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डब्ल्यूएचओ भी विरोध में: अमेरिका में क्यों विवादित हो गई कोरोना वैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने की योजना?

Wed, 22 Sep 2021 05:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 22 Sep 2021 05:04 PM IST
सार

विश्लेषकों के मुताबिक बूस्टर डोज का मामला शुरू से ही विवादित रहा है। अमेरिका के फूड एंड ड़्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने सिर्फ 65 से से अधिक उम्र के लोगों को बूस्टर डोज लगाने की सिफारिश की है। लेकिन बाइडन प्रशासन 16 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को इसे लगाने की मुहिम छेड़ चुका है...

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Biden administration launched a campaign to vaccine booster dose jab to everyone over the age of 16, people opposed
कोरोना वैक्सीनेशन - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका में सबको कोविड-19 के वैक्सीन का बूस्टर डोज लगाने के राष्ट्रपति जो बाइडन की पहल आलोचनाओं और भ्रम का शिकार हो गई है। बूस्टर डोज लगाने का अभियान इसी हफ्ते अमेरिका में शुरू किया गया है। विश्लेषकों के मुताबिक बूस्टर डोज का मामला शुरू से ही विवादित रहा है। अमेरिका के फूड एंड ड़्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने सिर्फ 65 से से अधिक उम्र के लोगों को बूस्टर डोज लगाने की सिफारिश की है। लेकिन बाइडन प्रशासन 16 साल से अधिक उम्र के हर व्यक्ति को इसे लगाने की मुहिम छेड़ चुका है। टीवी चैनल एनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मुद्दे को लेकर महीने भर तक चले विवाद में कई वैज्ञानिकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस एजेंसी से बाहर के कुछ मेडिकल विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि व्हाइट हाउस बूस्टर डोज को हरी झंडी दिलवाने के लिए एफडीए पर अनुचित दबाव डाल रहा है।

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आरंभ में बाइडन प्रशासन के सलाहकार रह चुके संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. सेलाइन गाउंडनर ने एनबीसी से कहा- ‘ये कहना अलग बात होती कि दवा कंपनियों, स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों को बूस्टर डोज लगाने के लिए तैयार रहना चाहिए। लेकिन आम जनता को यह बताना कि 20 सितंबर ये डोज सबको लगाया जाएगा, बिल्कुल अलग बात है। मेरी राय में इस बिंदु पर बात गलत दिशा में चली गई।’
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आरोप है कि एफडीए की समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही पिछले महीने बाइडन प्रशासन ने बूस्टर डोज लगाने के असाधारण कदम का एलान कर दिया। लेकिन बीते शुक्रवार को एफडीए के सलाहकारों ने इस फैसले के खिलाफ राय जता दी। उन्होंने कहा कि बूस्टर डोज की जरूरत सिर्फ बुजुर्ग नागरिकों और उन लोगों को है, जिन्हें संक्रमण का अधिक खतरा है। उसके बाद अमेरिका के सर्जन जनरल डॉ. विवेक मूर्ति ने कहा कि प्रशासन एफडीए और सीडीसी (रोग नियंत्रण एवं निवारण एजेंसी) की सिफारिशों का पालन करेगा।

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लेकिन खबरों के मुताबिक इस घोषणा के पहले ही लगभग दस लाख लोगों को बूस्टर यानी वैक्सीन की तीसरी डोज लगाई जा चुकी है। इसको लेकर अब व्हाइट हाउस की कड़ी आलोचना हो रही है। इसके बावजूद कई अधिकारियों ने बाइडन प्रशासन के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा है कि टीका लगवा चुके लोगों के कोविड-19 से फिर से संक्रमित होने की घटनाओं में वृद्धि को देखते हुए ये कदम उठाया गया था। एक अधिकारी ने कहा है- ‘इस्राइल, ब्रिटेन, जर्मनी आदि जैसे देशों में पहले ही बूस्टर डोज लगाई जा रही थी। उसे देखते हुए अगर हम कुछ नहीं करते, तो हमसे पूछा जाता कि बूस्टर डोज के बारे में आपकी योजना क्या है?’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बूस्टर डोज पर तुरंत रोक लगाने की अपील की है। स्वास्थ्य क्षेत्र के कई दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी ऐसी ही मांग की है। इन संगठनों ने कहा है कि जब गरीब देशों में महज 20 फीसदी लोगों का टीकाकरण हुआ है, तब बाइडन ने अमेरिका में तीसरा डोज लगाने का फैसला कर लिया। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस अधनोम गेब्रेयेसस ने इसी महीने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था- ‘जब वैक्सीन की वैश्विक आपूर्ति को नियंत्रित करने वाली कंपनियां और देश यह सोचते हैं कि दुनिया के गरीब लोग वंचित रहने की अपनी स्थिति को स्वीकार कर लें, तब मैं चुप नहीं रह सकता।’

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