की पार्टी पीटीआई की याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट अपनी एक बड़ी बेंच का गठन नहीं करती है। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग के आदेश के खिलाफ पीटीआई की याचिका पर तीन जजों की बेंच द्वारा दिया गया फैसला मानने से इनकार कर दिया।
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पाकिस्तान के विदेश मंत्री और पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने सिंध प्रांत में अपनी सीट लरकाना में सोमवार को यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खैबर-पख्तूनख्वा (केपी) और पंजाब में चुनावों पर तीन न्यायाधीशों के किसी भी फैसले को उनकी पार्टी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी फुल कोर्ट के फैसले को स्वीकार करेगी और उसे लागू करेगी।
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उन्होंने कहा कि उनकी पीपीपी संविधान की रक्षा कर रही है। इसके संस्थापक जुल्फिकार अली भुट्टो ने देश को 1973 का संविधान दिया था, जिसे बाद में परवेज मुशर्रफ जैसे तानाशाहों ने खंडित कर दिया था, बावजूद इसके पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इसे बहाल कर दिया था।
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इमरान खान पर साधा निशाना
इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तानाशाहों के बेटे और बेटियां पीटीआई में हैं। उन्होंने कहा कि तीन जजों के फैसले को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इन तीन जजों में से एक ने अपने फैसले के जरिए पिछले साल मुख्यमंत्री के चुनाव में कुछ वोटों को खारिज कर पंजाब सरकार को पीटीआई के हवाले कर दिया था। उन्होंने पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश से राष्ट्र के व्यापक हित में एक पूर्ण अदालत गठित करने को कहा।
चुनाव आयोग के आदेश पर लगाई रोक
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब प्रांत में आठ अक्तूबर तक चुनाव स्थगित करने के चुनाव आयोग के फैसले को 'असंवैधानिक' बताया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने प्रांत में मतदान के लिए 14 मई की तारीख भी तय की। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद सुरक्षा मुद्दों और आर्थिक संकट का हवाला देते हुए प्रांतीय चुनाव में देरी करने की कोशिश कर रही शहबाज सरकार को करारा झटका लगा है। वहीं, इसे इमरान खान के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले 22 मार्च को पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पंजाब प्रांत में विधानसभा चुनावों देरी करते हुए कहा था कि देश नकदी की कमी से जूझ रहा है और देश में सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति है। ऐसे में इस समय चुनाव नहीं कराए जा सकते। तब आयोग ने आठ अक्तूबर को मतदान की नई तारीख का एलान करने की बात कही थी। बता दें कि उससे पहले चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल से 8 अक्टूबर के बीच मतदान कराने का फैसला लिया था। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस कदम की आलोचना की थी।
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार की तत्काल रिहाई पर लगाई रोक
राजनैतिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान में सरकार और शीर्ष न्यायपालिका के बीच बढ़ते विवाद के बीच सीजेपी उमर अता बंदियाल ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को अपने पद का प्रभार नहीं छोड़ने का निर्देश दिया।