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Trump Tariffs: 'अनावश्यक व्यापारिक टकराव की शुरुआत'; भारत पर ट्रंप के टैरिफ पर यूएस मीडिया में किसने क्या लिखा

Fri, 01 Aug 2025 05:11 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 01 Aug 2025 05:11 AM IST
सार

वॉशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार डेविड इग्नेशियस ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन बार-बार सहयोगियों को भी उसी कठोर लाठी से हांकने की गलती कर रहा है, जिससे वह प्रतिद्वंद्वियों को नियंत्रित करना चाहता है। भारत के खिलाफ यह कदम, उस वक्त जब चीन और रूस के बीच गठजोड़ बढ़ रहा है, रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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'beginning of an unnecessary trade conflict'; Know who wrote what in US media on Trump's tariffs on India
भारत अमेरिका व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक) - फोटो : एडॉब स्टॉक

विस्तार

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित चुनिंदा उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने की घोषणा ने अमेरिकी व्यापार विशेषज्ञों, मीडिया और उद्योग संगठनों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है। इसे जहां कुछ हलकों में ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के तार्किक विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, वहीं कई अर्थशास्त्रियों और मीडिया के बड़े वर्ग ने इसे अनावश्यक व्यापारिक टकराव की शुरुआत बताया है, जो भारत जैसे रणनीतिक साझेदार के साथ संबंधों को चुनौती में डाल सकता है। एक तरह से यह आर्थिक युद्ध का एलान है, जिसके दूरगामी परिणाम अच्छे नहीं होंगे।

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वॉशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार डेविड इग्नेशियस ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन बार-बार सहयोगियों को भी उसी कठोर लाठी से हांकने की गलती कर रहा है, जिससे वह प्रतिद्वंद्वियों को नियंत्रित करना चाहता है। भारत के खिलाफ यह कदम, उस वक्त जब चीन और रूस के बीच गठजोड़ बढ़ रहा है, रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए नुकसानदेह हो सकता है। अखबार ने यह भी आगाह किया कि इस फैसले से भारतीय संसद में अमेरिका-विरोधी भावनाएं तेज हो सकती हैं और वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) में अमेरिकी प्रभाव को चुनौती मिल सकती है।
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न्यूयॉर्क टाइम्स : घरेलू औद्योगिक लॉबी को साधने का प्रयास
न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि यह आर्थिक रणनीति नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक सख्ती है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस निर्णय की तीखी आलोचना करते हुए लिखा है कि ट्रंप प्रशासन का यह कदम विशुद्ध रूप से राजनीतिक है, जो नवंबर 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू औद्योगिक लॉबी को साधने का प्रयास है। अखबार ने कहा कि भारत से आयातित फार्मास्युटिकल्स, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग गुड्स पर टैरिफ बढ़ाने से अमेरिकी चिकित्सा और विनिर्माण उद्योगों की लागतों में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है।
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 ब्लूमबर्ग : भारत अब वैकल्पिक बाजार तलाशेगा...
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत को चीन से इतर एक स्थिर और लोकतांत्रिक आपूर्ति श्रृंखला साझेदार मानते हुए अब तक अमेरिका ने सतर्क व्यापार नीति अपनाई थी। लेकिन 25% टैरिफ भारत को दक्षिण एशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया में अन्य बाजारों की ओर मोड़ सकता है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से लिखा गया है कि यह कदम अमेरिका के लिए लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजिक लॉस में बदल सकता है।

सहयोग बनाम टकराव का नया मोड़
ट्रंप के इस फैसले को अमेरिका-भारत संबंधों में एक मजबूत दोस्त से आर्थिक प्रतिद्वंद्वी की ओर रुख करने के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अमेरिकी मीडिया और थिंक टैंक इस बात को लेकर लगभग एकमत हैं कि यह फैसला अल्पकालिक राजनीतिक फायदे के लिए दीर्घकालिक कूटनीतिक साझेदारी को खतरे में डाल सकता है, इसलिए आर्थिक युद्ध के इस एलान को समय रहते दुरुस्त किया जाना चाहिए।

वॉल स्ट्रीट जर्नल  चीन के साथ भारत से भी दूरी
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपने संपादकीय में सवाल उठाया कि यदि अमेरिका चीन से दूरी बना रहा है और अब भारत से भी व्यापार संबंधों में तनाव ला रहा है, तो वह वैश्विक सप्लाई चेन में किस पर भरोसा करेगा? रिपोर्ट में अमेरिकी व्यापार परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स डनहम के हवाले से लिखा गया कि, भारत जैसे लोकतांत्रिक और तेजी से बढ़ते हुए बाजार को दरकिनार करना एक रणनीतिक भूल हो सकती है।

यूएसए टुडे ने कहा-बढ़ेगी महंगाई
यूएसए टुडे और लॉस एंजिल्स टाइम्स ने ट्रंप के फैसले को घरेलू राजनीति से प्रेरित और रणनीतिक दृष्टिकोण से संकुचित कदम बताया। यूएसए टुडे ने लिखा कि फैसला अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए महंगाई बढ़ाने वाला हो सकता है। खासकर जेनेरिक दवाओं और ऑटो पार्ट्स के क्षेत्र में, जबकि लॉस एंजिल्स टाइम्स ने इसे ऐसे सहयोगी को किनारे लगाने की गलती बताया, जो चीन के प्रभाव को संतुलित करने में अमेरिका का स्वाभाविक भागीदार है। दोनों अखबारों ने चेताया कि टैरिफ नीति भारत के साथ दशकों से चले आ रहे भरोसे को कमजोर कर सकती है और अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर सकती है।


नॉन-मॉनेटरी ट्रेड बैरियर्स पहले ही काफी हैं
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के वरिष्ठ शोधार्थी जोनाथन हार्डिंग ने कहा कि भारत पर पहले से ही नॉन-मॉनेटरी ट्रेड बैरियर्स जैसे तकनीकी अनुपालन, पेटेंट बाध्यताएं और एफडीए अनुमोदन जैसी जटिलताएं लागू हैं। ऐसे में अतिरिक्त टैरिफ लगाना ओवर-कंपेन्सेशन है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन बढ़ेगा और भारत में एंटी-अमेरिकन व्यापारिक भावनाएं प्रबल हो सकती हैं।

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