Bhangladesh: 'लोगों को मारकर मेरी सरकार को नहीं हटा सकती'; हसीना ने ट्रेन हादसे के लिए BNP को ठहराया जिम्मेदार
राजनीतिक अशांति के बीच बांग्लादेश चुनाव आयोग ने 15 नवंबर को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी। इसके मुताबिक, 7 जनवरी को देश में आम चुनाव होना है। वहीं, बीएनपी इसका विरोध कर रही है। उसका कहना है एक तटस्थ अतंरिम सरकार का गठन करके देश में चुनाव कराए जाने चाहिए।
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भारत के पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में नए साल की शुरुआत में ही आम चुनाव होना है। ऐसे में वहां राजनीतिक घटनाक्रम बड़ी तेजी से बदल रहा है। इस बीच, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के चुनाव का बहिष्कार करने के बाद से शेख हसीना का विरोध और भी ज्यादा हो गया है। यहां बुधवार को प्रदर्शनकारियों द्वारा रेवले लाइन का एग हिस्सा तोड़ दिए जाने के कारण एक ट्रेन पटरी से उतर गई। इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों ने कई बसो और ट्रकों में आग भी लगा दी। इसके बाद पीएम शेख हसीना ने बीएनपी पर हमला बोला है।
शेख हसीना ने बीएनपी पर देश में अशांति फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी बीएनपी लोगों को मारकर उनकी सरकार को हटा नहीं सकती। उन्होंने कहा कि लोगों को मारकर या जलाकर वे किस प्रकार का आंदोलन चला रहे हैं। जो लोग ऐसे कृत्य करते हैं वे माफी के नहीं बल्कि सजा के पात्र हैं और उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
बीएनपी ने किया हमलों में शामिल होने से इनकार
वहीं दूसरी ओर, बीएनपी ने इन हमलों में खुद की संलिप्तता से इनकार किया है। बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने वर्चुअली अपना एक बयान जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि ट्रेन के पटरी से उतरने के लिए बीएनपी जिम्मेदार नहीं है। यह निस्संदेह तोड़फोड़ का कार्य है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। ऐसे अमानवीय कार्यों के लिए जिम्मेदार लोग मानवता के दुश्मन हैं। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की।
ढाका के बाहरी इलाके में हुआ हादसा
ट्रेन हादसा बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बाहरी इलाके गाजीपुर में हुआ। पुलिस ने इस बारे में बताया कि अज्ञात लोगों द्वारा 20 फुट लंबी रेलवे लाइन काट दिए जाने के बाद एक ट्रेन का इंजन और सात डिब्बे पटरी से नीचे उतर गए। इस हादसे में एक यात्री की मौत हो गई और 10 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने संदेह जताया है कि इसके पीछे देश की मुख्य विपक्षी पार्टी द्वारा बुलाई गई देश व्यापी परिवहन बंदी हो सकती है।
15 नवंबर को घोषित हुई थी चुनाव की तारीख
राजनीतिक अशांति के बीच चुनाव आयोग ने 15 नवंबर को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। इसके मुताबिक, 7 जनवरी को देश में आम चुनाव होना है। वहीं, बीएनपी इसका विरोध कर रही है। उसका कहना है एक तटस्थ अतंरिम सरकार का गठन करके देश में चुनाव कराए जाने चाहिए। बीएनपी ने बार-बार कहा है कि मौजूदा सरकार के तहत कोई भी चुनाव निष्पक्ष नहीं हो सकता। अवामी लीग ने इसे सिरे से खारिज कर कहा कि संविधान के अनुरूप मौजूदा प्रधानमंत्री हसीना के पद पर रहते ही चुनाव कराए जाएंगे। बता दें कि बीएनपी ने 2014 में भी चुनाव का बहिष्कार किया था। हालांकि, 2018 के चुनावों में इस दल ने भाग लिया। बाद में पार्टी के नेताओं ने इस फैसले को एक गलती बताया। मतदान में बड़े पैमाने पर धांधली और धमकी के आरोप भी लगाए।
अमेरिका और अन्य प्रमुख पश्चिमी देशों ने समावेशी और विश्वसनीय चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश के सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बातचीत का आह्वान किया है। बता दें कि बांग्लादेश एक संसदीय लोकतंत्र है, जहां विशेषकर चुनावों से पहले और चुनाव के दौरान हिंसा का इतिहास रहा है। पिछले दो सप्ताह में हुई राजनीतिक हिंसा में एक पुलिसकर्मी समेत कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई। विरोध प्रदर्शन के दौरान 200 से अधिक लोग घायल हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देशव्यापी कार्रवाई में बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर समेत करीब 8,000 विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।